बच्चों में कोविड-19 वैक्सीन क्यों होनी चाहिए अनिवार्य?

बताया जा रहा है कि बच्चों को वैक्सीन (Vaccine) लगवाने से कोविड-19 से निपटने में बहुत मदद मिलेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

बताया जा रहा है कि बच्चों को वैक्सीन (Vaccine) लगवाने से कोविड-19 से निपटने में बहुत मदद मिलेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर में बच्चों (Children) में संक्रमण भी हो रहा है ऐसे में बच्चों को वैक्सीन (Vaccine) लगवाने की मांग उठने लगी है जिसके कई फायदे भी हैं.

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कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर उसकी पहली लहर से काफी अलग है. इससे निपटने के लिए पिछली लहर में किए गए उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैंस बार वायरस का नया वेरिएंट ज्यादा तेजी से तो फैल ही रहा है, यह बच्चों (Children) को भी अपना शिकार आसानी से बना रहा है जो पिछली बार देखने को नहीं मिल रहा था. ऐसे में वैक्सीनेशन (Vacination) कार्यक्रम में तेजी एक बड़ा उपाय बताया जा रहा है और इसमें बच्चों को शामिल करने की दलील भी दी जा रही है.

बच्चों में वैक्सीन की अनुमति

फिलहाल कुछ ही विकसित देशों में बच्चों के लिए वैक्सीन के ट्रायल की अनुमति दी है. भारत में इसी माह से व्यस्कों को ही टीका लगना शुरू हुआ है, लेकिन जिस तरह से बच्चों में संक्रमण बढ़ रहा है उससे उन्हें भी टीकाकरण कार्यक्रमों में शामिल किए जाने की मांग होने लगी है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से पूछा था कि बच्चों को इसमें शामिल क्यों नहीं किया जा रहा है.

बच्चों को भी वैक्सीन लगना जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 से सुरक्षा के लिए आबादी के बड़े हिस्से को वैक्सीन लगाना जरूरी है लेकिन यह सुरक्षा तब तक संभव नहीं है जब तक बहुत से किशोरों और बच्चों को वैक्सीन नहीं लगेगी. लेकिन यह काम केवल एक आदेश जारी करने जितना आसान नहीं हैं. वैक्सीन को लेकर पहले ही कई तरह की आशंकाएं हैं. बच्चों के लेकर कोविड-19 के बारे में भ्रामक जानकरी इसे और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना रही हैं.

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बच्चों पर कोविड-19 (Covid-19) का अलग तरह का प्रभाव पड़ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)कई कारण बनाते हैं जरूरी



बच्चों में वैक्सीन लगाने को लेकर कई तरह के कारण हैं जो इस टीकाकरण को प्रोत्साहित करने का काम कर सकते हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट में बच्चों में वैक्सीन अनिवार्य करने के तीन वजहों पर जोर दिया गया है. शोधकर्ताओं का मानना है कि बच्चों को वैक्सीन लगवाने पर नाकाम रहने पर उनके माता-पिता पर जुर्माना या किसी सामाजिक कार्य को करने जैसी सजा का प्रावधान काम कर सकता है.

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अभिभावकों को करना चाहिए प्रयास

शोधकर्ताओं का कहना है कि अभिभावकों को यह हर संभव प्रयास करना चाहिए जिससे बच्चे किसी तरह से भी संक्रमण का सामना ना करें. इसके लिए बच्चों को अपने बड़ों की देखभाल से बचाना संभव हो तो करना चाहिए. कोविड-19 बच्चों में अलग तरह के जोखिम ला रहा है जिसमें कछ को मल्टी इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम (MIS-C भी शामिल है. इसके बच्चों पर प्रभाव के बारे में जानकारी भी कम है.

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बच्चों को जल्दी वैक्सीन लगवाना देश के लिए लंबे समय में बहुत लाभकारी होगा. (तस्वीर: )

संक्रमण कम होने की संभावना

वैक्सीन यदि बच्चों के लिए बड़ों की तरह सुरक्षित है तो बच्चों को कई जोखिमों से बचाया जा सकता है. सरकार को ऐसे में वैक्सीन सैद्धांतिक रूप से अनिवार्य कर देनी चाहिए. लेकिन वैक्सीन से एक फायदा और भी है. बच्चों को वैक्सीन लगने से उनसे फैलने वाले संक्रमण का खतरा कम हो जाएगा. जबकि उन्हें वैक्सीन लगने में देरी जोखिम को बढ़ाने का ही काम करेगा. ऐसे में एक पूरे परिवार को वैक्सीन लगने की स्थिति में संक्रमण के फैलना का खतरा काफी कम हो सकता है.

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बच्चों को वैक्सीन जल्दी लगवाने के पीछे देश के व्यापक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्रयास भी छिपा है. बच्चों में संक्रमण कम करके हम भविष्य के नागरिकों को कोविड-19 के बाद के दुष्प्रभावों से बचा लेगें जो एक बहुत अहम उपलब्धि हो सकती है. और साथ ही हम बच्चों के लिए स्कूल खोलने का काम भी आसानी से कर सकते हैं. इसके साथ ही उनके मनोविज्ञान पर भी सकारत्मक असर होगा. आखिर हम सब चाहते हैं कि हमारे बच्चे जिएं और अच्छे से जिएं.

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