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बढ़ते प्रदूषण के लिए गायों की डकार है कितनी ज़िम्मेदार?

News18Hindi
Updated: November 5, 2019, 12:56 PM IST
बढ़ते प्रदूषण के लिए गायों की डकार है कितनी ज़िम्मेदार?
ग्रीनहाउस गैस के लिए गाय भी जिम्मेदार है

गायों की डकार से मीथेन गैस निकलती है, जो पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है.

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  • Last Updated: November 5, 2019, 12:56 PM IST
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नासा (National Aeronautics and Space Administration) की एक रिपोर्ट के अनुसार एक गाय के डकारने से सालभर में 80 से 120 किलो तक मीथेन गैस निकलती है. ये उतनी ही है, जितनी एक फैमिली कार के सालभर चलने पर निकलने वाली कार्बन.

गायें भी बढ़ते प्रदूषण की एक वजह
ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज
पर लगातार बहस हो रही है. इसी बीच एक चौंकानेवाली बात ये भी निकलकर आई कि वायुमंडल में बढ़ती ग्रीनहाउस गैस के लिए गाय भी जिम्मेदार है. हालांकि गायों के बारे में कई बातें प्रचलित हैं जैसे कई बार कई राजनेताओं ने कहा कि गाय ही अकेली ऐसी जानवर है जो ऑक्सीजन लेती और छोड़ती है. वैज्ञानिकों के अनुसार ये बात सरासर गलत है. गाय भी ऑक्सीजन लेती और कार्बन डाइऑक्साइड ही छोड़ती है. इसके अलावा कई दूसरी बातें हैं जिनकी वजह से गायें पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं. जैसे उनकी डकार.

सबसे पहले तो ये जानते हैं कि डकार क्यों आती है

सभी जानवरों और इंसानी आंतों में भी अरबों-खरबों बैक्टीरिया होते हैं जो खाने के पाचन में मदद करते हैं. खाने का कुछ हिस्सा पच नहीं पाता तब यही बैक्टीरिया उसे पचाने के लिए विटामिन k और विटामिन B में बदल देते हैं. इस प्रक्रिया में बैक्टीरिया गैस निकालते हैं, जो कि मीथेन गैस है. डकार से काफी मात्रा में ग्रीनहाउस गैस निकलती है, जो दुनिया के बड़ा खतरा है. ग्रीनहाउस गैस वो है जो सूरज की गरमाहट सोखती है और धरती को लगातार गर्म करती जाती है.

गायों से क्यों निकलती है ज्यादा मीथेन
एक मोटा-मोटी अनुमान कहता है कि दुनिया की कुल ग्रीनहाउस गैसों में से 14 प्रतिशत का उत्सर्जन पालतू पशुओं जैसे गाय, भैंस, बैल और भेड़-बकरियों की वजह से होता है. इसमें भी गायों का रोल सबसे बड़ा है. वे अपना खाना पचाने की प्रक्रिया में जुगाली करती हैं. इसमें मीथेन निकलती है जो कि एक ग्रीनहाउस गैस है. नासा की ही एक रिपोर्ट बताती है कि गाय की आंतों में भी मीथेन होती है, इसी वजह से उसकी जुगाली और डकार लेने की प्रक्रिया में ज्यादा मीथेन निकलती है.
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उसकी जुगाली और डकार लेने की प्रक्रिया में ज्यादा मीथेन निकलती है


इसलिए ज्यादा खतरनाक है मीथेन
United States Environmental Protection Agency (EPA) का दावा है कि मीथेन गैस में कार्बन डाइऑक्साइड से लगभग 25 गुना ज्यादा गर्मी रहती है. ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने में बड़ा हाथ इसी गैस का है. इसके अलावा पिछले कुछ सालों में इंसानी तौर-तरीकों की वजह से ग्रीनहाउस गैस मीथेन का उत्सर्जन कई गुना बढ़ गया है. जैसे फैक्ट्रियों का धुआं, ईंधन जलाना. इसके अलावा कई जगहों पर खुद ही प्राकृतिक ढंग से ये गैस पैदा होती है. जैसे दलदली इलाकों में मीथेन गैस लगातार बनती रहती है. खेती में इस्तेमाल होने वाली खाद में भी एक तरह की ग्रीनहाउस गैस नाइट्रस ऑक्साइड काफी मात्रा में होती है.

