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जानिए मंगल ग्रह के लिए परीक्षण क्यों हो रहे हैं इस देश में

जानिए मंगल ग्रह के लिए परीक्षण क्यों हो रहे हैं इस देश में

मंगल ग्रह (Mars) पर खारे पानी (Brine) की मात्रा और मौजूदगी के पिछले आंकलन (Estimates) गलत थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

मंगल ग्रह (Mars) पर खारे पानी (Brine) की मात्रा और मौजूदगी के पिछले आंकलन (Estimates) गलत थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

साइप्रस (Cyprus) में दुनिया के विशेषज्ञ उन उपकरणों के परीक्षण के लिये जमा हुए हैं जो मंगल ग्रह (Mars) पर भेजे जाने हैं. इनका मंगल पर जाने पहले साइप्रस के ट्रूडो पर्वतों (Troodo Mountains) पर परीक्षण होगा.

    अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) और मंगल ग्रह (Mars) को लेकर किसी शोध (Research) का जब भी जिक्र होता है तो लोगों को अमेरिका (US) और रूस के अलावा यूरोप, जापान, चीन भारत, यूएई जैसे देशों की याद आती है. ये देश मंगल पर हो रहे शोधों के साथ किसी न किसी ऐसे अभियान की तैयारी कर रहे हैं जो मंगल से जुड़ा है, लेकिन लोगों को हैरान तब होती है जब यूरोप और अफ्रीका के बीच में भूमध्यसागर में साइप्रस (Cyprus) जैसे द्वीपीय देश का नाम इस तरह के शोध से जुड़ता है. दुनिया के वैज्ञानकों के लिए साइप्रस मंगल के अध्ययन से लिहाज से बहुत अहम है.

    विशेषज्ञ पहुंचे साइप्रस
    हाल ही में साइप्रस में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों और  साइप्रस केविशेषज्ञों की एक मीटिंग हुई जिसमें उन्होंने इस देश में एक अंतरिक्ष उपकरण के परीक्षण के लिये एक शोधकार्य पर चर्चा की. इस टीम में जीवाश्म विज्ञानी और भूगर्भशास्त्रीशामिल हैं जो साइप्रस के एक पर्वत पर कुछ उपकरणों को मंगल ग्रह पर भेजने से पहले जांचेंगे.

    किया जाएगा यह प्रयोग
    इन उपकरणों का उपयोग मंगल की चट्टानों की उम्र को मापने के लिए किया जाएगा. लेकिन उससे पहले शोधकर्ता साइप्रस के ट्रूडोस पर्वतों (Troodos Mountains) पर अपने उपकरणों का परीक्षण करेंगे क्योंकि इस पर्वत की भूगर्भीय विशेषताएं मंगल ग्रह की जमीन से काफी मिलती जुलती है. यही वजह है वैज्ञानिक अपने उपकरणों का परीक्षण मंगल से पहले ट्रूडोस पर्वत पर करना चाहते हैं.

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    साइप्रस (Cyprus) के ट्रूडो पर्वतों (Trooodo Mountains) में वैज्ञानिको को अपने उपकरणों का परिक्षण करना है. (तस्वीर: Pixabay)


    कहां होगा शोध
    यह प्रोजेक्ट पर यूरोपीय कमिशन की फंडिंग से चल रहा है. शुक्रवार को ही साइप्रस स्पेस एक्सप्लोरेशन ऑर्गनाइजेशन (CSEO) और भूगर्भीय सर्वेक्षण विभाग (GSD) के साथ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मीटिंग हुई है. जीएसडी का कहना है कि इस मीटिंग में इंटरनेशनल स्पेस प्रोग्राम के उद्देश्यों के साथ ही इस प्रोजेक्ट के लिये जरूरी आवश्यकताएं एवं उपयुक्त स्थान की चर्चा हुई थी.

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    अब तक नहीं नापी गई है चट्टानों की उम्र
    इस बयान में कहा गया कि चट्टानों का मापन करने वाला यह प्रोजेक्ट बहुत नया है क्योंकि अब से पहले के मंगल के अभियानों ने मंगल की चट्टानों की उम्र का मापन नहीं किया है. एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया गया कि ट्रूडोस पर्वतों की भूगर्भविज्ञान और मंगल की चट्टानों में काफी समानताएं हैं.

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    माना जाता है कि ट्रूडो पर्वतों (Trooodo Mountains) की चट्टानें मंगल ग्रह (Mars) की चट्टानों से मिलती जुलती हैं. (तस्वीर: Pixabay)


    साइप्रस के लिए कितना अहम
    CSEO मंगल ग्रह के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में हिस्सा ले रहा है. इसमें तीन यूरोपीय देशों के अलावा अमेरिका भी भागीदार है. CSEO के प्रमुख जॉर्ज डानोस ने कहा, “यह प्रोजोक्ट हमारे देश के भूगर्भविज्ञान को रेखांकित करता है. जिससे अंतरिक्ष के दूसरे अभियानों को तैयार करने में मदद मिलेगी. इस सहयोग से देशमें वैज्ञानिकों के लिए नई नौकरियां और अंतरराष्ट्रीय स्तर के नए शोधकार्यों में काम करने का मौका भी मिलेगा.

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    यूरोप और अफ्रीका के बीच होने के बाद भी साइप्रस यूरोपीय यूनियन का सदस्य है. यहां की जलवायु भूमध्यसागरीय है. पूरा इलाका पर्वतों से घिरा है जिसमं ट्रूडो पर्वत सबसे ज्यादा इलाका घेरते हैं. ये पर्वत यूरोप और अफ्रीका की टेक्टोनिक प्लेट्स के टकराने से बने थे.undefined

    Tags: Mars, Research, Science, Space

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