जानिए कोविड महामारी में बिना वैक्सीन के हर्ड इम्युनिटी है खतरनाक विचार

कोरोना (Corona)  से निपटने के लिए बिना वैक्सीन (Vaccine)  के ही हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity) हासिल करने की कोशिश करना सही विचार नहीं है.
कोरोना (Corona) से निपटने के लिए बिना वैक्सीन (Vaccine) के ही हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity) हासिल करने की कोशिश करना सही विचार नहीं है.

कोविड-19 (Covid-19) की वैक्सीन के बिना हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity) हासिल करने के प्रयास बहुत ही जोखिम भरा है, कोरोना वायरस का अब तक का बर्ताव निश्चित न होना भी इसके कारणों में शामिल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 8:08 PM IST
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gकिसी संक्रामक महामारी (Pendemic) के खत्म होने में हर्ड इम्यूनिटी (Herd immunity) का अहम योगदान होता है. कोविड-19 (Covi-19) महामारी में अगर सही तौर पर हर्ड इम्यूनिटी की स्थिति आती तो कोरोना वायरस (Corona virus) फैलना बंद हो जाता और हमारा जनजीवन सामान्य हो जाता. यहां दो ही तरीके से हो सकता है या तो बहुत सारे लोग बीमार पड़ें और इम्यूनिटी विकसित करें या फिर अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन (Vaccine) लगे. विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना मामले में हर्ड इम्यूनिटी केवल वैक्सीन के जरिए आ सकती है और बिना वैक्सीन के हर्ड इम्युनिटी का विचार खतरनाक है.

जोखिम भरा विचार है
महामारी में हर्ड इम्यूनिटी कैसे भी आए इसमें लक्ष्य एक ही होता कि अधिकतर जनसंख्या में संक्रमण के प्रति प्रतिरोध विकसित किया जाए जिससे बीमारी आगे लोगों में सामूहिक रूप से नहीं फैल सके. महामारी विशेषज्ञों के बीच आम राय यही है कि बिना वैक्सीन के हर्ड इम्यूनिटी को हासिल नहीं किया जा सकता. इसमें बहुत सारी मौतों का जोखिम है.

हर्ड इम्यूनिटी के पक्ष में
कोरोना के इलाज की चर्चाओं में हर्ड इम्यूनिटी हमेशा से ही चर्चा में रहा है. इन चर्चाओं को हवा तब मिली जब व्हाइट हाउस से लिबर्टेरियन थिंक टैंक का बनाया दस्तावेज द ग्रेट बारिंग्टन डिक्लेयरेशन सामने आजा जिसमें सलाह दी गई की ज्यादा से ज्यादा स्वस्थ और युवा लोगों को हर्ड इम्यूनिटी के लिए प्रयास करना चाहिए.



लॉकडाउन बीमारी से ज्यादा तकलीफदेह?
इस डिक्लेयरेशन की एक लेखक जय भट्टाचार्य ने जामा मेडिकल जर्नल की ओर से आयोजित चर्चा में कहा, “ वे लोग जो 60 या 50 साल की उम्र से कम के हैं, उन्हें लॉकडाउन ने मानसिक और शारीरिक तौर पर कोविड से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. इसके जवाब मे महामारी विशेषज्ञ मार्क लिपसिच ने समझाया कि कैसे यह तरीका बहुत खतरनाक है.

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विशेषज्ञों का कहना है कि जिसतरह से कोरोना वायरस ((Corona virus) के लक्षण बदल रहे हैं ऐसे में हर्ड इम्यूनिटी (Heard Immunity) जोखिम भरा विचार हो सकता है. .'सांकेतिक फोटो (Pixabay)


क्यों बिना वैक्सीन के बुरा विचार है ये
इस चर्चा में छह ऐसे कारण सामने आए जो बताते हैं कि बिना कोरोना वायरस वैक्सीन के प्राकृतिक तौर पर हर्ड इम्यूनिटी हासिल करना क्यों काम नहीं करेगा. इसमें सबसे पहला कारण यह है कि युवाओं का इस तरह से लक्षित करना असंभव है इसके अलावा ऐसे विशेषज्ञ बहुत कम ही मिलेंगे जो इस विचार से सहमत हों. हाल ही में स्वीडन के नेताओं ने इस दिशा में कदम पीछे खींचे हैं क्योंकि वहां के नर्सिंग होम में बहुत सारे लोगों को मौत  हो गई.  जबकि भट्टाचार्य ने हर्ड इम्यूनिटी की मिसाल देते हुए स्वीडन का ही नाम लिया था. जहां डिक्लेयरेशन का सुझाया तरीका नहीं अपनाया गया.

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कुछ निश्चित नहीं अभी
इस चर्चा में दूसरा कारण कोविड-19  के प्रभावों को लेकर है. इस बीमारी का हमारे जीवन और स्वास्थ्य सेवाओं पर लंबा असर देखने को मिलेगा. हम अभी तक यह तय  किया जाकता है कि हमें किसको सुरक्षा देनी है और कौन स्वस्थ है जो इस बीमारी को झेल सकता है. कोविड -19 केवल लोगों मारता ही नही है. उसके उन लोगों पर बहुत निराशाजनक साइड इफेक्ट होते हैं. जिसमें दिमाग की सुस्ती, बालों को झड़ना, सूंघने की क्षमता खोना शामिल है.

किसे सुरक्षा की जरूरत किसे नहीं
हर्ड इम्यूनिटी प्रयास न करने के एक प्रमुख कारण है कि हम नहीं जानते कि कोविड-19 से कौन मरता है और क्यों. हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने की दिशा में युवा और स्वस्थ्य लोगों के अलावा बाकी लोगों की सुरक्षा देने वाले विचार में किन्हें सुरक्षा देना है यह तय करना सीधा नहीं है. कोरोना वायरस ने दुनिया हर उम्र, जाति, लिंग के लोगों को मारा है. किसी के संक्रमित होने से पहले यह पता लगाना मुश्किल है कि उसके संक्रमण का कितना जोखिम है.

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आज का हालात में वैक्सीन (Vaccine) ही हर्ड इम्यूनिटी (Heard Immunity) हासिल करने का कारगर तरीका है. (सांकेतिक तस्वीर)


लॉकडाउन हटाना भी खतरनाक
हर्ड इम्यूनिटी के लिये लॉकडाउन हटाना पड़ेगा लेकिन सच्चाई यही है कि लॉकडाउन ने बहुत सारे लोगों की जिंदगी बचाई है. ऐसे में केवल हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने के नाम पर लोगों की जान जोखिम में डालना सही विचार नहीं है.

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इसके अलावा वायरस से छुटकारा बिना लोगों को मरने देने के संभव है. ऐसे में तकनीकी रूप से विकसित समाज में इसलिए हर्ड इम्यूनिटी का विचार अच्छा नहीं माना जा सकता खास तौर से तब जब वैक्सीन ट्राय ल में सभी नतीजे खराब नहीं हैं. इसके अलावा एक सबसे बड़ा कारण जो हर्ड इम्यूनिटी के प्रयासों के खिलाफ है वह यह है कि यह निश्चित नहीं है कि हर्ड इम्यूनिटी काम करेगी ही, भले ही हम कितनी भी कोशश कर लें. एक आंकलन के मुताबिक अगर अमेरिका में हर्ड इम्यूनिटी के लिए कदम उठाए गए अकेले अमेरिका में ही  फरवरी 2023 तक छह लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके होंगे.
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