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भारत में किन लोगों को सबसे आखिर में मिलेगी Coronavirus वैक्सीन?

कोरोना वैक्सीन की उल्टी गिनती शुरू हो रही है - सांकेतिक फोटो (Pixabay)
कोरोना वैक्सीन की उल्टी गिनती शुरू हो रही है - सांकेतिक फोटो (Pixabay)

कोरोना वैक्सीन (corona vaccine) की उल्टी गिनती शुरू हो रही है. केंद्र ने बंटवारे के लिए 4 चरण सुझाए और राज्यों को डाटाबेस बनाने को कहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 9:00 AM IST
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फिलहाल वैक्सीन बनकर आई नहीं है लेकिन देश और दुनियाभर में वैक्सीन ट्रायल अपने आखिरी चरण में हैं. माना जा रहा है कि साल 2021 की शुरुआत तक कोई प्रभावी टीका जरूर आ चुका होगा. हालांकि इतनी बड़ी आबादी का एक साथ टीकाकरण संभव नहीं, इसलिए ये चार या फिर ज्यादा चरणों में भी हो सकता है. इसमें उन लोगों को पहले टीका मिलेगा, जो ज्यादा जोखिम में हैं या हो सकते हैं.

अगले साल की जुलाई तक वैक्सीन के 50 करोड़ डोज तैयार करने और लगभग 25 करोड़ लोगों तक पहुंचाने की योजना है. वैक्सीन के वितरण के लिए नेशनल वैक्सीन ग्रुप तैयार हो चुका है. ये समूह ही पक्का करेगा कि किस आधार पर वितरण शुरू करना है. इसपर पूरी गाइड बनाई जा रही है.

इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए हरियाणा के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में मांग के अनुसार वैक्सीन का स्टॉक कम रहेगा. इस वजह से रिस्क एसेसमेंट के आधार पर पक्का करेंगे कि किन लोगों को वैक्सीन पहले मिलनी चाहिए. इसके बाद ही दूसरे लोगों तक टीका पहुंचेगा.



देश और दुनियाभर में वैक्सीन ट्रायल अपने आखिरी चरण में हैं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट ने यूनियन सेक्रेटरी राजेश भूषण के हवाले से बताया कि कितने लेयर में वैक्सीन दी जानी चाहिए. पहले चरण में हेल्थ वर्कर्स को वैक्सीन दी जाएगी. इस श्रेणी में डॉक्टर, नर्सें और अस्पताल का दूसरा स्टाफ या फिर एएनएम वर्कर्स हैं. रोज मरीजों से मिलने और उनकी देखरेख के कारण इन्हें कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है. अगर ऐसा हुआ तो हेल्थकेयर सुविधा चरमरा जाएगी. इसलिए पहले इन्हें टीका दिया जाएगा.



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दूसरे चरण में सैनिटेशन वर्करों और पुलिसवालों का टीकाकरण होगा. इसमें वे लोग भी आते हैं जो घरों से कूड़ा उठाने का काम करते हैं. इसके बाद तीसरे चरण के तहत 50 से अधिक आयुवर्ग के लोगों को टीका लगाया जाएगा. चौथे चरण में बाकियों का वैक्सिनेशन होगा. केंद्र ने राज्यों सरकारों से अपील की है कि वो लोगों का डाटाबेस बनाकर तैयार रखे ताकि वैक्सिनेशन का रोड मैप तैयार हो सके.

राज्यों को डाटाबेस बनाने को कहा गया है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


केंद्र सरकार की अनुमति से अलग -अलग राज्यों में कोविड वैक्सीन बेनिफिशियरी मैनेजमेंट सिस्टम (CVBMS) तैयार हो रहा है. यूएनडीपी ने वे साइटें चिन्हित कर ली हैं, जहां ये होना है. कुशल एएनएम को वैक्सीन की ट्रेनिंग दी जाएगी. इनके अलावा स्टाफ नर्स और फार्मा के जानकारों को भी जरूरत के मुताबिक लिया जा सकता है.

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वैक्सिनेशन के मामले में देश का रिकॉर्ड काफी बढ़िया रहा है. वो हर साल बीमारियों से बचाव के लिए गर्भवती और नवजातों को कई तरह के टीके देता है. इसके लिए उसके पास डाटाबेस तैयार करने का अनुभव भी है और वैक्सीन को स्टोर करने की क्षमता भी है. बता दें कि वैक्सीन को एक नियत तापमान पर रखा जाता है वरना उसके खराब होने का डर होता है. देश में इसके लिए लगभग 27 हजार कोल्ड स्टोरेज हैं.

coronavirus vaccine
वैक्सिनेशन के मामले में देश का रिकॉर्ड काफी बढ़िया रहा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


हालांकि बड़े स्तर पर चल रही तैयारियों के बाद भी पहली बार अरबों लोगों तक एक साथ वैक्सीन पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होने वाली है. रिस्क एसेसमेंट करते हुए ये भी देखना होगा कि जवान आबादी भी कई खतरनाक बीमारियों से जूझ रही है. तो ऐसे में क्या टीकाकरण के लिए उन्हें इंतजार करना होगा या पहले-दूसरे चरण में ही वैक्सीन मिल सकेगी.

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इधर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी ओर से कोवैक्स गठबंधन तैयार किया है. ये इस तरह से बनाया गया है कि अमीर देश फंडिंग करें और इससे गरीब देशों तक भी वैक्सीन पहुंच सके. इससे कई वैक्सीन निर्माता देश जुड़ चुके हैं और ये तय किया गया है कि साल 2021 के आखिर तक दुनिया के देशों में कम से कम 2 बिलियन डोज पहुंचाए जाएंगे. कोवैक्स का एक और भी मकसद है, कि कोरोना वैक्सीन की जमाखोरी रोकी जा सके ताकि वो तुरंत से तुरंत जरूरतमंदों तक पहुंचे. संगठन से 160 से ज्यादा देश जुड़ चुके हैं लेकिन अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियां अब भी इससे अलग हैं.
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