लाइव टीवी

Coronavirus: वैज्ञानिकों को मिली सफलता, शोध में वैक्सीन के नतीजों से उत्साह

Vikas Sharma | News18Hindi
Updated: April 3, 2020, 12:14 PM IST
Coronavirus: वैज्ञानिकों को मिली सफलता, शोध में वैक्सीन के नतीजों से उत्साह
कोरोना वायरस के इस शोध में अब तक वैसे ही नतीजे आए हैं जैसे कि2014 मर्स की वैक्सीन बनाते समय आ रहे थे.

कोरोना वायरस (Corona Virus) निपटने के लिए चल रहे शोधों में नतीजे सामने आने लगे हैं. हालिया नतीजों में इसकी वैक्सीन (Vaccine) बनाने में अहम नतीजे मिल रहे हैं. नतीजों से उत्साहित वैज्ञानिक अब इसके इंसानों पर आजमाने की तैयारी कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 3, 2020, 12:14 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona Viurs) के खिलाफ भारत सहित दुनिया भर में जंग जारी है. एक तरफ इस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन जैसे कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ डॉक्टर और वैज्ञानिक भी इसके लिए गहन प्रयास कर रहे हैं. उन्हें इसमें सफलता भी दिखाई देने लगी है. अमेरिकी वैज्ञानिकों को इस वायरस से हो रही कोविड-19 (Covid-19) बीमारी के खिलाफ लड़ने वाले एंटीबॉडीज को बनाने में सफलता मिली है.

दो हफ्तों में बेअसर कर देगी वायरस को
पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी की स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं को उत्साह जनक सफलता मिली है. उन्होंने एक सक्षम कोरोना वायरस वैक्सीन विकसित कर ली है जो कोविड-19 से लड़ने के लिए पर्याप्त एंटीबॉडीज बनाने में सक्षम है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह वैक्सीन इंजेक्ट करने के दो हफ्तों में ही वायरस को बेअसर करने में सक्षम है.

मानवीय परीक्षण के लिए मांगी है इजाजत



इस वैक्सीन का प्रयोग शोधकर्ताओं ने अभी चूहों पर किया था जिसमें उन्हें बहुत ही उत्साहजनक नतीजे मिले हैं.  अध्ययन में इन शोधकर्ताओं ने बताया है कि अब वे अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से इस वैक्सीन को अगले कुछ महीनों में मानवीय परीक्षण (Human Clinical Trail) के पहले दौर के लिए इजाजत ले रहे हैं. इसके लिए उन्होंने आवेदन दे दिया है.



Corona Virus, Covid 19
कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर में तेजी से शोधकार्य हो रहा है.


दस लाख लोग हो चुके हैं संक्रमित
दुनिया में इस बीमारी से अब तक दस लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 53 हजार से ज्यादा की मौत हो चुकी है. इस बीमारी की वैक्सीन के लिए पहला मानवीय परीक्षण पिछले महीने सिएटल में हुआ था. इसके अलावा दुनिया भर में शोधकर्ता इस बीमारी की वैक्सीन केलिए शोध कर रहे हैं, लेकिन इस तरह के शोध में यह पहला अध्ययन है जो प्रकाशित हुआ है.

पहले ही हो गई थी थोड़ी तैयारी
माना जा रहा है कि वैज्ञानिक इस बीमरी से निपटने के लिए जल्दी से सक्रिय हो सके क्योंकि उन्होंने इससे पहले फैली कोरोना वायरस की महामारियों पर कुछ काम कर लिया था. 2003 में फैली सार्स और 2014 में फैली मर्स बीमारी को पहले ही किया गया शोध वैज्ञानिकों के काम आया.

क्या नाम दिया गया है इस वैक्सीन को
शोध से जुड़े एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रिया गैमबोटो ने का. “ये दो वायरस (सार्स और मर्स), जो कोविड-19 से नजदीकी से जुड़े हैं, ने हमें स्पाइक प्रोटीन के बारे में सिखाया जो इन वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी पैदा करने में अहम हैं. हम जानते थे कि इस वायरस के खिलाफ हमें कहां लड़ना है. इस वैक्सीन को इन शोधकर्ताओं ने पिटकोवैक नाम दिया है. यह वायरल प्रोटीन के लैब निर्मित टुकड़ों से बनकर प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है जैसा कि फ्लू में होता है.

