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जानिए 26/11 के बाद से कितनी बदल गयी है भारतीय तटीय सुरक्षा

(26/11 के आंतकी हमले (Terrorists attack) के बाद भारतीय तटों की सुरक्षा Maritime security) व्यवस्था में बहुत बदलाव आया  है.  (फोटो साभारः ट्विटर/@IndiaCoastGuard)
(26/11 के आंतकी हमले (Terrorists attack) के बाद भारतीय तटों की सुरक्षा Maritime security) व्यवस्था में बहुत बदलाव आया है. (फोटो साभारः ट्विटर/@IndiaCoastGuard)

12 साल पहले 26 नवंबर को मुम्बई (Mumbai) में आतंकियों (Terrorists) ने समुद्र के रास्ते घुसकर हमला किया था इसके बाद से समुद्रतटीय सुरक्षा (Maritime Security) में बहुत से बदलाव आ गए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 28, 2020, 3:38 PM IST
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भारत (India) में 26/11 की सालगिरह पर उस घटना में हुए शहीदों को याद किया गया.  12 साल पहले हुए इस हमले में आतंकी (Terrorists) समुद्र (Sea) के रास्ते मुंबई में घुसे थे.  उस समय तटीय सुरक्षा (Maritime Security) में हुई सेंध की वजह से संबंधित सुरक्षा निकायों पर भी सवाल उठे थे. लेकिन तब से लेकर अब तक तटीय सुरक्षा में लगी भारतीय नौसैना (Navy), कोस्ट गार्ड (Coast Guard) और मरीन पुलिस (Marine Police) में काफी बदलाव आ गया है.

क्या हुआ था 26/11 को
साल 2008 में 26 नवंबर की तारीख लश्करे तौयबा के दस आतंकी मुंबई में समुद्र के रास्ते से घुसे. एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि उस समय तटीय सुरक्षा में बहुत सारी खामियां उजागर हुईं थी. इन खामियों को दूर करने और तटीय सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा बनाई गई थी.

त्रिस्तरीय व्यवस्था
इस मौके पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि आज भारतीय नौसेना, कोस्टगार्ड मरीन पुलिस तीनों से पूरे देश के तटीय इलाकों में एक ऐसी त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है जिससे कोई भी संदिग्ध गतिविधि बच नहीं सकती है.



खास विश्लेषण केंद्र की स्थापना
यह त्रिस्तरीय सुरक्षा एकीकृत इकाई के तौर पर काम कर सके उसके लिए भारत सरकार ने साल 2014 में इन्फोर्मेशन मैनेजमेंट एंड एनालिसेस सेंटर (IMAC) का गठन किया. इसका काम यह सुनिश्चित करना है कि 26/11 के हमले जैसी घटना दोबारा न हो सके. इसका मुख्यालय गुड़गांव में बनाया गया है. यह समुद्रतटीय सुरक्षा की जानकारी को जमा करने और अलग-अगल जगहों तक पहुंचाने के लिए नोडल सेंटर की तरह काम करता है.

Mumbai terror attack
26/11 के आंतकी हमले (Terrorists attack) के लिए आतंकवादी समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसे थे.(तस्वीर: सोशल मीडिया)


संयोजन है प्रमुख काम
IMAC का संचालन नेवी और कोस्ट गार्ड मिलकर करते हैं और यह नेशनल कमांड कंट्रोल कम्यूनिकेशन एंड इंटेलिजेंसन वेटवर्क के लिए समुद्रवर्ती यातायात पर निगरानी रखने का काम करता है. IMAC का काम समुद्रवर्ती सुरक्षा की जानाकरी का विभिन्न राष्ट्रीय सुरक्षा ईकाइयों के बीच आदान प्रदान करना है और एकीकृत एवं संयुक्त सुरक्षा स्थिति का निर्माण करना है.

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यह खास जिम्मेदारी
सुमद्र के रास्ते देश में आने वाले किसी भी जहाज की निगरानी का काम IMAC के जिम्मे है. जब भी कोई जहाज भारतीय महासागरीय इलाके से गुजरता है तो इसके हेडक्वार्टर में ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम में उसकी जानकारी जाती है और निगरानीकर्ता उस जहाज का रास्ता , गंतव्य, उसके मालिक और देश की जानकारी हासिल कर सकता है.

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26 नवंबर 2008 को मुंबई आतंकी हमले में करीब 166 लोग मारे गए थे.


कई संस्थाओं से जानकारी का आदान प्रदान
IMAC का प्रमुख कार्य विभिन्न स्रोतों से जानकारी हासिल करना ही नहीं है. बल्कि जानकारी का सही विश्लेषण कर उसे सटीक आकार देकर विभिन्न संस्थाओं और संगठनों को जानकारी देना भी है. इसके लिए नेवी और कोर्टगार्ड के देशभर में 51 केंद्र, नेशनल ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन  सिस्टम के 87 स्टेशन, कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से इसका सतत संपर्क बना रहता है.

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मुंबई पर हुआ 26/11 के हमले में आंतकियों का समुद्र के रास्ते मुंबई तक आ जाना एक बहुत बड़ी सुरक्षा खामी साबित हुई थी. आमतौर पर समुद्रतटीय सुरक्षा की प्रमुख जिम्मेदारी भारतीयनौ सेना रहती है जबकि कोस्टगार्ड और मरीन पुलिस जैसी संस्थाएं नौसेना की मददकरती है. लेकिन 26/11 के बाद कोस्टगार्ड को तटीय सुरक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई, इसके साथ ही नेवी, मरीन पुलिस, कोस्टगार्ड कस्टम सहित सभी संस्थाओं को निगरानी बढ़ाने  की जिम्मेदारी भी दी गई.
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