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दुनिया की वो प्रयोगशाला, जहां प्राण लौट आने की उम्मीद में रखे हैं कई शव

दुनिया की वो प्रयोगशाला, जहां प्राण लौट आने की उम्मीद में रखे हैं कई शव

अमेरिका में एक प्रयोगशाला में मृत लोगों (Dead) के शरीर और उनके अंगों को संरक्षित किया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अमेरिका में एक प्रयोगशाला में मृत लोगों (Dead) के शरीर और उनके अंगों को संरक्षित किया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अमेरिका (USA) के एरिजोना प्रांत में एक प्रयोगशाला में मृत लोगों के शरीर को खास तकनीक से भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है जिससे सही तकनीक विकसित होने पर उन्हें फिर से जिंदा (Bringing Dead Alive) किया जा सके. लोग इस तरह की तकनीक के लिए पैसा भी खर्च कर रहे हैं. क्रायोनिक्स (Cryonics) नाम की इस तकनीक में शरीर या उसके अंगों को बहुत ही ज्यादा ठंडे तापमान में लंबे समय के लिए रखा जाता है.

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    क्या मृत्यु (Death)के बाद भी जीवन संभव है. क्या मरने के बाद इंसान को फिर से जीवित किया जा सकता है. इस तरह के सवाल आज अंधविश्वास की श्रेणी रखे जाते हैं. लेकिन क्या हो अगर ऐसे सवालों के जवाब के लिए मृत शरीरों को सुरक्षित रखा जा रहा हो, वह भी पूरे वैज्ञानिक तौर तरीकों से और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के लिए. तो ऐसा भविष्य के चिकित्सकीय उन्नति (Medical Advance) के भरोसे किया जा रहा है. इसके लिए क्रायोनिक्स (Cryonics) नाम की तकनीक अपनाई भी जा रही है. अमेरिका (USA) में लोग अपने मृत शरीर को एक खास प्रयोगशाला में सुरक्षित भी रखवा रहे हैं.

    मानवशरीर का संरक्षण
    इसमें मानव शरीर को बर्फ की तरह जमा कर उस समय तक रखने का प्रावधान है  जब उन्नत तकनीक से लोगों का जीवन फिर से लौटाया जा सकेगा. अमेरिका के स्कॉट्सडेल में  एक प्रयोगशाला में मानवशरीर और उनके अंगों को सुरक्षित रखा जा रहा है और इसके लिए ग्राहक भी कम नहीं हैं. इस एक तरह के उद्योग के रूप में पनप रहा है.

    गारंटी तो नहीं फिर भी
    इस व्यवसाय के लोग मानते हैं कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि भविष्य में वाकई इस तरह से लोगों को पुर्जीवित किया ही जा सकेगा. इस तरह से शरीर को संरक्षित रखने के प्रक्रिया को चिकित्सा जगत में संदेह की निगाह से देखा जा रहा है और आलोचना भी की जा रही है. लेकिन क्रायोनिक्स को मानवने वालों में बहुते से हाई प्रोफाइल ग्राहक भी हैं और मौत के बाद के जीवन के लिए जोखिम लेने को तैयार है.

    कितने तापमान पर
    इस प्रक्रिया में वैज्ञानिकों का प्रयास मौत के बाद जल्दी से जल्दी शरीर को संरक्षित करने का होता है. उनका इरादा जितना संभव हो शरीर की हर कोशिका को संरक्षित करना होता है. इसके लिए वे शरीर को या फिर उस अंग को जिसे संरक्षित करना हो, -196 डिग्री सेंटीग्रेड में जमा कर रखते हैं.

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    क्रायोनिक्स (Cryonics) की धारणा बिलकुल नई नहीं हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    विशेष द्रव का उपयोग
    वैज्ञानिकों को उद्देश्य शरीर में विघटन या विखंडन की प्रक्रिया को जहां तक संभव हो रोकना होता है. इसके लिए उससे पहले एक खास द्रव शरीर के अंदर संचारित करते हैं जो ठंडा होने के साथ फैलता है और शरीर के अंदर विघटन की प्रक्रियाओं को जारी रहने से रोक देता है. इस पूरी प्रक्रिया को क्रायोप्रिजर्वेशन कहते हैं.

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    केवल मौका है ये
    हैरानी की बात यह है कि  क्रायोनिक प्रक्रिया अभी से नहीं बल्कि काफी समय पहले से चल रही है. पहली शरीर जो क्रायोनिक पद्धति से गुजरा था, वह 1967 में संरक्षित किया गया था. आज यह प्रक्रिया एक व्यवासाय और उद्योग का रूप ले रही है. एल्कोर (ALCOR) कंपनी के सीएओ मैक्स मोर का कहना है, “ हम जो पेशकश कर रहे हैं ,वह वापस आने का केवल एक मौका भर है और अनंत जीवन का मौका है, यह सौ साल का भी हो सकता है या फिर हजार साल का भी हो सकता है.

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    क्रायोनिक्स (Cryonics) तकनीक में केवल पूरा शरीर ही नहीं बल्कि मस्तिष्क भी संरक्षित किए जाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    तकनीकी विकास से कुछ भी संभव
    इस तकनीक पर काम करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि विज्ञान की दुनिया में बहुत ही अप्रत्याशित उपलब्धियां हासिल हुई हैं. 100 साल पहले चांद पर जाने की बात कपोल कल्पना लगती थी. लेकिन यह संभव हुआ. ज्यादा पहले नहीं 1950 के दशक तक ही लोग मृत घोषित किए जाते थे तब हमें नहीं मालूम होता था कि हमें उनके साथ क्या करना है. अब सीपीआर से उन्हें वापस जिंदा करने के प्रयास होते हैं.

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    इस प्रक्रिया के लिए केवल पूरे शरीर ही संरक्षित नहीं किया जाता है. बल्कि शरीर के अंग खास तौर से मस्तिष्क को भी संरक्षित किया जाता है. इसके अलावा भ्रूण,  या मृत शिशु भी संरक्षित किए जाते हैं. यहां तक की मानव स्पर्म या अंडजों का भी संरक्षण किया जाता है. पूरे शरीर को संरक्षित रखने की कीमत 2 लाख अमेरिकी डॉलर है तो वहीं केवल दिमाग को संरक्षित करवाने में 80 हजार डॉलर का खर्चा आएगा.

    Tags: Health, US

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