Covid-19: क्या होती है महामारी में लहर और पीक, क्या भारत में आएगी तीसरी लहर?

कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है लेकिन तीसरी लहर की बात होने लगी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है लेकिन तीसरी लहर की बात होने लगी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

भारत (India) में कोविड-19 (Cobid-19) की तीसरी लहर (Third Wave) के आने की बातें की जाने लगी हैं. महामारी के लिहाज से लहर शब्द का बहुत अलग ही मतलब होता है.

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कोविड-19 (Covid-19) की महामारी (Pandemic) पिछले डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से दुनिया में फैल रही है. पिछले महीने इसके संक्रमण में अचानक बहुत तेजी आई जिसे दूसरी लहर  (Second Wave) का नाम दिया गया. इसके साथ ही इस बात पर भी बहस चल रही है कि क्या इस लहर की पीक खत्म हो गई है. किसी भी महामारी के दौर के लिए ये शब्द अनजान नहीं है. वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ अभी से कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर के आने के बारे में भी बातें करने लगे हैं. आइए जानते है कि महामारी में लहर और पीक क्या होती हैं.

बोलचाल में लहर शब्द

वैसे तो लहर शब्द की महामारी के संदर्भ में कोई लिखित परिभाषा नहीं है. लेकिन लहर शब्द का भाषा में उपयोग ही प्रचलन में जिसका मतलब है अचानक ही किसी चीज में तेजी से बढ़ोत्तरी का होना होता है. जब किसी उत्पाद की आवक बाजार में ज्यादा होती है तो भी कई लोग बोलचाल में बोलते देखे जाते हैं की उसकी लहर आ गई. लहर शब्द को बीमारियों के मौसम को दर्शाने के लिए भी किया जाता रहा है. लेकिन महामारी के लिहाज से इसके मतलब कुछ और भी होता है.

महामारी में लहर
महामारी में लहर का संबंध ग्राफ से है जिसमें समय के साथ संक्रमण की संख्या बढ़ती और घटती दिखती है. इस तरह से चित्र में समय के मुकाबले रेखा ऊपर नीचे होती दिखाई देती है जिसे लहर करते हैं. बीमारी की अचानक बढ़ जाना और फिर कम हो जाना लहर सा प्रतीत होता है इसलिए लहर शब्द का उपयोग किया जाता है. अध्ययन और महामारी से निपटने की तैयारियों के लिहाज से यह शब्द काफी अहमियत रखता है.

क्या होता है पीक

जब किसी बीमारी के दौर में लहर सी स्थिति आती है यानि मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती है फिर कम होती है तो एक समय ऐसा आता है जब मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा होती है यह लहर का शीर्ष कहा जाता है अंग्रेजी में इसे पीक कहते हैं. पीक शब्द महामारी के संदर्भ में बोलचाल का शब्द होने लगा है. पीक निकल जाने का मतलब अब संक्रमण या मरीजों की संख्या कम होना शुरू हो गई है.



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बताया जा रहा है कि देश में कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर उतार पर है. (कॉन्सेप्ट इमेज.)

दूसरी के बाद तीसरी लहर

फिलहाल माना जा रहा है कि भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर चल रही है जो अप्रैल में शुरू हुई थी. इस बात पर बहस भी हो रही है कि इस लहर का पीक गुजर चुका है. ऐसा कई इलाकों में संक्रमण की दर कम होने के कारण कहा जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अब संभावना इस बात की बढ़ने लगी है कि भारत को कोविड-19 की तीसरी लहर का सामना कर पड़ सकता है. लेकिन यह कब आएगी यह बताने की स्थिति में कोई नहीं है.

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क्या जरूरी है तीसरी लहर का आना

तीसरी लहर के आने या ना आने पर भी बहस हो रही है. इसकी वजह यह है कि लहर का आना निश्चित नहीं होता कई बार कोई महामारी बिना किसी खास लहर को दिखाए ही खत्म हो जाती है लेकिन फिर भी महामारी की प्रकोप उतना ही दिखता है. हां बस लहर में उस महामारी की प्रचंडता अधिक ही होती है. भारत में कई प्रदेशों में लहरों के अलग अलग रूप दिखे हैं कहीं हलकी तो कहीं तेज भी.

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कहा जा रहा है कि आगे कोविड-19 (Covid-19) की किसी भी लहर से निपटने का तरीका वैक्सीनेशन ही है.

अगर आई तो कैसी होगी तीसरी लहर

फिर भी कई विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा संभावना इसी बात की है कि तीसरी लहर आएगी. माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर पीक 6 मई को आया था, उसके बाद संक्रमण की संख्या में गिरावट हो रही है. लेकिन कई राज्यों में पीक नहीं आया है. यह भी माना जा रहा है कि तीसरी लहर पहली से भी ज्यादा घातक होगी. लेकिन यह भी निश्चित तौर पर नहीं कहा जाता है क्योंकि आमतौर पर नई लहर पिछली के मुकाबले कमजोरी होती है क्योंकि तब तक बहुत से लोगों में बीमारी का प्रतिरोध विकसित हो जाता है.

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भारत की  बात की जाए तो अधिक जनसंख्या के मुकाबले बहुत ही कम लोगों में ऐसा प्रतिरोध पैदा हो सका है. ऐसे में अभी आगे की कोई भी लहर पिछली के मुकाबले कमजोर होगी यह दावा बिलकुल नहीं किया जा सकता. इसीलिए वैक्सीनेशन कार्यक्रम में तेजी लाने को कहा जा रहा है. वहीं वायरस का म्यूटेशन भी हालात और खराब कर सकता है जैसा कि दूसरी लहर के बारे में कहा जा रहा है.

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