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कोविड-19 ने अरबपतियों को बनाया है और भी अमीर

कोविड-19 ने अरबपतियों को बनाया है और भी अमीर

कोरोना काल में पिछले साल अमीर (Riches) बहुत ज्यादा तेजी से और अधिक अमीर हुए हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कोरोना काल में पिछले साल अमीर (Riches) बहुत ज्यादा तेजी से और अधिक अमीर हुए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कोरोना महामारी (Corona Pandemic) ने भले ही दुनिया में करोड़ों लोगों का आर्थिक स्थिति बदतर कर दी हो. लेकिन अमीर और अमीर होते गए हैं. वर्ल्ड इन्इक्वेलिटी रिपोर्ट (World Inequality Report) में पता चला है कि दुनिया के शीर्ष 0.01 प्रतिशत अमीरों के समूह, जिसमें करीब 520,000 लोग हैं, की वैश्विक संपत्ति (Global Wealth) में इस साल 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ है जो पिछले साल के तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा है. यह जानकारी कई लोगों के लिए हैरान करने वाली है.

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    पिछले दो सालों में कोविड-19 (Covid-19) महामारी ने दुनिया अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया है. लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार हो गए,  लाखों का व्यवसाय चौपट हो गया और हर शहर में कई फैक्ट्रियां, कंपनियां बंद होने की खबरें भी आती रहीं. अर्थव्यवस्था पिछले एक दो महीने से पटरी पर लौट ही रही थी कि पिछले महीने के आखिर ने कोविड-19 के ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) ने ऐसी दस्तक दी की एक फिर दुनिया हिलती दिखाई दे रही है. इसी बीच एक अध्ययन ने खुलासा किया है इन सब बातों से दुनिया के तमाम अरबपतियों की आय को ना केवल कुछ फर्क नहीं पड़ा है, बल्कि उनकी आय में और ज्यादा इजाफा होता रहा है.

    विशेष रिपोर्ट का नतीजा
    इस अध्ययन के मुताबिक वर्ल्ड इन्इक्वेलिटी रिपोर्ट (World Inequality Report) की नई रिपोर्ट  के मुताबिक कोविड काल के दौरान अमीर और भी अमीर हुए हैं और दुनिया में नए करोड़पति भी पैदा हुए हैं. यह रिपोर्ट सामाजिक वैज्ञानिकों के एक नेटवर्क ने मिलकर तैयार की है जिसने अरबपतियों की आय और सम्पत्तियों के  बारे में यह आंकलन किया गया है.

    गरीबों और अमीरों के बीच की खाई
    इस आंकलन के अनुसार इस साल अरबपतियों का वैश्विक घरेलू सम्पत्ति की 3.5 प्रतिशत पर कब्जा रहा है. जबकि यह साल 2020 के शुरुआत में 2 प्रतिशत से केवल जरा सा ही अलग था. इस बारे में प्रमुख लेखक ल्यूकस चांसेल ने बताया कि कोविड संकट ने बहुत अधिक अमीरों और बाकी जनसंख्या के बीच की असमानता की खाई को और गहरा कर दिया है.

    कई शोधों और सार्वजिनिक आंकड़ों पर आधारित
    इस रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि धनी अर्थव्यवस्थाओं ने बाकी जगहों पर तेजी से बढ़ती गरीबी को कम करने के विशाल वित्तीय समर्थन का उपयोग किया. इस रिपोर्ट को बहुत से विशेषज्ञ शोधों और सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है. इसकी प्रस्तावना अमेरिकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी और इस्थर डुफ्लो ने लिखा है जो 2019 में गरीबी पर किए काम पर नोबेल पुरस्कार जीतने वाले तीन विजेताओं में से थे.

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    अध्ययन से पता चला है कि इस साल अमीर (Riches) पिछले साल की तुलना में डेढ़ गुना अमीर हुए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    अलग अलग असमानताओं का जिक्र
    दोनों अर्थशास्त्रियों ने लिखा कि यूं कि सम्पत्ति भविष्य के आर्थिक लाभों और शक्ति एवं प्रभाव का बड़ा स्रोत है और यह पूर्व जानकारी असमानता को और बढ़ाती है. उन्होंने “अति अमीर वाले बहुत ही छोटे अल्पसंख्यों के हाथों में आर्थिक शक्ति के असीम केंद्रीकरण” की चर्चा की. इस पड़ताल में कई तरह के वर्तमान अध्ययनों को शामिल किया गया जिसमें अमीरों की सूची और महामारी के दौरान स्वास्थ्य, सामाजिक, लैंगिक और नस्लीय असमानताएं बढ़ने के दूसरे प्रमाण शामिल हैं.

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    एक साल में आधी से ज्यादा बढ़ी संपत्ति
    फोर्ब्स की इस साल की सालाना अरबपतियों की सूची में रिकॉर्ड तोड़ 2755 अरबपति शामिल हैं जिसमें उनका कुल मोल 13.1 ट्रिलियन डॉलर है जो पिछले साल के 8 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ा है. अब नई रिपोर्ट में बताया गया है कि 5.2 लाख व्यस्कों के बड़ा समूह, जो शीर्ष अमीरों के 0.01 प्रतिशत बनाता है.

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    दुनिया में कमजोर कल्याण क्षेत्र वाले देशों में गरीबी (Poverty) और ज्यादा बढ़ी है. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    क्यों बढ़ी संपत्ति
    रिपोर्ट में बताया गया है कि शीर्ष 0.001 प्रतिशत की श्रेणी का मतलब यह है कि इनके पास घरेलू संपदा 19 मिलियन डॉलर है जिसमें सभी मुद्राओं में क्रय शक्ति समता को समाहित किया गया है. विश्लेषकों का कहना है कि कुछ अति संपन्न  को दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन पर कारोबार ले जाने का फायदा मिला है. वहीं दूसरों को केवल इस बात से फायदा मिला कि वित्तीय बाजार बहुत तेजी से वैश्विक सुधार करता दिखा.

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    वहीं अध्ययन ने यह भी पाया कि जहां कमजोर कल्याण क्षेत्र वाले देशों में गरीबी बढ़ी, अमेरिका और यूरोप में विशाल सरकार समर्थन से कम आयवालों की पर इसका असर कम होता भी दिखाई दिया. यानी अमीर गरीब का अंतर अमीर देशों में नहीं बढ़ा. चांसल का कहना है कि गरीबी के खिलाफ लड़ाई में यह सामाजिक राज्यों के महत्व को दर्शाता है.

    Tags: COVID 19, Economy, Research, Science

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