Coronavirus: ट्रंप-पुतिन जैसे 'लोकप्रिय अनुदार' नेताओं वाले देशों में सबसे खराब क्‍यों हैं हालात

कोरोना वायरस के फैलने के मामले में सबसे ख्‍राब हालत उन देशों की है, जहां लोकप्रिय अनुदार नेता शीर्ष पद पर हैं.
कोरोना वायरस के फैलने के मामले में सबसे ख्‍राब हालत उन देशों की है, जहां लोकप्रिय अनुदार नेता शीर्ष पद पर हैं.

कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमितों और मरने वालों की संख्‍या के मामले में अमेरिका (US), ब्रिटेन (Britain), ब्राजील (Brazil) और रूस (Russia) की हालत सबसे ज्‍यादा खराब है. चारों ही देशों के नेता काफी लोकप्रिय और अनुदार (Illiberal Populist) हैं.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) पूरी दुनिया में बर्बादी फैला रहा है. अब तक पूरी दुनिया में 64.74 लाख से ज्‍यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें 3.82 लाख से ज्‍यादा की मौत हो गई है. वहीं, पिछले कुछ दिनों में अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील और रूस में कोरोना पॉजिटिव मामलों में बहुत ज्‍यादा तेजी दर्ज की गई है. इन चारों देशों में एक समानता है. चारों ही देशों में लोकप्रिय अनुदार (Illiberal Populist) पुरुष नेता राष्‍ट्राध्‍यक्ष हैं, जो खुद को एलीट क्‍लास और स्‍थापित व्‍यवस्‍था के खिलाफ बताते हैं. हालांकि, ब्राजील के जे. बोल्‍सोनारो (J. Bolsonaro), अमेरिका के डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump), रूस के व्‍लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और ब्रिटेन के बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) में काफी अंतर भी हैं. हार्वर्ड में प्रोफेसर और 'हाउ डेमोक्रसीज डाय' (How Democracies Die) के सह-लेखक डेनियल जिब्‍लैट ऐसे नेताओं को चरमपंथी लोकप्रिय अनुदार नेता कहते हैं.

'वैज्ञानिकों की राय को खारिज करते हैं ऐसे नेता'
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन चारों देशों में कोरोना वायरस के खराब हालात महज संयोग नहीं है. उनके मुताबिक, लोकप्रिय अनुदार नेता वैज्ञानिकों की राय को खारिज करते हुए कॉन्‍सपिरेसी थ्‍योरीज को प्रचारित करते हैं. जिब्‍लैट के सहयोगी स्‍टीवन लिवत्‍सकी ने कहा कि अमूमन ऐसे नेता हर क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और विशेषज्ञों के खिलाफ रहते हैं. ऐसे नेता दावा करते हैं कि उनके पास विशेषज्ञों से ज्‍यादा कॉमन सेंस है. उनका ये कॉमन सेंस कोविड-19 के मामले में काम नहीं कर सकता है. ब्राजील में बोल्‍सोनारो ने स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री को हटा दिया. यही नहीं, उन्‍होंने राज्‍यों पर लोगों के घर में रहने की पाबंदी खत्‍म करने का लगतार दबाव भी बनाया. वहीं, अमेरिका में ट्रंप दो महीने से लगातार विशेषज्ञों के सुझावों को नजरअंदाज कर रहे हैं. उनको लगता है कि वायरस जादू की तरह अचानक खत्‍म हो जाएगा.

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राजनीतिक विश्‍लेषकों का कहना है कि लोकप्रिय अनुदार नेता वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के सुझावों को खारिज करते हैं.

जॉनसन ने तो हर्ड इम्‍युनिटी की बात तक की


ब्रिटेन में भी हालात बहुत अलग नहीं हैं. ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन की सरकार ने कोरोना वायरस की शुरुआत में लोगों को मिलते-जुलते रहने के लिए प्रोत्‍साहित किया. उन्‍होंने हर्ड इम्‍युनिटी (Herd Immunity) की चर्चा छेड़ दी. रूस में व्‍लादिमीर पुतिन ने सुरक्षा उपायों को लेकर जल्‍दबाजी नहीं करने की सलाह दे डाली. उन्‍होंने फेस मास्‍क (Face Mask) पहनने और हाथ नहीं मिलाने से इनकार कर दिया. वहीं, ईरान (Iran) पहले संक्रमण फैलने के खतरों को अपने नागरिकों से छुपाता रहा, फिर सबकुछ खोलने का फैसला भी जल्‍दी ले लिया. वामदल के पॉपुलिस्‍ट नेता राष्‍ट्रपति आंद्रे एमएल बॉब्‍राडोर ने तो मेक्सिको (Mexico) में 'कोरोना वायरस खतरनाक नहीं है' के पोस्‍टर ही लगवा डाले. विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस को लेकर देरी से उठाए गए कदमों के कारण इन देशों में संक्रमण तेजी से फैला.

संकट की गंभीरता को पहचानने में कर दी चूक
ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ब्‍लावैटनिक स्‍कूल के थॉमस हेल कहते हैं कि कोरोना वायरस के मामले में इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रहे देशों की सरकारों ने संकट की गंभीरता को पहचानने में देरी कर दी. इस कारण संक्रमण फैलने की रफ्तार को काबू में रखने के उपाय भी देरी से ही किए गए. वहीं, अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील और रूस में तो बचाव के उपायों को लेकर घोर लापरवाही नजर आई है. न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, संकट से बचाव के कदम देर से उठाने वाले ज्‍यादातर देशों ने अर्थव्‍यव्‍स्‍था (Economy) को अपने नागरिकों से ज्‍यादा तरजीह दी. अर्थशास्‍त्री और वैज्ञानिकों का कहना है कि अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाने का सबसे अच्‍छा उपाय वायरस के प्रसार को तेजी से थामना ही है. अगर लोग डरे रहेंगे तो सबकुछ खोल देने के बाद भी उपभोक्‍ता नहीं मिलेगा और अर्थव्‍यवस्‍था की हालात खराब होती जाएगी. कोलंबिया यूनिवर्सिटी के महामारी विशेषज्ञ वाफा अल-सैडर का कहना है कि लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य और अर्थव्‍यवस्‍था के बीच फाल्‍स टेंशन है.

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अर्थशास्‍त्री और वैज्ञानिकों का कहना है कि अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाने का सबसे अच्‍छा उपाय वायरस के प्रसार को तेजी से थामना ही है.


लोकप्रिय अनुदार महिला नेता वाले देश बेहतर
कोरोना वायरस से मुकाबले के मामले में इन चारों देशों के उलट लोकप्रिय अनुदार महिला वाले देशों की हालात बहुत अच्‍छी है. जर्मनी (Germany), न्‍यूजीलैंड (New Zealand) और ताइवान (Taiwan) इसके उदाहरण हैं. ऐसे में कहा जा सकता है कि लोकप्रिय नेता और कोरोना वायरस के फैलने के बीच संबंध पूरी तरह सही नहीं है. हंगरी में विक्‍टर ऑर्बन और फिलीपींस में रॉड्रिगो दुतेर्ते भी अनुदार लोकप्रिय नेता ही हैं. इन सभी नेताओं ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए शुरुआत में ही तेज कदम उठाए. हंगरी और फिलीपींस में तो संक्रमितों की संख्‍या भी काफी कम रही है. हालांकि, इन दोनों ही नेताओं ने कोरोना संकट का इस्‍तेमाल अपने विरोधियों को कमजोर करने के लिए भी इस्‍तेमाल कर राजनीतिक फायदा भी उठाया.

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