इन 17 कणों के ना होने से यमुना का पानी बन रहा है 'ज़हरीला'

दिल्ली युनिवर्सिटी की एक रिसर्च टीम ने दिल्ली में यमुना के पानी की जाँच की जिसमें हैरान करने वाले नतीजे सामने आए.

News18India
Updated: April 17, 2018, 3:44 PM IST
इन 17 कणों के ना होने से यमुना का पानी बन रहा है 'ज़हरीला'
दिल्ली में यमुना नदी
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Updated: April 17, 2018, 3:44 PM IST
दिल्ली युनिवर्सिटी की एक रिसर्च टीम ने दिल्ली में यमुना के पानी की जाँच की जिसमें हैरान करने वाले नतीजे सामने आए. नतीजों के मुताबिक दिल्ली में यमुना के पानी का प्रदूषण अभी भी ख़तरनाक
स्तर पर बना हुआ है. कमिटी से जुड़े वैज्ञानिकों का दावा है कि नदियों के पानी में आम तौर पर मिलने वाले 17 कण दिल्ली में यमुना के पानी में नहीं मिले.

पानी के लिए क्यों ज़रूरी है 17 कण
ये 17 कण खास तरह के बैक्टीरिया हैं जिन्हें सिलिएट (ciliate) कहा जाता है. ये बैक्टीरिया Natural Purifier की तरह होते हैं, जो पानी में गंदगी को कम करने के लिए बेहद ज़रूरी होते हैं.

दिल्ली में यमुना का पानी दाखिल होते ही ऐसे 7 बैक्टीरिया पानी से ख़त्म हो जाते हैं. वज़ीराबाद बैराज तक पानी के पहुँचते ही ऐसे 5 कण और गायब हो जाते हैं. यमुना के पानी के ओखला तक पहुँचते पहुँचते बचे हुए 5 कण भी ख़त्म हो जाते हैं, जिससे यमुना का पानी बेहद ज़हरीला हो जाता है.

यहां पर 17 नहीं बल्कि 37 है कणों की संख्या

बता दें, उत्तराखंड में यमुना के पानी की जाँच करने पर इन कणों की गिनती 17 नहीं बल्कि 37 पाई गई, जिनकी वजह से यमुना का पानी दिल्ली के मुकाबले कहीं ज़्यादा साफ़ होने का दावा किया गया है.
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इससे पहले CPCB यानि Central Pollution Control Board भी दावा कर चुका है कि दिल्ली में यमुना का पानी बेहद प्रदूषित है.

CPCB की रिपोर्ट दावा करती है, कि दिल्ली के 21 अहम नालों में 18 नालों का गंदा पानी यमुना में मिलता है. दिल्ली में फ़ैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल भी यमुना के पानी को ज़हरीला बना रहे हैं. जानकार दावा कर रहे हैं कि अगर यही हाल रहा, तो दिल्ली में महामारी फैलने की वजह यमुना का पानी ही बन सकता है.

 

 

 
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