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Lock Down के कारण धरती नहीं कांप रही कम, जानिए असल में क्या हुआ है असर

Vikas Sharma | News18Hindi
Updated: April 7, 2020, 7:56 PM IST
Lock Down के कारण धरती नहीं कांप रही कम, जानिए असल में क्या हुआ है असर
सांकेतिक तस्वीर

लॉकडाउन (Lock down) के कारण दुनिया भर के सीज्मोमीटर (Seismometer) की रीडिंग में गिरावट आने लगी है. इसको लेकर कई लोगों ने यह मान लिया कि धरती की सतह पर भूकंपीय कंपन (Seismic Vibrations) कम हो गए हैं. यानी धरती कम कांपने लगी है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona virus) का प्रकोप दुनिया भर में कायम है. संक्रमित लोगों की संख्या अब भी बढ़ रही है, लेकिन इसकी दर में कमी आने लगी है. इसके प्रसार को रोकने के लिए दुनिया भर अब भी ज्यादातर जगहों पर लॉकडाउन (Lock down) की स्थिति बरकरार है. पहले बताया जा रहा था कि लॉकडाउन (Lock down) के कारण पृथ्वी की भूकंपीय गतिविधियों (Seismic Activity) में खासी कमी आई है, लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा तो नहीं हुआ, लेकिन लॉकडाउन से एक फायदा जरूर हुआ है.

क्या पाया था वैज्ञानिकों ने
दरअसल लॉकडाउन होने के कारण वैज्ञानिकों ने यह पाया था कि जो धरती के नीचे भूकंपीय गतिविधियों को वे मापते थे उसमें कमी आई है. लॉकडाउन के कारण मानवीय औद्योगिक गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं. धरती पर रेल जैसे बड़े परिवहन भी बंद हैं. इससे होने वाले कंपन पृथ्वी के अंदर होने वाली भूंकपीय गतिविधियों को मापने में बाधा डालते थे.

क्या कहा जा रहा था पहले



वैज्ञानिकों ने पाया कि जो भूकंपीय गतिविधियां नाप रहे हैं लॉकडाउन के बाद से उसकी मात्रा में कमी दिख रही है. कई लोगों ने इससे यह निष्कर्ष निकाला कि लॉकडाउन के कारण धरती के अंदर भूकंपीय कंपन (Seismic vibration) कम हो गए हैं. इसका यहां तक निष्कर्ष निकाला गया कि पृथ्वी की ऊपरी सतह (Earth Crust) कम कंपन पैदा करने लगी है.



Lock Down
भारत में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन की अवधि 14 अप्रैल को खत्म होने वाली है. (फाइल)


तो फिर क्या है सच
दरअसल जब भी वैज्ञानिक इससे पहले भूकंपीय गतिविधियां (Seismic Activity) नापते थे उन्हें अपने यंत्रों की रीडिंग (Value) में मानवीय गतिविधियों के कारण पैदा हुए भूंकपीय प्रभाव दिखते थे. इस प्रभाव को सीजमिक नॉइज  (Seismic noise) कहा जाता है. लॉकडाउन के कारण उसका प्रभाव अब बहुत ही कम हो गया. वैज्ञानिकों का मानना है कि अब उनके यंत्रों के भूकंपीय मान (Seismic Reading) ज्यादा स्पष्ट आ रहे हैं और वे पूरी तरह से भूकंपीय गतिविधियों को ही परिलक्षित कर रहे हैं. इसका मतलब इतना है कि अब वैज्ञानिकों के यंत्र भूकंपीय गतिविधियों को साफ सुन/समझ पा रहे हैं.

विशेषज्ञ खारिज कर रहे हैं यह गलत धारणा
हाल ही में इकोनॉमिक टाइम्स के लेख के अनुसार, कोलकाता के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजूकेशन और रिसर्च के भूकंप विशेषज्ञ प्रोफेसर सुप्रियो मित्रा ने भी माना है कि लॉकडाउन से भूकंपीय गतिविधि को मापने में व्यवधान डालने वाले मानवीय कंपन बंद हुए हैं. उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि इससे धरती की सतह धीमी गति से हिलने लगी है या धीमी कांप रही है. इस तरह की रिपोर्ट मीडिया में चल रही हैं.

क्या है सीजमिक नॉइज
सीजमिक नॉइज जिसे भूकंपीय शोर कहा जा सकता है. उन सभी कंपन से मिल कर बनता है जो धरातल पर होने वाली गतिविधियों से पैदा होते हैं और सीज्मोमीटर (भूकंपमापी यंत्र) में अवांछनीय संकेतों के तौर पर दर्ज हो जाते हैं. लॉकडाउन की वजह से इन्हीं में भारी कमी आई है.

Earth Quake
सीज्मोमीटर धरती में होने वाले कंपन के साथ मानवीय गतिविधियों के कंपन को भी पढ़ लेता है.


बेल्जियम में भी महसूस की गई ये गिरावट
बेल्जियम में यह गिरावट 30 प्रतिशत तक आंकी गई है. ब्रुसेल्स के रॉयल ऑबजर्वेटरी के सीज्मोलॉजिस्ट मानते हैं कि इस तरह की गिरावट वहां क्रिसमस के समय देखने को मिलती है जब छुट्टी के दिन चल रहे होते हैं.

तो केवल यह बदलाव आया है
प्रोफेसर मित्रा का  कहना है कि  जब यह नॉइज ज्यादा होती तो भूकंप जैसी गतिविधियों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है. अब यह नॉइज कम होने से छोटे भूकंप भी पकड़ में आ सकते हैं.  इसीलिए भूकंप मापी यंत्रों को मानवीय गतिविधियों, समुद्री लहरों आदि से दूर रखा जाता है. धरती के कंपन की बात करें तो कुछ बढ़ा-घटा नहीं हैं, बस कुछ जगहों पर ये बेहतर पकड़ में आ रहे हैं.

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फिलहाल दुनिया में 13 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, 76 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और ठीक हुए लोगों का आंकड़ा तीन लाख के करीब पहुंच गया है.

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First published: April 7, 2020, 7:29 PM IST
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