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Cost of Solar Power: हम बनाते हैं चीन से भी सस्ती सोलर बिजली, जानिए कैसे हासिल हुई ये उपलब्धि

Cost of Solar Power: हम बनाते हैं चीन से भी सस्ती सोलर बिजली, जानिए कैसे हासिल हुई ये उपलब्धि

सोलर बिजली उत्पादन की लागत दुनिया में सबसे कम हो गई है.

सोलर बिजली उत्पादन की लागत दुनिया में सबसे कम हो गई है.

Cost Of Solar Power Production In India, solar bijli ki lagat : देश में बीते कुछ दिनों से कोलये की कमी के कारण संभावित बिजली संकट को लेकर हो रहे हंगामे के बीच एक अच्छी खबर भी आई है.

    Cost Of Solar Power Production In India: देश में बीते कुछ दिनों से कोलये की कमी के कारण संभावित बिजली संकट को लेकर हो रहे हंगामे के बीच एक अच्छी खबर भी आई है. दरअसल, जलवायु परिवर्तन की समस्या को देखते हुए कोयला जैसे पारंपरिक ईंधन पर से निर्भरता कम करने की मांग होती रही है. इसी कड़ी में देश में रिन्यूएबल ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है. रिन्यूएबल ऊर्जा में पवन और सोलर बिजली मुख्य भूमिका निभाती है.

    सदियों से यह एक चुनौतीपूर्ण काम था लेकिन बीते कुछ वर्षों में भारत ने इस दिशा में शानदार प्रगति की है. अब एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में छतों पर लगायी जाने वाली सौर ऊर्जा परियोजना की लागत सबसे कम है. इसकी लागत देश में 66 डॉलर प्रति मेगावाट प्रति घंटा है जबकि चीन में यह 68 डॉलर प्रति मेगावाट प्रति घंटा है और वह दूसरे सबसे सस्ता देश है.

    2050 तक जरूरत की आधी बिजली सोलर पैनल से पैदा होगी
    एक वैश्विक अध्ययन में कहा गया है कि कम लागत के कारण घरों और वाणिज्यिक एवं औद्योगिक भवनों में इस्तेमाल किए जाने वाले छत पर लगे सौर पैनल जैसी रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टिक (आरटीएसपीवी) तकनीक, वर्तमान में सबसे तेजी से लगायी जाने वाली ऊर्जा उत्पादन तकनीक है. इस अध्ययन के अनुसार, आरटीएसपीवी से 2050 तक वैश्विक बिजली की मांग का 49 प्रतिशत तक पूरा होने का अनुमान है.

    बीते एक दशक में लागत में आई है भारी गिरावट
    पिछले एक दशक में, नीति केंद्रित पहल के साथ-साथ परियोजना स्थापित करने की लागत में भारी गिरावट से वैश्विक स्तर पर आरटीएसपीवी के इस्तेमाल में काफी तेजी आयी है. 2006 और 2018 के बीच, आरटीएसपीवी की स्थापित क्षमता 2,500 मेगावाट से बढ़कर 2,13,000 मेगावाट पहुंच गयी है.

    यह अध्ययन रिपोर्ट अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और विश्वविद्यालय के पर्यावरण तथा ऊर्जा के लिये वैश्विक केंद्र के निदेशक प्रियदर्शी शुक्ल, लंदन स्थित इम्पीरियल कॉलेज की शिविका मित्तल और कोलंबिया विश्वविद्यालय से जेम्स ग्लिन ने तैयार किया है. टीम का नेतृत्व आयरलैंड स्थित ऊर्जा, पर्यावरण और समुद्र के लिये प्रमुख शोध केंद्र एमएआरईआई के शोधकर्ता सिद्धार्थ जोशी ने किया.

    अध्ययन के अनुसार वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता में छतों पर लगायी जाने वाली सौर परियोजनाओं की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है.

    अमेरिका और इंग्लैंड में चार गुना अधिक है लागत
    रिपोर्ट के मुताबिक छतों पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए जहां भारत और चीन में लागत क्रमश: 66 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा, 68 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा है वहीं अमेरिका तथा ब्रिटेन में यह क्रमश: 238 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा एवं 251 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा है.

    भारत को 5630 गीगावॉट सौर ऊर्जा क्षमता की जरूरत
    एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक भारत को 2070 तक शून्य उत्सर्जन वाला देश बनने के लिए अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 5630 गीगावॉट करनी होगी. ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) की ओर से हाल में जारी रिपोर्ट में कहा गया कि इस समय भारत में 100 गीगावॉट स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता है, जिसमें से सौर क्षमता 40 गीगावॉट है. सरकार ने 2030 तक अपनी कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता को 450 गीगावॉट तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है.

    सीईईडब्ल्यू के अध्ययन में यह भी बताया गया है कि 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य पाने के लिए बिजली उत्पादन के लिए कोयले के उपयोग में कटौती करनी होगी और 2040 से 2060 के बीच इसमें 99 प्रतिशत तक कमी लाने की जरूरत होगी. इसके अलावा कच्चे तेल की खपत में 2050 से 2070 के बीच 90 प्रतिशत तक कमी लाने की जरूरत होगी.

    2030 तक 4,50,000 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन क्षमता
    नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के मुताबिक भारत 2030 तक 4,50,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता हासिल करने के लिए तैयार है. इस महीने की शुरुआत में एमएनआरई ने फिक्की के साथ मिलकर दुबई एक्सपो 2020 में जलवायु एवं जैवविविधता सप्ताह में 6-8 अक्टूबर के बीच कई कार्यक्रमों का आयोजन किया.

    एमएनआरई, फिक्की और एसईसीआई के कार्यक्रम में बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने कहा कि हमारी स्थापित क्षमता का 39 फीसदी हिस्सा पहले ही गैर-जीवाश्म आधारित स्रोतों से आता है. हम 2022 तक 40 फीसदी के लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे. उन्होंने कहा कि भारत ने एक रोमांचक यात्रा शुरू की है और एसईसीआई 2030 तक 4,50,000 मेगावाट की स्थापित क्षमता पूरा करने की दिशा में काम करना जारी रखेगा.

    Tags: Solar power plant, Solar Storm

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