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99 साल पहले ईजाद हुए स्वाब की कहानी जो कोविड में आ रहा बहुत काम

99 साल पहले ईजाद हुए स्वाब की कहानी जो कोविड में आ रहा बहुत काम

कोविड 19 की जांच में उपयोग में लाए जाने वाले स्वाब (Swab) का आविष्कार 99 साल पहले हुआ था.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कोविड 19 की जांच में उपयोग में लाए जाने वाले स्वाब (Swab) का आविष्कार 99 साल पहले हुआ था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

स्वाब (Swab) हमेशा से ही हमारे जीवन में छोटी सी चीज रहा. उसका उपयोग भी ऐसा नहीं रहा कि उसकी कभी चर्चा भी की जा सके. एक घरेलू उत्पाद के बाद अचानक ही कोविड-19 (Covid-19) महामारी के दौरान यही स्वाब बहुत खास हो गया. इसका उपयोग कोरोना वायरस के अहम परीक्षण के उपकरण के तौर पर होने लगा. टेस्ट के महंगे होने के कारण इसे भी अहम माने जाने लगा है. हैरानी की बात यह है कि इसका आविष्कार (Invention of Swab) हुए अभी सौ साल भी नहीं हुए हैं.

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    कोविड-19 (Covid-19) के इस दौर में बहुत ही ऐसी बातें और घटनाएं देखने को मिली जो इससे पहले कभी नहीं हुई थीं. पहली  बार किसी बीमारी और महामारी (Pandemic) की जांच में नाक को इतनी तवज्जो मिली है. ऐसा ही स्वाब (Swab) के साथ ही है जिनसे कोविड संक्रमण की जांच के नमूने लिए जाते हैं. लेकिन कम लोग जानते हैं कि स्वाब कितने साल से हमारी दुनिया में मौजूद है. देखने में लगता है कि स्वाब सदियों से हमारे बीच रहा होगा, लेकिन सच यह है कि यह पिछले 99 सालों से हमारे आसपास रहा है. लेकिन आज से पहले स्वाब इतना कीमती और अहम कभी नहीं रहा.

    स्वाब के उपयोग
    आज स्वाब कोरोनावायरस के एंटीजन टेस्ट में उपयोग में लाया जाता है जो एक सस्ता टेस्ट नहीं है.  स्वाब का आमतौर पर आज जो उपयोग होता रहा है वह कान का मैल निकालने के लिए किया जात है. इसके अलावा इसे मेकअप हटाने के लिए भी उपयोग में  लाया जाता है. लेकिन इसका चिकित्सा में भी काफी उपयोग है. यह बात जरूर है कि जनसाधारण में इस बारे में जानकारी अभी ज्यादा व्यापक हो सकी है.

    लकड़ी से प्लास्टिक तक
    स्वाब का उपयोग फोरेन्सिक विशेषज्ञ भी अपराध स्थल सेसबूत जमा करने के लिए उपयोग करते हैं. वहीं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का रखरखाव करने वाले भी इसे सर्किट बोर्ड को साफ करने में उपयोग करते हैं. पहले ये केवल लकड़ी की छोटी सी सुईनुमा तीली के आकार के होते थे जिसमें रुई लगी रहती थी. लेकिन अब ये प्लास्टिक की छोटी सी छड़ की तरह होते हैं जिनपर करीने से रुई लगी होती है.

    क्या था शुरुआती नाम
    अगले साल आधुनिक स्वाब 100 साल के हो जाएगा. पोलैंड के एक प्रवासी लिओ गेर्स्टेनजैंग को इसका आविष्कारक माना जाता है. जब लियो ने अपनी पत्नी को एक टूथपिक पर कपास बांध कर अपने बच्चे का कान साफ करते देखा. तब उन्हें स्वाब बनाने का ख्याल आया. गेर्स्टेनजैंग ने इनका “बेबी गेज” (Baby Gays) की तरह प्रचार किया.

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    कोरोना वायरस (Coronavirus) की जांच के नमूने लेने के अहम उपकरण के रूप में इसकी अहमियत बढ़ गई. (फाइल फोटो)

    1923 में बनने शुरू हुए
    स्वाब बाद में क्यू टिप्स बेबी गेज के नाम से जाने गए.  इसके साथ क्यूनाम गुणवत्ता के लिए और गेज इसलिए कहा जाता रहा क्योंकि वह नाराज नवजातों को खुश कर देता है. 1919 में टूथ पिक बनाने का काम प्यूरिटन नाम की कंपनी ने शुरू किया था और 1923 में स्वाब दिखाई देने लगे और समय के साथ उनमें कई तरह के आकार और उपयोग में भी बदलाव दिखा.

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    कानों के लिए नुकसानदेह हो सकता है स्वाब
    बाद में साल 1962 में कंपनी का चेसब्रो-पॉन्ड्स ने अधिग्रहण कर लियाऔर बाद में यूनिलीवर का हिस्सा बन गई. यह उप्ताद काफी पैसा कमाने वाला भी बना. स्वाब में क्यूटिप्स जैसे और भी घरेलू ब्रांड्स थे. स्वाब अन्य उपयोग भी बहुत लोकप्रिय रहे जिसमें कान साफ करना भी शामिल है. दिलचस्प बात यह है कि डॉक्टर इसे कान के अंदर तक इस्तेमाल करने से मना करते हैं. उनका कहना है कि इससे कान के परदे को नुकसान हो सकता है.

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    डॉक्टर स्वाब (Swab) का कान की गहराइयों में उपयोग में लाने से मना करते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    शब्द के भी कई उपयोग
    चिकित्सकीय उपयोग में लाया जाने वाला स्वाब कई तरह से उपयोग में लाया जाता है वह केवल क्यूटिप नहीं है जो इसका लोकप्रिय नाम रहा है. इसके उपयोग के कारण इसकी कई तरह के परिभाषा भी विकसित हो गई है. एक नाविक के लिए इसे डेक साफकरने के लिए स्वैबिंग द डेक वाक्यांश के रूप में उपयोग इनमें से एक है.

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    आज आलम यह है कि कई स्वाब बनाने वाली कंपनियों को जितने ऑर्डर मिल रहे हैं, उतना उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं. कभी किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि इनकी मांग इतनी ज्यादा हो जाएगी की इनकी कमी भी पड़ने लगेगी. पिछले दो सालों में इस छोटे से उपकरण की अहमियत आसमान तक पहुंच गई.

    Tags: Corona Virus, COVID 19, Research, Science

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