आप जो खाते हैं, वही डकारते हैं
क्लाइमेट चेंज पर काम कर रहे वैज्ञानिक अब इसपर भी शोध कर रहे हैं कि गायों की डकार से धरती को किस तरह से सुरक्षित रखा जाए. इसके लिए लगातार प्रयोग हो रहे हैं. एक प्रयोग में सामने आया कि गायों की आंतों में एक तरह के बैक्टीरिया मीथेन गैस के ज्यादा उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं. आंत के बाहरी हिस्से में रहने वाले ये बैक्टीरिया रूमेन कहलाते हैं. ये बैक्टीरिया ज्यादा खतरनाक इसलिए हैं क्योंकि ये बिना ऑक्सीजन के भी जीवित रह पाते हैं. गायें जब चारा खाती हैं जो उसका फर्मेंटेशन (सड़ाकर) उससे पोषण लेते हैं. इसी प्रक्रिया में गायों को बार-बार डकार आती है और मीथेन निकलती है.

बनाया जा चुका है वैक्सीन
इस बैक्टीरिया से गायों को कोई खास फायदा नहीं, बल्कि पर्यावरण को ज्यादा नुकसान ही है. इसे देखते हुए गायों के लिए 1 टीका तैयार करने की कोशिश की जा रही है. ये टीका गायों की आंतों के उन खास बैक्टीरिया को खत्म करेगा, लेकिन गायों को बिना नुकसान किए हुए. ये भी देखा जा रहा है कि कैसे डेयरी उत्पाद और दूध लेने वालों को भी इससे कोई नुकसान न हो. न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में इसपर लगातार प्रयोग हो रहे हैं. वैक्सीन अभी प्रयोग के चरण में है. कुछ गायों को ये वैक्सीन देकर उन्हें गैस चैंबर में रखकर ये देखा गया कि उनसे कितनी मीथेन निकल रही है. हालांकि ये बात प्रमाणित नहीं हो सकी है कि वैक्सीन से मीथेन कम हो सकी है. इस तरह का टीका सबसे पहले नब्बे के शुरुआती वक्त में भी बनाया गया था लेकिन वो भी कामयाब नहीं रहा.

इंसानी तौर-तरीकों की वजह से ग्रीनहाउस गैस मीथेन का उत्सर्जन कई गुना बढ़ गया है


प्रयोगों की ही कड़ी में स्कॉटलैंड के पशु वैज्ञानिकों ने गायों के डीएनए में बदलाव की बात कही. वैसे ये प्रक्रिया काफी वक्त लेने वाली और खर्चीली भी है इसलिए वैज्ञानिक इसपर सहमत नहीं हो सके.

चारे में हो बदलाव
वैज्ञानिकों का एक दूसरा खेमा मानता है कि जानवरों के चारे में बदलाव किया जाए तो काफी हद तक मीथेन गैस का निकलता कम हो सकता है. ब्रिटेन की नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक इसी बात के समर्थक हैं कि खानपान में बदलाव काफी मदद कर सकता है. जैसे मक्के का चारा या दूसरे ज्यादा रेशेदार चारे का उपयोग कम करना डकार कम कर सकता है. Proceedings of the National Academy of Science में छपी एक स्टडी के अनुसार गायों से निकलने वाली मीथेन कम करने के लिए कई तरह के केमिकल बेस्ड इंजेक्शन भी दिए जा सकते हैं जैसे 3-नाइट्रोऑक्सीप्रोपैनेल (3NOP) और आयोनोफोर्स. इसपर पशुप्रेमी वैज्ञानिकों को एतराज है क्योंकि इससे गायों और दूसरे पालतू पशुओं की पाचन क्षमता खराब होने लगती है.

वैज्ञानिकों का एक तबका ये भी मानता है कि आंतों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया (सभी) पाचन क्षमता अच्छी रखते हैं. ऐसे में किसी खास बैक्टीरिया को मारना गायों की सेहत के लिए खतरनाक भी सकता है.

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First published: November 5, 2019, 12:56 PM IST
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