क्या सामान्य जुकाम कोविड-19 से सुरक्षा देने में हो सकता है मददगार?

शोधकर्ताओं ने पाया है कि समान्य जुकाम (common cold) में प्रतिरोध करने वाली कोशिकाएं कोरोना वायरस (Corona virus)  की भी पहचान कर सकती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
शोधकर्ताओं ने पाया है कि समान्य जुकाम (common cold) में प्रतिरोध करने वाली कोशिकाएं कोरोना वायरस (Corona virus) की भी पहचान कर सकती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

जुकाम (Common cold) में प्रतिरोध का काम करने वाली मेमोरी बी कोशिकाएं (Memory B cells) कोविड-19 (Covid-19) मामले में भी सक्रिय पाई गई हैं जिसके कई अहम निष्कर्ष निकल कर आ रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 4:03 PM IST
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कोविड-19 (Covid-19) की वैक्सीन और दवा का दुनिया भर के लोगों को बेसब्री से इंतजार है. यह बीमारी रुक नहीं रही है और भारत (India) में भी इसके मरीजों की संख्या हजारों में बढ़ रही है. इस बीमारी और कोरोना वायरस (Corona virus) से निपटने के लिए कई तरह के शोध चल रहे हैं. ऐसा ही एक शोध सर्दी –जुकाम (Common Cold) पर भी हुआ है. मौसमी जुकाम का इंफेक्शन (Infection) बात करने में भले ही हल्का फुल्का मामला लगता है. हाल में हुए शोध ने सुझाव दिया है कि हमें अब तक हुए सर्दी- जुकाम की वजह से कोविड-19 से सुरक्षा मिल सकती है.

मेमोरी बी कोशिकाएं
यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर मेडिकल सेंटर के संक्रमण बीमारी के विशेषज्ञ के अध्ययन ने भी यही सलाह दी है कि कोविड-19 के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता लंबे समय तक चल सकती है और हो सकता है कि यह जीवन भर चले. हाल ही में एमबायो में प्रकाशित इस अध्ययन ने पहली बार दर्शाया है कि कोरोना वायरस मेमोरी बी कोशिकाओं को पैदा करने के लिए प्रेरित करता है.

क्या होती हैं ये कोशिकाएं
मेमोरी बी कोशिकाएं लंबे समय तक चलने वाली प्रतिरोधक कोशिकाएं होती हैं जो रोगाणुओं की पहचान करती हैं, उन्हें खत्म करने के लिए एंटीबॉडी का निर्माण करती हैं और फिर उन्हें भविष्य के लिए याद भी रखती हैं. इसके बाद भविष्य में जब ये रोगाण फिर से शरीर में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं, तो ये मेमोरी बी कोशिकाएं फिर सक्रिय हो जाती हैं और इस बार तेजी से संक्रमण शुरू होने से पहले ही उन्हें खत्म कर देती हैं.



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कोरोना वायरस (Corona virus) संक्रमण में भी पहले जुकाम (common cold) जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन बाद में यह गंभीर समस्या देता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कोविड संक्रमण से लड़ने में भूमिका
चूंकि मेमोरी बी कोशिकाएं दशकों तक जिंदा रह सकती हैं, वे कोविड-19 बीमारी से संक्रमित होकर बचने वाले लोगों को आगे के संक्रमणों से लंबे समय तक बचा सकती हैं. लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में और शोध की जरूरत है.

कोरोना की पहचान कर सकती हैं ये कोशिकाएं
इस शोध ने मेमोरी बी कोशिकाओं की क्रॉस रिएक्टिविटी रिपोर्ट सबसे पहले दी है. जिसके मुताबिक एक बार सर्दी जुकाम से पीड़ित होने के बाद बी कोशिकाएं सार्सकोव-2 की पहचान करने में सक्षम हो जाती हैं. शोधकर्ताओं का विश्वास है कि इसका मतलब यह हुआ कि कोई भी व्यक्ति जो समान्य वायरस से संक्रमित रहा हो, जैसा की सभी के हो चुका है, उसके पास पहले से ही कोविड-19 के खिलाफ कुछ हद तक प्रतिरोधक क्षमता होनी चाहिए.

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कैसे पता लगा इसके बारे में
URMC में माइक्रोबायोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी के रिसर्च प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक मार्क सैंग्स्टर ने बताया, “जब हमने उन लोगों के खून के नमूनों की जांच की जो कोविड-19 से ठीक हो रहे थे, ऐसा लगा कि उनमें से बहुत से लोगों में पहले ही मेमोरी बी कोशिकाओं का पूल मौजूद था जो सार्स कोव-2 की पहचान कर सकता था और तेजी से एंटीबॉडी बना सकता था जो वायरस पर हमला कर सकें.“

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कोरोना वायरस (Corona virus) के हल्के और मध्यम मामलों में भी मेमोरी बी कोशिकाएं (memory B cells) सक्रिय कार्य करते दिखाई दीं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


ऐसे किया अध्ययन
शोधकर्तओं ने 26 ऐसे लोगों के खून के नमूनों लिए जिनमें हल्के और मध्यम स्तर का कोविड-19 संक्रमण था और उसकी तुलना 21 ऐसे स्वस्थ लोगों के नमूनों से की जिन्होंने 6 से दस साल पहले अपना खून दान दिया था. इन नमूनों में शोधकर्ताओं ने मेमोरी बी कोशिकाओं और स्पाइक प्रोटीन पर हमला करने वाली एंटीबॉडी के स्तरों का मापन किया. ये स्पाइक प्रोटीन ही वायरस को शरीर में बने रहने में मददगार साबित होती रही हैं.

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इस शोध में उपयोग लाई गई लैब को चलाने वाले डेविड टोफैम ने बताया, “अब हमें यह देखना होगा कि क्या पहले से मौजूद मेमोरी बी कोशिकाओं का समूह हल्के लक्षण और छोटी बीमारियों से कोई संबंध है या फिर क्या यह कोविड-19 वैक्सीन की कारगरता बढ़ाने में सहायक हो सकेगी.”
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