क्या नोबल सम्मानित Gene Editing तकनीक से भविष्य में मिल सकेंगे मनचाहे बच्चे?

जीन संपादन तकनीक (Gene Editing) CRISPR के लिए नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) मिलने से इसके उपयोग की सीमाओं पर बहस होने लगी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
जीन संपादन तकनीक (Gene Editing) CRISPR के लिए नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) मिलने से इसके उपयोग की सीमाओं पर बहस होने लगी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जीन संपादन (Gene Editing) तकनीक CRISPR के लिए दो महिलाओं को नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) मिला. उनकी तकनीक बहुत से क्षेत्रों में काफी उपयोगी साबित हो रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2020, 2:34 PM IST
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हाल ही में एमैनुएल कारपेंटर(Emmanuelle Charpentier) और जेनिफर डोडना (Jennifer Doudna) को रसायन शास्त्र (Chemistry) में नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) दिए जाने की घोषणा की गई. दोनों को जीनोम एडिंटिंग (Gene Editing) तकनीक CRISPR के लिए यह सम्मान मिला है. स्वास्थ्य विज्ञान (Health Science) की दुनिया में इस बात की चर्चा काफी पहले से हो रही है कि क्या जीन एडिट कर हम मनचाही संतान (Child) प्राप्त कर सकते हैं या नहीं. लेकिन इस पुरस्कार की घोषणा के बाद से यह बहस और अधिक बढ़ गई है.

50 साल से भी कम पुरानी तकनीक
यूं तो प्राकृतिक तरीके से जीन एडिटिंग का काम हजारों सालों से हो रहा है, लेकिन उसमें एक तो बहुत लंबा समय लगता है और इंसान इसमें नहीं सकता इसके लिए उसे आस पास के हालातों पर निर्भर रहना होता है जो जीन में बदलाव करने में अप्रत्यक्ष योगदान दे सकते हैं. लेकिन जीन एडिटिंग तकनीक 50 साल से भी कम पुरानी तकनीक है और इससे कई शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को काफी उम्मीदें हैं.

पहले यह समझें कि क्या है जीनोम या जीन एडिटिंग
जीनोम जेनेटिक निर्देशों को वह संपूर्ण समूह है जो यह तय करता है कि जीव कैसे विकसित होगा. इनमें से कुछ निश्चित जीन्स में बदलाव कर हम उस जीव के किसी खास हिस्से या आदत या फिर किसी चीज के प्रति उसकी पूर्व निर्धारित प्रतिक्रिया, या फिर किसी और गुण को बदल सकते हैं.



बहुत उपयोगी है यह तकनीक
CRISPR यानि क्लस्टर्ड रेगुलरली इटरस्पेस शॉर्ट पैनिलड्रोमिक रीपीट्स तकनीक से किसी जीव के जीनोम के DNA में कांट छांट की जा सकती है और उसके जीन्स का संपादन किया जा सकता है. यह तकनीक मूल शोध के लिए बहुत ही अहम है और इस पर और इसके उपयोग पर हर साल हजारों शोध प्रकाशित होते हैं.
इन क्षेत्रों में मिलती दिख रही है सफलताइनमें कैंसर और मानसिक बीमारी जटिल बीमारियों में शोध, इंसानों और जानवरों के अंग प्रत्यर्पण, बेहतर भोजन उत्पादन, मलेरिया पैदा करने वाले मच्छरों को उन्मूलन, जैसे बहुत से क्षेत्रों में इस तकनीक का उपयोग हो रहा है जिसमें काफी हद तक सफलताएं भी मिल रही हैं.जानिए कितने उपयोगी हैं Colloidal diamonds जिन्हें विकसित करने में लग गए 30 सालडीएनए सीक्वेंस में बदलाव संभवकारपेंटर और डोडना ने यह दर्शाने में अहम भूमिका निभाई कि CRISPR का उपयोग कर वांछनीय डीएनए सीक्वेंस में बदलाव किया जा सकता है. यह एक बैक्टीरिया में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाला सिस्टम से ली गई तकनीक है जिसमें बैक्टीरीया वायरस जैसे बाहरी तत्वों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता हासिल कर सकता है.


एक भ्रूण में भी किया गया बदलाव
प्रोफेसर कारपेंटर की तकनीक का जेनेटिक कैंची की तरह उपयोग कर वायरस के किसी डीएनए में कांटछांट की जा सकती है. उनकी इस तकनीक ने बहुत सारे आयाम खोल कर रख दिए थे.  और जीन एडिटिंग की दुनिया में व्यापक तौर पर शोध होने लगे. यहां तक कि एक चीनी वैज्ञानिक ने तो दुनियामें पहली बार भ्रूण में जीन संपादन का काम किया लेकिन उन्हें वे नतीजे नहीं मिले जिसके लिए उन्होंने संपादन किया था.

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बेशक जीन एडिटिंग और उसकी CRISPR तकनीक काफी कारगर है और इंसान के जीनोम में कारगर बदलाव करने में सक्षमता हासिल कर सकती है. इस पर प्रयोग  तो जारी हैं, लेकिन उससे पहले ही इसको लेकर नैतिकता और कानूनी बहस भी छिड़ चुकी है. आने वाले समय में स्वस्थ्य संतानों का सपना भी संभव हो जाए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए, लेकिन ऐसी तकनीकों को अब भी लंबा समय तय करना है.
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