जानिए पांच वजहें, कैसे अमेरिका में कोरोना से 1 लाख लोगों ने जान गंवाई

जानिए पांच वजहें, कैसे अमेरिका में कोरोना से 1 लाख लोगों ने जान गंवाई
अमेरिका में कोरोना वायरस से जान गंवाने वालों की संख्या 1 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है.

आइए जानते हैं कि कोरोना (Corona Virus) से निपटने में अमेरिका (America) से ऐसी कौन सी चूक हुई जिसकी वजह से उसके यहां एक लाख से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी.

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कोरोना वायरस की शुरुआत भले ही चीन से हुई लेकिन इसकी सबसे तगड़ी चपेट में अमेरिका आया है. अमेरिका दुनिया का पहला देशा है जहां पर कोरोना वायरस की वजह से जान गंवाने वालों की संख्या 1 लाख के आंकड़े को पार कर गई है. अमेरिका में कुल संक्रमितों की संख्या 1,713,463 है. अमेरिका के बाद कोरोना की वजह से सबसे ज्यादा मौतें ब्रिटेन में हुई हैं. ब्रिटेन मे कोरोना की वजह से 37 हजार से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई है. आइए जानते हैं कि कोरोना से निपटने में अमेरिका से ऐसी कौन सी चूक हुई जिसकी वजह से उनके यहां एक लाख से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी.

1-लॉकडाउन के फैसले में देरी
अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर लगातार ये आरोप लगते रहे हैं कि कोरोना से बचाव के लिए सख्त कदम उठाने में देर की गई. देश में सबसे पहले कोरोना से प्रभावित होने वाला राज्य न्यूयॉर्क था. न्यूयॉर्क के गवर्नर ने लगातार ट्रंप प्रशासन को चेताया था लेकिन इसके बावजूद इस फैसले में देरी की गई. बाद में ट्रंप सरकार इस पक्ष में आई तो कई राज्यों की तरफ से लॉकडाउन के फैसले का विरोध किया गया. कई राज्य आर्थिक गतिविधियां बंद करने में हिचकिचा रहे थे. ये भी कहा गया है कि कोरोना से निपटने की टीम की कमान डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को दी गई जिसकी वजह से कई अमेरिकी गनर्नर नाराज थे. वो चाहते थे कि इसकी जिम्मेदारी खुद राष्ट्रपति ट्रंप संभालें. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एक के बाद एक राज्य में कोरोना वायरस फैलता चला गया.

(Donald Trump)
2-लॉकडाउन के बावजूद कई राज्यों में घूमते रहे लोग


जब कोरोना वायरस का वैश्विक केंद्र अमेरिका का न्यूयॉर्क बन गया था तब भी अन्य राज्यों में लोग घूमत रहे. वैश्विक संकट के बावजूद भी देश के कई हिस्सों में लोगों के आवागमन पर रोक नहीं लगाई जबकि स्पष्ट हो चुका था कि कोरोना से बचाव में सोशल डिस्टेंसिंग सबसे बड़ा हथियार है. एक रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए. न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया कि लॉकडाउन के सरकारी आदेश की वजह से ज्यादातर अमेरिकी ट्रेवेल नहीं कर पा रहे. लेकिन देश कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां के लोग घूमते रहे. बाद में इन इलाकों में भी कोरोना वायरस का भीषण संक्रमण फैला.

3-पब्लिक हेल्थ सिस्टम की कमी
अमेरिका में कोरोना वायरस के कहर के पीछे वहां का कमजोर पब्लिक हेल्थ केयर सिस्टम भी बड़ी वजह है. अगर अमेरिकी हेल्थ सिस्टम की बात की जाए तो पता चलता है कि वह बेहद दयनीय हालात में है और बेहद खर्चीला होने के साथ ही आम लोगों की पहुंच से बाहर है. अमेरिका स्थापित वैश्विक महाशक्ति है, लेकिन अगर उसके सामने चीन और भारत के हेल्थ केयर सिस्टम की बात की जाए तो ये कहीं बेहतर स्थिति में हैं. ऐसा नहीं है चीन और भारत के हेल्थ सिस्टम में खामियां नहीं हैं. विशेष रूप से भारत में बड़ी खामियां हैं. लेकिन फिर भी भारत के पास सरकारी अस्पतालों की एक लंबी चेन है, जिसके जरिए इस महामारी से मुकाबला करने की कोशिश की जा रही है. चीन ने तो इसे पछाड़ने में अपने पूरी ताकत झोंक दी थी और इसमें पब्लिक हेल्थ केयर की बड़ी भूमिका है.

4-चीन के साथ उलझे रहे संबंध
अमेरिका में कोरोना के भीषण कहर के पीछे एक वजह चीन के साथ खराब होते संबंध भी हैं. मार्च महीने में जब कोरोना वायरस दुनियाभर के देशों में पैर पसार रहा था तब चीन में रोगियों की संख्या दिन ब दिन कम हो रही थी. चीन अन्य देशों की मदद कर रहा था लेकिन अमेरिका के साथ उनके संबंध बिगड़ रहे थे. तकनीकी स्तर पर जो मदद चीन से अमेरिका को मिल सकती थी वो नहीं मिल पाई. हालांकि मेडिकल उपकरणों की एक खेप जरूर चीन से अमेरिका तक पहुंची लेकिन महामारी की रोकथाम के लिए कोई उपाय चीन से अमेरिका ने नहीं लिए.

5-मेडिकल रिजर्व फंड नहीं सही इस्तेमाल!
अमेरिका में मेडिकल एमरजेंसी के लिए केंद्र सरकार के पास एक रिजर्व फंड होता है. इस रिजर्व फंड में बड़ी संख्या में मेडिकल उपकरण सुरक्षित रखे जाते हैं. जिससे किसी महामारी, त्रासदी के वक्त इसका इस्तेमाल किया जा सके. कोरोना महामारी फैलने के साथ ही इन मेडिकल उपकरणों को राज्यों को देना शुरू किया गया. लेकिन कई जगह से ऐसी शिकायतें आईं कि यह उपकरण पुराने पड़ चुके थे. मास्क के फटे होने के अलावा वेंटीलेटर्स के जर्जर अवस्था में होने की खबरें आईं थीं. साथ ही राज्य सरकारों की तरफ से यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार ठीक तरह से इन मेडिकल उपकरणों का बंटवारा नहीं कर रही है.

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