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कोरोना वायरस को लेकर ब्रिटेन के बच्चों में कौन सा सिंड्रोम पैदा हो रहा है?

ब्रिटेन में हर उम्र के बच्चे कुछ खास लक्षणों के साथ गंभीर रूप से बीमार हो अस्पताल पहुंचे हैं
ब्रिटेन में हर उम्र के बच्चे कुछ खास लक्षणों के साथ गंभीर रूप से बीमार हो अस्पताल पहुंचे हैं

लगभग तीन हफ्तों के भीतर ही ब्रिटेन (Britain) में हर उम्र के बच्चे कुछ खास लक्षणों के साथ गंभीर रूप से बीमार हो अस्पताल पहुंचे हैं. शरीर के अंदरुनी हिस्सों में सूजन के साथ फ्लू जैसे लक्षणों की वजह से उन्हें ICU में भर्ती करना पड़ा. अब डॉक्टर ये समझने में जुटे हैं कि कोरोना (corona) से इसका क्या ताल्लुक है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 28, 2020, 3:15 PM IST
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27 अप्रैल को यूके के हेल्थकेयर सिस्टम National Health Service (NHS) की ओर से डॉक्टरों को एक अर्जेंट अलर्ट भेजा गया. इसमें लगातार अस्पताल आ रहे बच्चों में एक समान लक्षणों की ओर इशारा करते हुए डॉक्टरों को सचेत रहने को कहा गया. सारे ही बच्चों में फ्लू जैसे लक्षणों के साथ शरीर के भीतर सूजन (multi-system inflammation) दिख रहा है. जांच करने पर कुछ कोरोना पॉजिटिव (corona positive) हैं, जबकि कुछ नहीं हैं.

इसके बाद से चिकित्सक ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या कोरोना वायरस की वजह से ऐसे लक्षण आ रहे हैं. अगर हां तो ये लंदन और ब्रिटेन तक ही सीमित हैं या फिर दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी ऐसा हो रहा है! सबसे पहले Health Service Journal में ये अलर्ट छपा और लोगों की नजरों में आया.

क्या ये संकेत कोरोना से जुड़े हुए हैं?
फिलहाल विशेषज्ञ इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि जांच के दौरान कई बच्चे कोरोना संक्रमित भी पाए गए. वहीं कई बच्चों में संक्रमण पॉजिटिव नहीं दिखा लेकिन दोनों ही श्रेणियों के बच्चों में समान लक्षण थे. ऐसे में टेस्ट के रिजल्ट पर भी संदेह किया जा रहा है. वैज्ञानिकों का पहले से ही मानना रहा है कि कोरोना टेस्ट का तरीका 100% सही नहीं होता है. अब इस बारे में भी खोजबीन हो रही है कि क्या कोरोना वायरस में कोई बदलाव हो रहा है, जो बच्चों में इस तरह से सामने आ रहा है. या फिर कोरोना के बीच ही किसी दूसरे वायरस या बैक्टीरिया का हमला हुआ है! NHS ने बीमार बच्चों की संख्या एकाएक बढ़ने के साथ ही अलर्ट किया ताकि डॉक्टर मरीजों को सही इलाज दे सकें और एक समान लक्षणों के बारे में सचेत भी रहें.
ब्रिटेन में लंदन को मिलाकर ऐसे 20 के आसपास मामले लगातार आए हैं




