आखिर कितने खतरनाक हैं घरों में पाए जाने वाले मच्छर

शहर में मच्छरों (Mosquitoes) की संख्या तेजी से बढ़ना एक खतरनाक संकेत माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

शहर में मच्छरों (Mosquitoes) की संख्या तेजी से बढ़ना एक खतरनाक संकेत माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

इस साल भी घरों पाए जाने वाले मच्छरों (Mosquitos) की संख्या बढ़ने की खबरें आने लगी है. कोरोना काल में दिल्ली (Delhi) समेत कई शहरों के नगर निगमों (Municipal corporations) को इनके रोकथाम के लिए कदम उठाना चुनौतीपूर्ण हो गया है.

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गर्मी का मौसम (Summer Season) आ चुका है दिन ब दिन तापमान बढ़ने लगा है. ऐसे में मच्छरों (Mosquitos) को पनपने का यह सबसे उपयोग माहौल और समय होता है. इस दौरान क्यूलेक्स (Culex) या आम घरेलू मच्छर दिल्ली (Delhi) और उत्तर भारत के कई इलाकों में बढ़ने लगे हैं. दिल्ली के ही बहुत सी रिहायशी कॉलोनियों की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन अब शिकायत कर रहे हैं कि उनकी कॉलोनी और आसपास के इलाकों में आम घरेलू मच्छर की संख्या में भारी मात्रा में इजाफा हो रहा है. क्या यह वाकई चिंता का विषय है.

मच्छर पनपने का सही समय है ये

इन शिकायतों को देखते हुए कई नगर निगम और नगर पालिकाओं में उच्च स्तर की मीटिंग बुलाई है जिससे मच्छरों को बढ़ने से रोका जा सके. मच्छरों की संख्या बढ़ने के पीछे तापमान का  बढ़ना प्रमुख कारण होता है क्योंकि वह उनके पनपने के ज्यादा अनुकूल होता है .अगर दिल्ली की बात करें तो बाढ़ वाले मैदानी इलाके जिनमें पूर्व और दक्षिण दिल्ली प्रमुख हैं, मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श स्थान होते हैं.

कितने खतरनाक होते है क्यूलेक्स मच्छर
क्यूलेक्स मच्छर कुछ गंभीर बीमारियां पैदा करने में सहायक होते हैं वे एक से लेकर डेढ़ किलोमीटर तक उड़ सकते हैं. क्यूलेक्स मच्छरों को जापानी एनसेफैलिटिस नाम की जानलेवा बीमारी फैलाने वाला मच्छर माना जाता है. यह एक बहुत कम वायरल बीमारी होती है जो मस्तिष्क में बहुत ज्यादा जलन पैदा करती है.

ये इलाके हैं संवेदनशील

जहां डेंगू ओर चिकनगुनिया फैलाने वाली एंडीज मच्छर प्रजाति साफ पानी में पनपती है तो वहीं क्यूलेक्स मच्छर गंदे और ठहरे हुए पानी में पनपते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक  नई दिल्ली नगर निगम में इन मच्छरों के पनपने वाले प्रमुख इलाकों में कुशाक नाला और बापा नगर और और भारती नगर में उसके किनारे वाले इलाके शामिल हैं. पूर्वी दिल्ली में युमना के बाढ़ वाले मैदान, दक्षिण में बारापुला नाला और उत्तर में नजफगढ़ नाला के इलाके भी खतरनाक हैं.



क्यों होता है यहां खतरा

जब गर्मी में यमुना नदी का पानी नीचे उतरता है, तो कुछ गड्ढों में पानी ठहर जाता है और गर्मियों में भी ये गड्ढे नहीं सूखते हैं. ये गड्ढे क्यूलेक्स मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श जगह हो जाते हैं. वहीं इस मौसम का तापमान इन मच्छरों के लिए आदर्श है.

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क्या हो रहा है प्रयास

दिल्ली नगर निगम के लोक स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि उनकी टीम प्रमुख नालों में मॉस्क्विटो लार्विसाइडल तेल डाल रहे हैं जिससे सतह पर एक परत बन जाती है. इसके अलावा मच्छरों को निष्क्रिय करने वाली कीटनाशक दवा का भी छिड़काव हो रहा है.

यह भी हो रहा है काम

दरअसल क्लेक्स मच्छर बारिश के और दूसरे नाले वाले गंदे पानी में हर साल मार्च अप्रैल में पनपते हैं. रिपोर्ट के अनुसार इस बार दिल्ली के नालों में एंटी लार्वल दवाओं के बैरल छोड़े जा रहे हैं. इससे लोगों पर असर नहीं होता है. रोकथाम के लिए नालों में छिड़काव करने के साथ वहां अन्य दवाएं भी डाली जा रही हैं.

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एक चुनौती है इस बार

दिल्ली के तीनों नगर निगम में करीब 3500 डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर यानी डीबीसी कर्मचारी तैनात किए जाते हैं जो संक्रमण से फैलने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए कार्यरत रहते हैं. लेकिन पिछले साल कोरोना संकट के कारण इन कर्मचारियों को दूसरे कार्यों में लगा दिया गया था. जिससे ये लोगों के घर नहीं जा सके थे. पहले ये एक दिन में 60 से 70 घरों में कूलर, पानी की टंकियों का मुआयना करते थे.
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