बारिश में और बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण, वैज्ञानिकों ने किया आगाह

बारिश में और बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण, वैज्ञानिकों ने किया आगाह
कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है. (Photo-pixabay)

दिसंबर में सामने आए कोरोना वायरस (coronavirus) के बारे में वैज्ञानिकों का मानना था कि ये गर्मी के साथ खत्म हो जाएगा. हालांकि ऐसा हुआ नहीं. अब एक्सपर्ट कयास लगा रहे हैं कि बारिश में कोरोना संक्रमण (corona infection in rainy season) और बढ़ सकता है. जानिए, क्या है इसकी वजहें.

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कोरोना वायरस से अब तक 61 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. मौत का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है. मरीजों में वायरस के अलग-अलग लक्षणों के कारण वैज्ञानिकों को भी इस वायरस को समझने में मुश्किल हो रही है. इसी बीच एक डराने वाली चेतावनी सामने आई है. बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि बारिश के साथ ही वायरस का खतरा और बढ़ने वाला है. कई वैज्ञानिक इसे वायरस की दूसरी लहर भी बता रहे हैं.

इस बारे में लगातार स्टडी चल रही है कि बदलते मौसम का वायरस पर क्या असर हो सकता है. जैसे यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के मुताबिक पानी से वायरस खत्म नहीं होते हैं. बल्कि नमी और कम तापमान में वायरस के जिंदा रहने और पनपने का खतरा बढ़ता ही है. अब चूंकि अधिकांश देश लॉकडाउन हटा रहे हैं तो इस दौरान बारिश के पानी में एक्सपोज होना संक्रमण का खतरा और बढ़ाएगा.

यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर में एपिडेमियोलॉजी विभाग की वैज्ञानिक डॉ जेनिफर होर्ने ने wboc को दिए एक इंटरव्यू में बारिश को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि बारिश के पानी में सफाई करने लायक असर नहीं होता है. और न ही ये वायरस को खत्म कर पाता है, बल्कि बारिश का मौसम कई सारी मौसमी बीमारियां लेकर आता है, जिनमें वायरस और बैक्टीरियल दोनों तरह की बीमारियां हैं. चूंकि कोरोना भी वायरस है इसलिए ये भी दूसरे वायरसों की तरह ही व्यवहार करेगा, ऐसा माना जा रहा है. यह ठीक उसी तरह है कि हाथ पानी से धोएंगे तो वायरस नहीं मरेगा, साबुन लगाना पड़ेगा.



नमी और कम तापमान में वायरस के जिंदा रहने और पनपने का खतरा बढ़ता ही है (Photo-pixabay)




फोर्ब्स मैगजीन में आई एक रिपोर्ट में साल 2017 की एक स्टडी का हवाला है. साइंस जर्नल इंटरनेशनल सोसायटी फॉर माइक्रोबियल इकॉलॉजी में आई ये स्टडी बताती है कि बारिश का पानी बैक्टीरिया को तो फिर भी खत्म कर पाता है लेकिन वायरस के पनपने के लिए ये काफी अनुकूल मौसम है.

साल 2012 में हुई एक स्टडी के ट्रेंड भी इसी ओर इशारा करते हैं कि बारिश का मौसम कोरोना संक्रमण को और बढ़ा सकता है. साइंस जर्नल करंट ओपिनियन इन वायरोलॉजी में आई इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने वायरस-रेनवॉटर रिलेशनशिप का अध्ययन किया. इसके मुताबिक वायरस किस तेजी से फैलता है ये सिर्फ वायरस की संक्रामकता पर नहीं, बल्कि कई चीजों पर निर्भर करता है. इसमें मौसम, ह्यूमिडिटी, तापमान और हवा का बहाव भी शामिल हैं. श्वसन तंत्र पर हमला करने वाले सारे वायरस इसी तरह से फैलते हैं. इसे और बेहतर तरीके से समझने के लिए मलेशिया में स्टडी हुई. इस दौरान देखा गया कि बारिश के मौसम में वहां respiratory syncytial virus (RSV) तेजी से फैलता है. भारत में भी ये स्टडी हुई लेकिन यहां पर अलग-अलग हिस्सों में बारिश में असमानता के कारण वायरस के फैलाव का प्रतिशत अलग-अलग रहा.

भारत के बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना का दूसरा चरण जुलाई-अगस्त में आ सकता है


वैसे पहले से ही एक्सपर्ट ये कह रहे हैं कि स्पेनिश फ्लू की तरह कोरोना वायरस भी एक के बाद एक चरणों में आएगा. भारत के बारे में उनका मानना है कि कोरोना का दूसरा चरण जुलाई-अगस्त में आ सकता है. भारत के वैज्ञानिकों का भी मत मिलता-जुलता है. जैसे टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु के प्रोफेसर राजेश सुंदरसन कहते हैं कि जैसे ही हम सामान्य रुटीन की तरफ जाएंगे, इंफेक्शन का खतरा बढ़ता जाएगा. बारिश के साथ ये खतरा और बढ़ जाएगा. इसी तरह से भास्कर में एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. संजय राय की बात छपी है. उनके अनुसार कोरोना के बारिश से संबंध पर फिलहाल खास स्टडी नहीं की गई है लेकिन ये मान सकते हैं कि बारिश के दौरान वायरस की सक्रियता में कमी नहीं होगी बल्कि तीव्रता और बढ़ेगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि इस दौरान तापमान और आर्द्रता किसी भी वायरस के फैलने और अधिक देर तक रहने में मददगार होती है.

हालांकि Centers for Disease Control and Prevention (CDC) ने अपनी वेबसाइट पर पानी और कोरोनावायरस के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. न ही WHO की साइट पर अलग से कोरोना और बारिश से जुड़ी कोई स्टडी सामने आई है. वैज्ञानिक मानते हैं कि जिस तरह से वायरस फैल रहा है, इसकी मौसम से जुड़ी संक्रामकता को भी देखने की जरूरत है.

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First published: May 31, 2020, 2:10 PM IST
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