डायनासोर तक को खा लेते थे ये आतंकी मगरमच्छ, जानिए कितने विशाल थे ये

करोड़ों साल पहले डायनासूकस की प्रजाति के मगरमच्छ खतरनाक शिकारी जीव थे. प्रतीकात्मक तस्वीर)

डायानासोर (Dinosuar) के युग में विशालकाय मगरमच्छ (Crocodile) हुए करते थे जिनके दांत ही केले (Banana sized teeth) के बराबर थे. ये डायनासोर तक का शिकार कर लेते थे.

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    आम धारणा है कि मगरमच्छ (Crocodile) प्रजाति (Species) के जीव लाखों सालों से ऐसे ही रहते आ रहे हैं और उनमें बदलाव नहीं होता है. लेकिन यह धारणा गलत है. ऐसा मगरमच्छ प्रजाति के ही बहुत पुराने जीवाश्मों (Fossils) से साबित हुआ है. हाल ही में हुए शोध के मुताबिक ये जीव डायनासोर (Dinosaur) के जमाने में रहा करते थे और ये इतने विशालकाय और खतरनाक हुआ करते थे कि डायनासोर तक का शिकार (prey) कर लिया करते थे.

    आतंकी मगरमच्छ
    वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि करोड़ों साल पहले रहने वाले मगरमच्छ भयानक शिकारी जानवर हुआ करते थे. वैज्ञानिकों ने उन्हें ‘आंतकी मगरमच्छ’ की संज्ञा दी है. उनके मुताबिक इन मगरमच्छों के दांत केले के आकार के जितने बड़े हुआ करते थे और उनका खुद का आकार लंदन बस के जितना बड़ा हुआ करता था. इस सरीसृप की बड़ी नाक हुआ करती थी और उनके नथुनों में बहुत फासला होता था.

    डायानसोर तक का शिकार
    यह अध्ययन जर्नल ऑफ वर्टीबरेट पेलेएंटोलॉजी में प्रकाशित हुआ है. इन शोध ने खुलासा किया है कि अपने कुचल देने वाले जबड़े से ये आतंकी मगरमच्छ डायनासोर तक का शिकार कर लेते होंगो. इन मगरमच्छों का नाम डायनासूकस (Deinosuchuas) है जो अमेरिका में 7.5 कोरोड़ से 8.2 करोड़ साल पहले उत्तरी क्रिटेशियस काल में विचरण करते होंगे.

    डायनासोर भी रहे होंगे आतंकित
    अर्कांसास स्टेट यूनिवर्सिटी के न्यूयॉर्क इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नेलॉजी कॉलेज ऑफ ओस्टोपैथिक मेडिसिन से आए प्रमुख शोधकर्ता डॉ एडम कोसैट ने बताया, “इन भयानक जंतुओं ने डायनासोर्स तक को आतंकित कर रखा होगा क्योंकि जब डायनासोर पानी पीने किनारे पर आते होंगे तब ये मगरमच्छ इनका भी शिकार कर लेते होंगे.”



    कितना बड़ा है यह शिकारी
    डायनासूकस की लंबाई 33 फुट है और यह एक मौका परस्त शिकारी था. यह इतना बड़ा था कि यह आसापास की सभी जानवरों को खा लेने में सक्षम रहा होगा. अध्ययन का कहना है कि आंतकी मगरमच्छों की उस समय की उपस्थिति की पुष्टी उस दौर के कछुओं के कोल और डायनासोर की हड्डियों पर इनके दातों के निशान से की जा सकती है.

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    आज के मगरमच्छों से बहुत अलग
    ये शिकारी घड़ियाल के नजदीकी संबंधी हैं, लेकिन उनकी खोपड़ी के नाप के मुताबिक ये न तो घड़ियाल के जैसे लगते हैं और ना ही मगरमच्छ के जैसे. वहीं शोधकर्ताओं अभी यह पता नहीं लगा सके हैं कि उनकी नाक इतनी लंबी क्यों होती थी.

    अभी काफी कुछ जानना बाकी
    कोसैट का कहना है कि उनके नाक के छेद किसी और प्राणी में नहीं हैं. उन्होंने बताया, “हम नहीं जानते कि ये क्यों थे. इस बारे में गहराई से शोध करने पर शायद हमें इस रहस्य को सुलझाने में मदद मिल सकेगी और तब हम शायद इस अविश्वस्नीय जीव के बारे में और ज्यादा जान सकेंगे.”

    कई प्रजातियां थी इनकी
    अभी तक वैज्ञानिक डायनासूकस के विलुप्त होने की वजह भी नहीं जान सके हैं. इयोवा यूनिवर्सिटी के वर्टीबरेट पेलेएंटोलॉजिस्ट और इस शोध के सह लेखक क्रिस्टोफर ब्रोकू का कहना है कि उस जमाने में डायनासूकस की कई प्रजातियां रहा करती थीं.

    crocodile
    तब की मगरमच्छ प्रजातियों और आधुनिक मगरमच्छ प्रजातियों में बहुत फर्क आ गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


    यह धारणा गलत है
    शोधकर्ताओं का कहना है कि डायनासूकस हैटाचेरी और डायनासूकस रिग्रोएनडेनिसिस उत्तरी अमेरिका के पश्चिम में रहते थे जबकि डायनासूकस श्विमेरी पूर्व के हिस्से में रहते थे. ब्रोकू का कहना है, “यह गलत धारणा है कि मगरमच्छ प्रजाति के जीव बदलते नहीं हैं. ये डायनासोर के जमाने से नहीं बदले हैं पूरी तरह से गलत मान्यता है.”

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    कोसैट ने बताया कि आज की मगरमच्छ की आधुनिक प्रजातियां बहुत कम हैं और वे एक सी ही दिखाई देती हैं. लेकिन अगर इनका जीवाश्म रिकॉर्ड देखा जाए तो पता चलता है कि इनके आकार, प्रकार, खान-पान और जीवनशैली में काफी विविधता रही है. अध्ययन यही बताता है कि आज के अमेरिकी घड़ियाल अपने पूर्वजों से बहुत ही अलग दिखाई देते हैं.

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