नॉर्थ कोरिया की क्रूरता का नया नमूना, स्कूल से घर नहीं लौट सकेंगे बीमार बच्चे

नॉर्थ कोरिया की क्रूरता का नया नमूना, स्कूल से घर नहीं लौट सकेंगे बीमार बच्चे
सितंबर से नॉर्थ कोरिया में हर बच्चे का स्कूल जाना अनिवार्य हो जाएगा

कोरोना पर मुंह सिले हुए नॉर्थ कोरिया (coronavirus in North Korea) में अब बीमार बच्चों को घर लौटने या मनमुताबिक इलाज लेने की इजाजत नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 25, 2020, 4:52 PM IST
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एक तरफ उत्तर कोरियाई लीडर किम जोंग उन (North Korean leader Kim Jong-un) की मौत की अटकलें लग रही हैं तो दूसरी ओर वहां कई अजीबोगरीब फैसले लिए जा रहे हैं. जैसे सितंबर से वहां हर बच्चे का स्कूल आना अनिवार्य होगा. ये फैसला वहां पर कोरोना वायरस की चर्चाओं के बाद भी लिया गया है. सिर्फ स्वस्थ बच्चों को ही स्कूल नहीं आना है, बल्कि बीमार बच्चे भी स्कूल आएंगे और उसके बाद वे घर नहीं जा सकेंगे. जानिए, क्या है किम के देश का ताजा खौफनाक फैसला.

क्या किम का देश कोरोना-फ्री है
बीते दिनों नॉर्थ कोरिया में भी कोरोना संक्रमण फैलने की बात आने लगी. इस बात को मीडिया में लीक हुई एक मीटिंग की फोटो से भी मिली. तस्वीर में किम जोंग मास्क लगाए हुए थे और सभी कुर्सियों के बीच अच्छी-खासी दूरी थी. हालांकि किम जोंग लगातार इस बात से इनकार करते रहे कि उनके यहां कोरोना का कोई मामला है. हालांकि एक्सपर्ट इस बात को नहीं मानते हैं कि किसी देश में इस महामारी का कोई प्रकोप न हो.

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इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रास जुलाई में उत्तर कोरिया के सीमावर्ती इलाकों में कोरोना के लिए जागरुकता फैलाने पहुंचा तो वहां वायरस के कई अनरिपोर्टेड मामले दिख गए. इससे अनुमान और पुख्ता हो गया कि किम के देश में भी कोरोना फैला हुआ तो है.



कोई बच्चा बुखार या सर्दी से पीड़ित दिखाई दे तो उसे स्कूल में ही रोक लिया जाएगा


शुरू हो रहे स्कूल
इसी बीच वहां 1 सितंबर से स्कूल खोलने के आदेश आ चुके हैं. एक्सप्रेस.को.यूके ने कोरियाई मामलों की अमेरिकन वेबसाइट NK News के हवाले से ये रिपोर्ट दी है. इसके मुताबिक सभी बच्चों को स्कूल बुलाया गया है. अगर कोई बच्चा बुखार या सर्दी से पीड़ित दिखाई दे तो उसे स्कूल में ही रोक लिया जाएगा. वो वहीं आसपास आइसोलेट किया जाएगा, जहां साथ में उसकी पढ़ाई भी होगी. उसे घर लौटने या अस्पताल जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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स्कूल अलग से नहीं ले सकते फैसला
रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ उन्हीं हालातों में स्कूल कोई अलग फैसला ले सकता है, जब किसी क्लास में 7 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे को तेज बुखार हो. इसके बाद भी किसी क्लास को बंद करने का अधिकार स्कूल का नहीं होगा, बल्कि उसे पहले म्यूनिसिपल और डिसीज कंट्रोल अथॉरिटी को सूचित करना होगा. इसके बाद उन बच्चों को अलग किया जाएगा, जो बीमार हों और स्कूल के पास ही इलाज दिया जाएगा. माता-पिता या किसी को भी उन बच्चों से मिलने की इजाजत नहीं होगी.

माना जा रहा है कि ये अजीबोगरीब और काफी हद तक क्रूर फैसला किम ने ही लिया (Photo-needpix)


माना जा रहा है कि ये अजीबोगरीब और काफी हद तक क्रूर फैसला किम ने ही लिया है. ताकि पीछे जा चुके कोर्स की भरपाई हो सके. इसके लिए बच्चों की सेहत और पेरेंट्स की चिंता भी नीचे जा चुकी है. हालांकि पेरेंट्स इसपर चिंतित हैं लेकिन किम के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं.

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डरे हुए पेरेंट्स नहीं कर पा रहे विरोध
बता दें कि उत्तर कोरिया में किम परिवार की बात न मानने को सीधा देशद्रोह से जोड़ दिया जाता है और पूरे परिवार को कैद कर लिया जाता है. कई बार ये सजा कुछ महीनों तो कई बार सालों चलती है. इस दौरान तीन पीढ़ी तक को किसी भी बड़े ओहदे पर बैठने का मौका नहीं मिल पाता है. तीन पीढ़ियों के बाद वफादारी की जांच होगी, तब जाकर मामला सुधरेगा.

इतनी है साक्षरता दर
वैसे बाकी सारी चीजों में पीछे नजर आता ये देश पढ़ाई के मामले में दुनियाभर में सबसे आगे है. यहां शिक्षा पूरी तरह से स्टेट-फंडेड है और खुद नॉर्थ कोरिया के मुताबिक उनके यहां साक्षरता दर 100 प्रतिशत है. साल 1988 में खुद यूनेस्को ने इस बात की जांच करने की कोशिश की और पाया कि वहां प्री-प्रायमरी से लेकर कॉलेज स्तर पर भारी संख्या में शिक्षक हैं.

नॉर्थ कोरिया के मुताबिक उनके यहां साक्षरता दर 100 प्रतिशत है (Photo-pixabay)


सेंसर से गुजरते हैं कोर्स
हालांकि इन सबका खास मतलब इसलिए नहीं दिखता क्योंकि यहां कोर्स भी बड़े भारी सेंसर से होकर गुजरता है. स्कूल के दौरान ही बच्चों से किम के परिवार के नेताओं के बारे में पढ़ाया जाने लगता है. सेकेंडरी स्कूलिंग के दौरान हर बच्चे के लिए ग्रेट किम Il संग, कमुयनिस्ट मॉरलिटी और कम्युनिस्ट पार्टी पॉलिसी पढ़ना जरूरी होता है. इसके साथ सोशल एजुकेशन भी दी जाती है. इसके तहत लड़के और लड़कियों को अलग-अलग सीख मिलती है. लेकिन एक सीख दोनों के ही लिए समान है- वो ही किम के परिवार से वफादारी.

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यहां तक कि आगे विज्ञान पढ़ने वालों को भी देश और किम परिवार के लिए खोज की बात कही जाती है. यहां तक कि अगर कोई वैज्ञानिक बड़ी खोज करे तो उसे सामने लाते हुए वैज्ञानिक को सुप्रीम लीडर्स को अपनी प्रेरणा कहना होता है. द आउटलाइन के मुताबिक वहां केवल उन्हीं रिसर्च को प्रमोट किया जाता है, जो बम-मिसाइल पर काम करें या फिर खुद को युवा दिखाने पर कोई प्रयोग हो.
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