जानें कोरोना की पहली देसी वैक्सीन के बारे में सब कुछ, जिसका होने जा रहा है ट्रायल

जानें कोरोना की पहली देसी वैक्सीन के बारे में सब कुछ, जिसका होने जा रहा है ट्रायल
कोरोना वायरस की पहली देशी वैक्सीन तैयार हो चुकी है (Photo-pixabay)

कोरोना वायरस की पहली देशी वैक्सीन (coronavirus vaccine) ट्रायल के लिए तैयार हो चुकी है. कोवैक्सीन (covaxin) नाम का ये टीका इनएक्टिवेटेड वायरस वैक्सीन है, यानी इसमें नष्ट किया जा चुका वायरस है. 

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कोविड-19 का ग्लोबल आंकड़ा 1 करोड़ से ऊपर जा चुका है. भारत भी साढ़े पांच लाख से ज्यादा मरीजों के साथ चौथे नंबर पर खड़ा है. इस बीच एक अच्छी खबर आई है. देश में कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन बन गई है और इसका ह्यूमन ट्रायल शुरू होने जा रहा है. हैदराबाद की भारत बायोटेक फार्मा कंपनी ने ये वैक्सीन तैयार की है. क्लिनिकल ट्रायल में सफलता के बाद 29 जून को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने कंपनी को टीके के ह्यूमन ट्रायल की इजाजत दे दी. जानिए इस दवा के बारे में सब कुछ.

हैदराबाद की भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के साथ मिलकर ये टीका तैयार किया है. ये वैक्सीन का इनएक्टिवेटेड रूप है. यानी इसे तैयार करने में मृत वायरस का इस्तेमाल हुआ है. ये शरीर में जाते ही काम करने लगेगा और जब असल में वायरस का हमला होगा तो शरीर में एंटीबॉडीज मौजूद रहेंगी जो संक्रमण से बचाएंगी. वैसे फिलहाल वैज्ञानिक इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि वैक्सीन से संक्रमण रोका जा सकेगा. सभी तरह की नई वैक्सीन के लिए टॉप वैज्ञानिकों का कहना है कि इनकी काफी सारी लिमिटेशन्स होती हैं. वक्त के साथ नई वैक्सीन आने पर वो ज्यादा कारगर रहती है.





नई वैक्सीन के लिए टॉप वैज्ञानिकों का कहना है कि इनकी काफी सारी लिमिटेशन्स होती हैं (Photo-pixabay)




भारत बायोटेक कंपनी ने चरणबद्ध होकर वैक्सीन पर काम शुरू किया. इसके लिए सबसे पहले कोरोना वायरस से जुड़े SARS-CoV-2 स्ट्रेन को पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में अलग किया गया और ये स्ट्रेन हैदराबाद की लैब भेजा गया. यहां पर वायरस के स्ट्रेन से इनएक्टिवेटिड वैक्सीन बनाने का काम हुआ. टीके पर काम कर रहे वैज्ञानिकों को किसी तरह का खतरा न हो, इसके लिए कई सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए गए. हैदराबाद की जिनोम वैली के बायोसेफ्टी लेवल- 3 लैब में इसे तैयार किया गया जो अपने-आप में काफी सुरक्षित लैब है.

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वैक्सीन को कोवैक्सीन नाम दिया गया. लैब स्तर पर इसकी सफलता के बाद वैक्सीन की प्री-क्लिनिकल स्टडीज की रिपोर्ट दी गई. इसके बाद कंपनी को ह्यूमन ट्रायल के लिए मंजूरी मिल गई. कंपनी का कहना है कि ट्रायल का काम जुलाई के पहले हफ्ते से ही शुरू कर दिया जाएगा. वैसे बता दें कि भारत बायोटेक, जिसने ये वैक्सीन तैयार की है, उसे टीके तैयार करने का खासा अनुभव रहा है. इससे उसने रेबीज, पोलियो, चिकनगुनिया, जीका वायरस और जापानी इन्सेफेलाइटिस के लिए भी वैक्सीन तैयार की है.

इसे तैयार करने में मृत वायरस का इस्तेमाल हुआ है (Photo-pixabay)


वैसे वैक्सीन ट्रायल के बीच देशी फार्मा कंपनियों ( homegrown pharmaceutical companies) ने दो दवाओं के तीन जेनेरिक वर्जन निकालने के लिए सरकारी मंजूरी ले ली है. ये एक अच्छा संकेत माना जा रहा है. रेमडेसिवीर (remdesivir) और फेविपिराविर (favipiravir) दवाओं के उत्पादन के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने हां कह दी है. एंटीवायरल ड्रग फेविपिराविर को मुंबई की ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स (Glenmark Pharmaceuticals) ने तैयार किया है. दवा को FabiFlu ब्रांड नाम दिया गया है जो गोली के फॉर्म में दी जाएगी. फैबिफ्लू को कोरोना के हल्के और औसत लक्षण वाले मरीजों पर ही इस्तेमाल किया जाएगा. गंभीर मरीज इसके दायरे से बाहर रहेंगे. साथ ही ये भी तय हुआ है कि अगर मरीज इस दवा से इलाज के लिए मंजूरी दे, तभी उसका इलाज होगा.

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इसी तरह से एक दवा कंपनी हेटेरो कोरोना वायरस के लिए कोविफोर दवा लॉन्च करने वाली है. ये दवा रेमडेसिवीर का जेनेरिक वर्जन है. ये वही दवा है जो साल 2014 में इबोला के इलाज के लिए बनाई गई थी. कोविफोर गोली की बजाए इंट्रावेनस तरीके से काम करती है यानी ये नसों से दी जाएगी.

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तीसरी दवा सिप्रमी है, जो रेमडेसिवीर का ही जेनेरिक अवतार होगा. दवा कंपनी सिप्ला इस पर काम कर रही है. फिलहाल इसकी कीमत के बारे में कंपनी ने कोई भी खुलासा नहीं किया है. चूंकि ये दवाएं कोरोना वायरस का पक्का इलाज नहीं हैं इसलिए इनके इस्तेमाल को खास तरीके से और कुछ ही मामलों में किया जाएगा.
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