चीन से ही दिसंबर के अंत में कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी


कैसे उपयोग किया जाता है इसका
शोधकर्ताओं ने इसका प्रभाव बढ़ाने के लिए दवा देने की नई तकनीक का उपयोग किया उन्होंने  ऊंगली की नोक के बराबर के 400 बहुत महीन सुइयों का पैच बनाया  जो त्वचा में स्पाइक प्रोटीन के टुकड़े इंजेक्ट कर देती है, जहां प्रतिरोधी क्षमता सबसे मजबूत होती है. यह पैच प्लास्टर की तरह चिपकता है और सुइयां  त्वचा के अंदर चली जाती है  जो शुगर और प्रोटीन से बनी होती हैं.

दर्द भी नहीं होता
शोध में शामिल रहे त्वचारोग विशेषज्ञ प्रोफेसर लुईस फालो ने बताया, “हमने वही स्टार्च पद्धति अपनाई जो स्मॉल पॉक्स के टीके को लगानेके लिए उपयोग की जाती थी.लेकिन यह एक एक हाई टेक संस्करण हैं जो ज्यादा कारगर है और इसे दूसरे मरीजों से भी बनाया जा सकता है. और इसमें दर्द भी नहीं होता है.”

भारत में भी संक्रमितों की संख्या 2000 पार कर चुकी है


 आसान होगा इसे ज्यादा बनाना
 शोधकर्ताओं का कहना है कि  इस वैक्सीन को बड़े पैमाने पर भी बनाया जा सकता है. यही समय की मांग भी है. एक बार पिटकोवैक बन गई तो इस ठंडा या फ्रिज में रखने की भी जरूरत नहीं हैं. इससे इसे लाने ले जाने में भी आसानी होगी.

क्या चूहों का प्रयोग इंसानों में भी होगा सफल
चूहों में जब पैटकोवैक का प्रयोग किया तो दो हफ्तों में ही तेजी से बहुत ज्यादा एंटीबॉडी बनने लगे. अभी लंबे समय  वाले नतीजे आने हैं, लेकिन पिछली बार मर्स वैक्सीन के मामले में भी चूहों में ऐसी ही प्रतिक्रिया दी थी और एक साल तक उनमें वायरस के लक्षण नहीं दिखे थे. कोविड-19 के मामले में ऐसा ही रवैया दिख रहा है. इस वैक्सीन ने अपना प्रभाव गामा रेडिएशिन से स्टेरेलाइज करने के बाद भी अपनी प्रभावोत्पादकता नहीं खोई है जो कि मानव परीक्षण की उपयुक्तता के लिए अहम है.

ऑस्ट्रेलिया में भी इसी तरह की वैक्सीन का दावा
अभी इसके संपूर्ण नतीजे आने में एक साल का समय या उससे ज्यादा भी लग सकता है. वहीं ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने भी इस बाद की घोषणा की है कि उन्हें भी कोविड-19 की वैक्सीन बनाने की दिशा में  नेवले की प्रजाती के जानवर फेरेट्स (Ferrets) पर किए प्रोयोगों पर सकारात्मक नतीजे मिल रहे हैं. अब

यह भी पढ़े:

कोरोना महामारी के बीच ब्रिटेन में संकटमोचक बने दो भारतवंशी

Coronavirus: लॉकडाउन के बीच देश भर में तेजी से गिरा अपराध का ग्राफ

लॉकडाउन के नियम: कहीं कुत्ते टहलाने की छूट, कहीं मर्दों-औरतों के लिए अलग दिन

देश के 16 बड़े वैद्यों ने PM मोदी को सुझाया कोरोना से जंग का तरीका,आप भी पढ़ें

हज़ारों और कोरोना वायरस आपदा खड़ी करने के इंतज़ार में हैं..!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 3, 2020, 12:14 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading