कब तक बचाए रख सकती है कोविड-19 वैक्सीन- जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

कोरोना वायरस (Coronavirus के वेरिएंट बढ़ने से वैक्सीन की कारगरता के संदिग्ध होने की संभावना पैदा हो गई है.  (फाइल फोटो)

कोरोना वायरस (Coronavirus के वेरिएंट बढ़ने से वैक्सीन की कारगरता के संदिग्ध होने की संभावना पैदा हो गई है. (फाइल फोटो)

कोरोना वायरस (Coronavirus) के लागातार नए वेरिएंट (Corona Variant) सामने आने से वैक्सीन (Vaccine) कितनी और कब तक कारगर रहेगी इस विशेषज्ञों ने अपनी राय जाहिर की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 3:07 PM IST
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इस समय भारत में कोरोना (Coronavirus) की दूसरी लहर थमने का नाम नहीं ले रही है. कई प्रदेशों में लॉकडाउन के उपायों के भी कोरोना संक्रमण (Corona infection) की रोजना संख्या में कमी नहीं आ रही है. कोरोना के नए वेरिएंट ने विशेषज्ञों को भी हैरान कर रखा है. ऐसे में वैक्सीनेशन पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है. लेकिन वैक्सीन (Vaccine) कब तक कोरोना संक्रमण से बचाए रख सकेगी, ऐसे सवाल भी उठने लगे हैं.

दावा करने की कोई स्थिति नहीं

कोरोना वैक्सीन कोविड-19 से कब तक सुरक्षा दे पाएगी इसको लेकर विशेषज्ञ भी किसी तरह का दावा करने की स्थिति में नहीं हैं. वे अब भी वैक्सीन लगवा चुके लोगों का अध्ययन कर यह देख रहे हैं कि वैक्सीन की सुरक्षा अब कितनी कारगर है. वे इसकी पड़ताल करने में भी लगे हैं कि वैक्सीन कोरोना के नए वेरिएंट्स के खिलाफ कितना कारगर है और क्या इसके लिए अतरिक्त डोजों की जरूरत होगी.

इसका भी अध्ययन करना होता है
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की वैक्सीन शोधकर्ता डेबोरा फुलर ने बताया कि उनके पास तभी जानकारी होती है जब वैक्सीन का अध्ययन होता है. उन्होंने कहा, “हमें वैक्लीन लगाए जा चुके लोगों का अध्ययन करना होता है और यह देखना पड़ता है कि किस बिंदु पर लोग वायरस के प्रति फिर से कमजोर हो जाते हैं.

छह महीने से एक साल तक तो कारगर

अभी तक फाइजर के चल रहे ट्रायल बताते हैं कि कंपनी के दो डोज वाली वैक्सीन कम से कम छह महीने के लिए बहुत कारगर रहती है और उसके लंबे समय तक कारगर रहने की संभावना भी है. वहीं मोडेर्ना कंपनी की वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में भी दूसरे डोज के बाद वायरस से लड़ने के एंटीबॉडी के स्तर छह महीने तक कायम रहते हैं.



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दुनिया भर की वैक्सीन कोरोना वायरस (Coronavirus) के स्पाइक प्रोटीन पर काम करती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


एंटीबॉडी और ये कोशिकाएं

लेकिन एंटीबॉडी सारी कहानी नहीं कहते हैं. बाहरी वायरस से लड़ने के लिए प्रतिरोधी तंत्र की पास सुरक्षा की दूसरी दीवार भी होती है जिसे बी और टी कोशिकाएं कहते हैं. इनमें से कछ कोशिकाएं तब भी रहती हैं जब एंटीबॉडी स्तर कम होता है. यदि भविष्य में वही वायरस फिर से आता है तो ये कोशिकाएं फिर से और तेजी से सक्रिय हो जाती हैं.

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यह भी स्पष्ट नहीं

अगर टी या बी कोशिकाएं भी बीमारी को नहीं रोक पाती हैं तो वे उसकी गंभीरता कर देती हैं. लेकिन ये याद्दाश्त कोशिकाएं कोरोना वायरस के मामले में ऐसी भूमिका कैसे और कब तक निभाते हैं, यह अभी तक स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) के वेरिएंटपिछले कुछ दिनों से ज्यादा ही बढ़ रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


क्या जीवन भर कारगर रहेगी वैक्सीन

मैरीलैंड यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ कैथलीन नेयुजिल कहती हैं कि कोविड-19 वैक्सीन फिलहाल कम से कम एक साल तक कारगर तो जरूर रहेंगी, लेकिन शायद ये जीवन भर कारगर ना रह सकें जैसा कि खसरा बीमारी के साथ हुआ था. नेयुजेल का कहना है कि यह बहुत बड़े दायरे के बीच की बात है.

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वायरस के नए वेरिएंट भी अतिरिक्त डोज की वजह हो सकते हैं. फिलहाल दी जा रही सभी वैक्सीन कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन पर काम करती हैं. इमोरी वैक्सीन सेंटर के मेहुल सुथार का कहना है कि यदि वायरस समय के साथ ज्यादा म्यूटेट हुआ तो हमें वैक्सीन को भी अपडेट करन होगा जिससे उनकी कारगरता बनी रहे. अभी तक वैक्सीन लगभग सभी वेरिएंट पर कारगर हैं.
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