दुनिया के 10 सबसे बड़े दावेदार, जो मार्केट में ला सकते हैं कोरोना वैक्सीन

दुनिया के 10 सबसे बड़े दावेदार, जो मार्केट में ला सकते हैं कोरोना वैक्सीन
WHO ने कोरोना वैक्सीन पर काम कर रहे 10 प्रमुख दावेदारों की पहचान की है, जिनका ट्रायल सफल हो सकता है.

पूरी दुनिया में कोरोना पॉजिटिव (corona positive) लोगों की संख्या 47 लाख से ऊपर है. इसके साथ ही इस वायरस के टीके (vaccine of coronavirus) की खोज और जोर पकड़ चुकी है. World Health Organisation (WHO) ने कोरोना वैक्सीन पर काम कर रहे 10 प्रमुख दावेदारों (contenders) की पहचान की है, जिनका ट्रायल सफल हो सकता है.

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दिसंबर में सबसे पहले पहचाने नए कोरोना वायरस (coronavirus) की अब तक कोई दवा नहीं मिल सकी है. वहीं ऐसे वैक्सीन की खोज जारी है जो वायरस के खिलाफ हमें इम्यून कर सके. दुनिया के लगभग 40 देशों की फार्मा लैब्स (pharmaceutical labs) इस काम में लगी हुई हैं. कई जगहों पर ह्यूमन ट्रायल (human clinical trial) शुरू हो चुका है. कई देश हड़बड़ाहट में वैक्सीन बना लेने का दावा भी कर रहे हैं, हालांकि अब तक किसी को अप्रूवल नहीं मिल सका है. जानते हैं, ऐसी 10 कंपनियों के बारे में जो टीके पर जोर-शोर से काम कर रही हैं.

अमेरिका की फार्मा कंपनी Moderna Therapeutics इसमें काफी आगे चल रही है. उसका कहना है कि उसे FDA (US Food and Drug Administration) से दूसरे फेज के ट्रायल की इजाजत मिल चुकी है. पहला ट्रायल सिएटल में 45 लोगों पर हुआ था, जो सफल बताया जा रहा है. अब दूसरा ट्रायल 600 लोगों पर होगा.

एक अन्य अमेरिकी कंपनी Novavax भी टीके पर काम कर रही है. इसे हाल ही में 388 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी मिली है. चूहों और बंदरों पर इसके बनाए टीके की जांच सफल रही है. अब ऑस्ट्रेलिया में 130 लोगों पर इसकी वैक्सीन का ट्रायल होगा.



दुनिया के लगभग 40 देशों की फार्मा लैब्स इस काम में लगी हुई हैं




​INOVIO Pharmaceuticals एक और दवा कंपनी है, जो सैन डिएगो के अपने लैब में डीएनए पर काम करने वाला वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रही है. इसका काम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इस लैब ने सिर्फ 83 दिनों में ही वैक्सीन बनाने से लेकर फेज 1 तक पूरा कर लिया.

अमेरिका स्थित फार्मा कंपनी Pfizer ने एक जर्मन कंपनी BNTECH के साथ मिलकर कोरोना की वैक्सीन तैयार कर ली है. ये आरएनए संरचना पर काम कर रहे हैं. जर्मनी में इसका क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो चुका है और उम्मीद की जा रही है कि जुलाई में इसके सारे ही ट्रायल पूरे हो जाएंगे.

बच्चों के लिए उत्पाद बनाने के लिए ख्यात Johnson & Johnson भी इसमें एक बड़ा दावेदार है. ये भी डीएनए जीनोम पर काम कर रहा है और सितंबर 2020 तक इसका ट्रायल शुरू हो जाएगा. कंपनी का ये भी दावा है कि वो 2021 में 1 बिलियन वैक्सीन बना सकेंगे.

​CanSino Biologics भी एक बड़ा नाम है, जिसका नाम WHO ने अपनी लिस्ट में डाला है. ये एक नॉन रेप्लिकेटिंग वायरस वैक्टर पर काम कर रहा है ताकि जल्दी से जल्दी वैक्सीन की जांच हो सके. यहां बता दें कि इस कंपनी ये इबोला के लिए भी वैक्सीन तैयार की थी, जो अप्रूव भी हो चुकी है.

अमेरिका की फार्मा कंपनी Moderna Therapeutics इसमें काफी आगे चल रही है


बीजिंग की एक फार्मा कंपनी Sinovac Biotech चीन का सबसे बड़ा दांव है. एनिमल ट्रायल की सफलता के बाद अब ये फेज 1 ट्रायल में जा चुकी है.

ब्रिटेन की ​University of Oxford भी कोरोना वैक्सीन की दौड़ में शामिल है. इसके वायरोलॉजी सेक्शन ने यूके की फार्मा कंपनी AstraZeneca के साथ मिलकर काम शुरू किया है. पहले स्टेज का ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल अप्रैल में शुरू हो चुका है और उम्मीद की जा रही है कि साल के अंत तक सारे ट्रायल हो चुके होंगे.

फ्रांस की फार्मा कंपनी ​Sanofi vaccine भी कोरोना के टीके पर काम कर रही है. हालांकि अमेरिका से मिली भारी-भरकम फंडिंग के बाद इस कंपनी ने ये कहकर चौंका दिया था जब भी वैक्सीन बने, इसका सबसे पहला हक अमेरिका को होना चाहिए क्योंकि वैक्सीन के लिए उसने फंडिंग की है. बाद में फ्रेंच सरकार की डपट के बाद उसने अपनी बात वापस ले ली. कंपनी का कहना है कि वो 2021 के मध्य तक वैक्सीन बाजार में ला सकती है.

भारत में टीबी में काम आने वाले टीके बीसीजी के साथ ये प्रयोग लगभग 6000 हाई रिस्क लोगों पर होगा


लंदन की सिगरेट कंपनी British American Tobacco (BAT) भी इसपर काम कर रही है. ये तंबाखू के पत्तों की प्रोटीन से वायरस को खत्म करने की कोशिश कर रही है. कंपनी का कहना है कि प्री-क्लिनिकल ट्रायल में उसे अच्छे नतीजे देखने को मिले और अब वो ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल के लिए तैयार है. हालांकि फिलहाल ये U.S. Food and Drug Administration (FDA) की इजाजत के इंतजार में है.

भारत में भी Bharat Biotech International Ltd (BBIL) और Indian Council for Medical Research (ICMR) मिलकर कोरोना का टीका बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. टीबी में काम आने वाले टीके बीसीजी के साथ ये प्रयोग लगभग 6000 हाई रिस्क लोगों पर होगा. इसके अलावा पुणे का सीरम इंस्टीट्यूट भी अगर से यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के साथ खोज कर रहा है.

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