क्या हैं लक्षण
अस्पताल पहुंच रहे बच्चे काफी गंभीर हालत में होते हैं. उनमें टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (toxic shock syndrome) की तरह लक्षण होते हैं. ये एक तरह का बैक्टीरियल संक्रमण है, जिसके मरीज को शरीर के किसी जख्म पर इंफेक्शन हो जाता है. इससे तेज बुखार, लो ब्लडप्रेशर, उल्टियां और शरीर पर चकत्ते दिखने लगते हैं. गंभीर हालत में सांस लेने में भी परेशानी होने लगती है. कुछ बच्चे पेट में तेज दर्द के साथ डायरिया, हार्ट में सूजन जैसे लक्षणों के साथ आते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक ये सारे लक्षण शरीर मे किसी इंफेक्शन को बताते हैं. साथ ही ये भी पता चलता है कि संक्रमण से लड़ने में शरीर थक गया है. ऐसे में मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है. इसके अलावा बच्चों में होने वाली हार्ट की बीमारी Kawasaki disease में भी मिलते-जुलते लक्षण होते हैं, जो फिलहाल बच्चों में दिख रहे हैं.

नजर रखने की हिदायत
ब्रिटेन में लंदन को मिलाकर ऐसे 20 के आसपास मामले लगातार आए हैं. कोरोना से इसके कनेक्शन पर फिलहाल जांच चल रही है. एकाएक तीन ही हफ्तों के भीतर मिलते-जुलते लक्षण वाले मामले आने के कारण वहां अलर्ट जारी किया गया ताकि मामलों पर नजर रखी जा सके और ये पता चले कि कहीं इसकी वजह कोरोना संक्रमण तो नहीं. वैसे अब तक बच्चों में कोरोना संक्रमण नहीं के बराबर था, जबकि 65 से अधिक उम्र के लोग इसके लिए वल्नरेबल माने जा रहे हैं. इस बीच NHS ने बच्चों में ऐसा कोई भी लक्षण दिखने पर पेरेंट्स से उन्हें सीधे अस्पताल या पास के क्लिनिक ले जाने की सलाह दी है.

बच्चों के शरीर के अंदरुनी हिस्सों में सूजन के साथ फ्लू जैसे लक्षणों की वजह से उन्हें ICU में भर्ती करना पड़ा


इन खास लक्षणों में ये लक्षण शामिल हैं

  • बच्चा पीला पड़ जाए या छूने पर काफी ठंडा लगे.

  • सांस लेने में थोड़ी भी परेशानी दिखे या फिर सांस से घर्रर्र आवाज आए.

  • होंठ और नाखून नीले दिखने लगें.

  • बात करते हुए हकलाने लगे या पूरा वाक्य न बोल सके.

  • लगातार रोता दिखे या फिर लगातार सोता रहे.

  • शरीर में चकत्ते बन जाएं जो दबाने पर भी न जाएं.


वैसे सबसे पहला ह्यूमन कोरोना वायरस बच्चों में ही दिखा था. साल 1965 में दिखे इस वायरस को जर्नल ऑफ वायरोलॉजी ने OC43 नाम दिया जो बच्चों में श्वसन तंत्र पर असर डालता था. कोरोना के मामले में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) ने कोरोना वायरस पर रिस्क एसेसमेंट करते हुए ये देखने की कोशिश की थी कि इसका खतरा किन्हें ज्यादा है. इसका पैटर्न बताता है बुजुर्गों को इस वायरस से ज्यादा खतरा है.

वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है ज्यादा जानकारी
China CDC Weekly में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक 10 से 19 साल के बच्चों में केवल 1 प्रतिशत ही संक्रमण से प्रभावित निकले. वहीं 10 से कम उम्र के बच्चों में ये इंफेक्शन 1 प्रतिशत से भी कम दिखा. वैसे कोरोना की इस नई श्रेणी के बारे में वैज्ञानिक खास जानकारी नहीं जुटा सके हैं. जो जानकारी आती है, बाद में उसमें भी नए तथ्य जुड़ जाते हैं. जैसे पहले माना गया था कि कोरोना इंसानों से इंसानों में फैलने वाली बीमारी नहीं. मार्च मोें WHO ये कह सका कि ये एक-दूसरे में फैलती है. अब अगर ब्रिटेन के बच्चों में दिख रहे नए लक्षणों का कोरोना से संबंध नजर आए तो कोई हैरत की बात नहीं होगी.

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