आसान तरीके से समझें क्या होती है एंटीबॉडी, क्या होता है इसके कम-ज्यादा होने से

एंटीबॉडी (Anitboides) हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का सबसे अहम हिस्सा होती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

एंटीबॉडी (Anitboides) हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का सबसे अहम हिस्सा होती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

एंटीबॉडी (Antibodies) का कोविड-19 (Covid-19) सहित किसी भी रोगाणु वाली बीमारी से लड़ने में प्रमुख कार्य होता है. इसके कम ज्यादा होना प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है.

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कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर के कमजोर होने के संकेत मिलने लगे हैं. हाल ही में कोविड-19 संबंधी एक अध्ययन में पाया गया कि इस बीमारी से निपटने के महीनों बाद भी लोगों में प्रतिरक्षा कोशिकाएं (Immune Cells) कायम रहती हैं जो कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी (Anitibodies) बनाती रहती हैं. वहीं एंटीबॉडी (या एंटीजन) टेस्ट पर वह विश्वसनीयता नहीं है जो आरटीपीसीआर टेस्ट पर है. ऐसे में लोग यह जानना चाहते हैं कि ये एंटीबॉडी होती क्या हैं और इनके कम ज्यादा होने से क्या और कितना फर्क पड़ता है.

प्रतिरक्षा का अहम हिस्सा

हमारे शरीर में बीमारियों से लड़ने के लिए एक खास तरह की प्रतिरक्षा प्रणाली होती है जिसे इम्यून सिस्टम कहते हैं. एंटीबॉडी इसी सिस्टम का एक बहुत अहम हिस्सा होती हैं. लाइव साइंस के अनुसार ये खास तरह के वाय अक्षर के आकार के प्रोटीन होते है जो हमारे शरीर की कोशिकाओं पर हमला करने वालों से जुड़ जाती है. इन हमला करने वालों में वायरस बैक्टीरिया, फफूंद, परजीवी जैसे सभी सूक्ष्मजीव शामिल होते हैं और इनके बाहरी होने के पहचान के हिस्सों को एंटीजन कहा जाता है जिन पर एंटीबॉडी की खास निगाह होती है.

होती हैं एंटीबॉडी
एंटीबॉडी हमारे प्रतरिक्षा प्रणाली में एक तरह की खोजी सैन्यदल का काम करती हैं और हमलावर तत्वों के एंटीजन को खोज कर उनकी पहचान करने का काम करती हैं जिससे उन्हें नष्ट किया जा सके. वे कोशिकाओं से निकल शरीर के दूसरे हिस्सों में इनका ‘शिकार’ करने का काम करती हैं. अपने लक्ष्य की पहचान करने के बाद ये उससे जुड़ जाती हैं जिससे हमलावर रोगाणुओं को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.

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एंटीबॉडी (Anitboides) का काम संक्रमण वाले रोगाणुओं की खोज कर उनकी पहचान करना होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पांच तरह की एंटीबॉडी



एंटीबॉडी एक तरह के अनुकूलक प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा होती हैं जो यह सीखती हैं कि किसी खास तरह के रोगाणु की पहचान कैसे करनी है और उसे खत्म कैसे करना है. इन्हें इम्यूनोग्लोबिन्स भी कहते हैं और Ig के रूप में प्रदर्शित की जाती हैं.  इनके पांच प्रकार होते हैं जिन्हें IgG, IgM, IgA, IgD, और IgE कहा जाता है. इनमें से IgG और IgM शरीर के खून में रहती हैं और दूसरे अंगों तक पहुंचती हैं. एंटीबॉडी हमारे शरीर में खास सफेद रक्त कोशिका से जुड़ी होती है जिसे बी टाइप कोशिका कहते हैं.

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कैसे बनती है एंटीबॉडी

एंटीबॉडी का निर्माण प्रतिरक्षा प्रणाली की मोमोरी सेल्स करती हैं ये मेमोरी सेल्स एंटीजन की पहचान को याद भी रखती हैं. सक्रिय होने पर ये एटीबॉडी का उत्पादन बढ़ाती हैं संक्रमण पता लगने के बाद ये कोशिकाएं एंटीबॉडी बनाने लगती है. बीमारी के दौरान एंटीबॉडी तो बढ़ती हैं. वैक्सीन भी किसी खास रोगाणु के लिए एंटीबॉडी बनाने का काम तेजी से करती है.

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एंटीबॉडी (Anitboides) का आकार अंग्रेजी अक्षर वाय के जैसे होता है जिससे वे खुद को रोगाणु से बांध पाती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

क्या होता है संख्या बढ़ने और कम होने से

एंटीबॉडी का रोगाणुओं से लड़ने के लिए बढ़ना एक सामान्य और अच्छी क्रिया है. जब हम कहते हैं कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत है तो इसका मतलब यही है कि हमारे यह तंत्र पर्याप्त संख्या में एंटीबॉडी की पहचान करने और उनसे मुकाबला करने में सक्षम है. एंटीबॉडी का कम होना मरीज के स्वास्थ्य में सुधार का भी संकेत होता है यानि अब शरीर को एंटीबॉडी की जरूरत नहीं होती है.

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एंटीबॉडी दूसरे शरीर में

कई बार कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को दूसरे लोगों के शरीर से प्लाज्मा दिया जाता है जहां एंटीबॉडी का निर्माण होता है. इससे मरीज के शरीर में ज्यादा एंटीबॉडी हो जाती है और उसका शरीर रोगों से बेहतर तरीके लड़ सकता है. लेकिन हमेशा कारगर नहीं होता है और इसकी हमेशा जरूरत भी नहीं होती है.

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