वैक्सीन और हम- आखिर क्यों जरूरी है वैक्सीन के दो डोज के बीच कुछ दिनों का गैप

कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccne) दो डोज में लगेगी जिनके बीच में कुछ दिनों का अंतर जरूरी है. (फाइल फोटो)

कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccne) दो डोज में लगेगी जिनके बीच में कुछ दिनों का अंतर जरूरी है. (फाइल फोटो)

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 1:27 PM IST
  • Share this:
भारत (India) में लोगों को कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) लगाने का काम कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है. सभी को इन वैक्सीन के दो डोज (Two doses) लगवाने होंगे और इन डोज में कुछ दिनों का अंतर (Difference) भी रखना होगा. अमरिका में जो पहले कोविड-19 वैक्सीन लग रही है, उसमें दो डोजों का अंदर कुछ हफ्तों का है. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर दो डोजों के बीच इतना अंतर क्यों रखना जरूरी है.

दो डोज ही क्यों

इस सवाल के जवाब को समझने के लिए सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि आखिर एक की जगह दो डोज की जरूरत क्यों हैं. क्या एक ही डोज से काम नहीं चल सकता है. शोधों से पता चला है कि कोविड वैक्सीन में भी एक डोज पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं होगा, यह प्रतिरोधी क्षमता तो बेहतर करता है, लेकिन पूरी तरह से नहीं और इसका असर भी लंबे समय तक नहीं रहता.

यह काम होगा वैक्सीन के डोज का
सभी वैक्सीन के पहले डोज एक तरह से हमारे प्रतिरोध तंत्र को यह सिखाएंगी कि वायरस की पहचान कर उससे रक्षा कैसे की जाए उसके बाद वे दूसरे डोज में इस सबक को मजबूत बनाने का काम करेंगी. इसके अलावा वैक्सीन का किसी पर कोई बहुत ही बुरा या लंबे समय तक साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा है. दूसरे डोज के समय इससे भी निपटने में आसानी होगा.

, Covid-19, Corona vaccine, Vaccine, Covid Vaccine, Covid-19 Vaccine, Corona virus, Vaccination
आमतौर पर वैक्सीन (Vaccine) के दो डोज के बीच 28 दिन का अंतर रखा जाता है. (फाइल फोटो)


कितना अंतर ठीक



वैक्सीन दो डोज में देना तो ठीक है, लेकिन उन डोज में अंतर कितना होगा यह हर वैक्सीन के लिए अलग है. जहां फाइजर वैक्सीन के दूसरे डोज में तीन हफ्तों का तो वहीं मोडर्ना और एस्त्राजेनेका के दूसरे डोज में चार हफ्तों के अंतर का सुझाव दिया गया है. आमतौर पर दो डोज के बीच 21 से 28 दिन का अंतर आदर्श माना गया है, लेकिन हर वैक्सीन के मामले में यह अलग-अलग सुझाया जाता है.

कोरोना से जंग ने लोगों की विज्ञान में जगाई दिलचस्पी

कैसे दिए जाएं डोज

यह बहुत बड़ी बहस का विषय हो चुका है कि क्या दो डोज की जगह पहले सभी को एक ही डोज देना ठीक होगा या फिर धीरे धीरे पूरी प्रक्रिया से गुजरकर सारी जनसंख्या को दोनों डोज देने चाहिए. एक सुझाव यह भी है कि टीकाकरण का नियोजन इस तरह से हो कि 12 हफ्तों में सभी को एक डोज देने के बाद दूसरा डोज दे दिया जाए क्यों कि पहले डोज का असर 12 हफ्तों तक रहता है.

कोरोना से जंग ने लोगों की विज्ञान में जगाई दिलचस्पी

सभी को एक डोज के बाद दूसरा संभव नहीं

असल प्राथमिकता वैक्सीन की प्रभावोत्पादकता हर स्तर पर बनाए रखना होगी. इस मामले में भारत जैसे देश में बड़े पैमाने पर नियोजन बहुत ज्यादा मायने रखता है क्योंकि यहां बड़ी तादात में टीकाकरण की चुनौती है. ऐसे में सभी को एक डोज लगाने के बाद दूसरे डोज की शुरुआत करना व्यवाहारिक तौर पर संभव ही नहीं है.

कौन अपना रहा है कौन सा तरीका

ब्रिटेन जैसे देश ने यही प्रक्रिया अपनाने की फैसला किया है जिसे यूरोप भी अपना सकता है. पर अमेरिका इसे अपनाने की स्थिति में नहीं है. अमेरिका का कहना है कि अभी उसके पास इस तरह से टीकाकरण अपनाने के लिए पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं. लेकिन एक सवाल यह भी कि क्या वाकई पहला डोज 12 हफ्तों तक कारगर रह सकता है. क्योंकि इसके भी पर्याप्त प्रमाण नहीं है.

, Covid-19, Corona vaccine, Vaccine, Covid Vaccine, Covid-19 Vaccine, Corona virus, Vaccination
कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccne) के पहले डोज के बाद और दूसरे के पहले सावधानियां बरतना जरूरी है. (फाइल फोटो)


अब ऐसे में जरूरी है कि जब तक हमारा शरीर पूरी तरह से कोविड-19 से जीतने में सक्षम नहीं हो जाता तब तक पर्याप्त सुरक्षा रखना ही बेहतर होगा. इसी लिए सलाह दी जा रही है कि लोग पहले डोज के बाद मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियम अपनाना बेहतर होगा. इससे कोविड-19 का प्रसार भी कम होगा जिससे टीकाकरण को जल्दी पूरा करने का दबाव भी कम होगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज