Coronavirus: रिकवरी के बाद भी क्यों पॉजिटिव मिल रहे हैं मरीज

लक्षणों पर नजर रखने और हालात बदलने पर डॉक्टरों से संपर्क करने की जरूरत है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
लक्षणों पर नजर रखने और हालात बदलने पर डॉक्टरों से संपर्क करने की जरूरत है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

हाल ही में चेन्नई में कई मरीज ठीक होने के बाद दोबारा कोरोना पॉजिटिव (coronavirus positive) मिले. तो क्या मरीजों को दोबारा संक्रमण हो रहा है? जानिए, क्या कहते हैं एक्सपर्ट.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2020, 6:44 AM IST
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वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) का जेनेटिक मटेरियल या आरएनए (RNA) कोशिकाओं में लंबे समय तक मौजूद रह सकता है. ऐसे में अगर संक्रमण से उबर चुके मरीज का एक या दो महीने बाद भी न्‍यूक्लिक एसिड टेस्‍ट (NAT) किया जाएगा तो उसका कोरोना टेस्‍ट पॉजिटिव आएगा. ऐसे में घबराने की बात नहीं, बल्कि लक्षणों पर नजर रखने और हालात बदलने पर डॉक्टरों से संपर्क करने की जरूरत है.

दक्षिण कोरिया (South Korea) के वैज्ञानिकों का कहना है कि SARS-CoV-2 वायरस किसी व्‍यक्ति को संक्रमित करने और श्‍वसन तंत्र में फैलने के एक से दो हफ्तों के भीतर मर जाता है. सियोल में नेशनल मेडिकल सेंटर के डॉक्‍टर्स ने कहा कि कोरोना वायरस का जेनेटिक मैटेरियल (Genetic material) या आरएनए (RNA) कोशिकाओं में रह जाता है. संक्रमण के एक या दो महीने बाद किए गए न्‍यूक्लिक एसिड टेस्‍ट (NAT) में इन पार्टिकल्‍स के बारे में पता चला है. इससे भी साफ होता है कि हमारे पास फिलहाल मौजूद कोरोना टेस्‍ट की अपनी सीमाएं हैं.

प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो जाने के कारण बाहरी कारणों से दोबारा संक्रमित होने की आशंका काफी कम है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)




ऑस्‍ट्रेलिया की सरकार को संक्रमण पर काबू पाने के लिए सलाह देने वाले ऑस्‍ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी मेडिकल स्‍कूल में क्‍लीनिकल मेडिसिन के प्रोफेसर पीटर कोलिगनन ने कहा कि कुछ COVID-19 मरीज एक महीने के बाद भी हर टेस्‍ट में पॉजिटिव पाए जाते रहे हैं. उनके मुताबिक, हो सकता है कि ऐसे मरीजों में पाया गया वायरस अपनी संख्‍या में वृद्धि नहीं कर पा रहा हो या नुकसान नहीं पहुंचा पा रहा हो.
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पीटर कोलिगनन के मुताबिक, हमें बेहतर तरीके से ये पता करना ही होगा कि ये वायरस मरीज की कोशिकाओं में मर चुका है या जिंदा है. वह कहते हैं कि दक्षिण कोरिया में किए गए शोध के नतीजे मौजूदा समय में सही नजर आ रहे हैं. फिर भी अभी संक्रमण की अवधि को लेकर ऐसे बहुत से सवाल हैं, जिनका अब तक जवाब नहीं मिला है. वहीं, ये भी जानना जरूरी है कि एक व्‍यक्ति कितने दिनों तक संक्रमण फैलाने लायक वायरस को खांसकर, छींककर, बोलकर, थूककर या सांस के जरिये बाहर निकाल सकता है.

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कोलिगनन का कहना है कि ऐसे सवालों के जवाब मिलने पर संक्रमित व्‍यक्ति को क्‍वारंटीन या आइसोलेट करने की सही अवधि (Duration of Isolation) भी पता चल जाएगी. अब तक अध्‍ययनों से पता चला है कि गंभीर रूप से बीमार मरीज मामूली लक्षणों वाले संक्रमित के मुकाबले कम कोरोना वायरस फैला पाते हैं. यानी संक्रमित होने के बाद भी लक्षण नजर नहीं आने वाले लोग (Asymptomatic) ज्‍यादा तेजी से कोरोना वायरस को फैला सकते हैं.

कोशिकाओं में मौजूद मृत पार्टिकल्‍स के जरिये ये फिर सक्रिय भी हो सकता है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


बता दें कि कोरिया के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (KCDC) ने अप्रैल की शुरुआत में ही कह दिया था कि संक्रमण से उबर चुके लोगों में वायरस फिर से सक्रिय हो सकता है और ऐसे लोग दोबारा बीमार हो सकते हैं. उस समय कोरिया में 51 ऐसे मरीज थे, जो पूरी तरह से ठीक होने के बाद फिर से कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. इसके बाद से अब तक वहां के हालात बदल रहे हैं और बीच-बीच में क्लस्टर संक्रमण की खबरें आ रही हैं.

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सीडीसी (Centers for Disease Control and Prevention) का कहना है कि कोरोना वायरस ठीक हो चुके मरीजों को फिर अपनी चपेट में तो ले ही सकता है, उनकी कोशिकाओं में मौजूद मृत पार्टिकल्‍स के जरिये ये फिर सक्रिय भी हो सकता है. द इंडियन एक्‍सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया के सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी में इंटरनल मेडिसिन के प्रोफेसर मियॉन्‍ग डॉन का कहना है कि ठीक होने के बाद मरीज में कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो जाने के कारण बाहरी कारणों से दोबारा संक्रमित होने की आशंका काफी कम है. वैसे फिलहाल जानकारी की कमी के कारण यह बताना काफी मुश्किल है कि ठीक हो चुके मरीजों में से कौन दोबारा संक्रमित हो रहा है और किसमें कोरोना दोबारा सक्रिय हो रहा है.
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