डार्क ऊर्जा- अस्तित्व तक सिद्ध नहीं हुआ है, फिर भी वैज्ञानिक मानते हैं इसे

ब्रह्माण्डीय त्वरण (Cosmic Acceleration) का सीधा संबंध डार्क ऊर्जा (Dark Energh) से बताया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ब्रह्माण्डीय त्वरण (Cosmic Acceleration) का सीधा संबंध डार्क ऊर्जा (Dark Energh) से बताया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

हमारे ब्रह्माण्ड (Universe) के विस्तार होने की गति तेजी से बढ़ रही है जिसे ब्रह्माण्डीय त्वरण (Cosmic Acceleration) कहा गया है, लेकिन उसका डार्क ऊर्जा (Dark Energy) से संबंध चौंकाने वाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2021, 8:01 PM IST
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पिछले कुछ समय से अंतरिक्ष विज्ञान में डार्कमैटर (Dark Matter) और डार्क एनर्जी (Dark Energy) का जिक्र बढ़ने लगा है. अभी तक दोनों के अस्तित्व तक को प्रत्यक्ष तरीके से प्रमाणित नहीं किया जा सका. फिर सैद्धांतिक रूप से इनकी मौजूदगी तो है ही वर्तमान में  ब्रह्माण्ड (Universe) की कुछ अहम प्रत्यक्ष गतिविधियों में इनका दखल माना जा रहा है. ऐसी ही एक चर्चित प्रक्रिया है ब्रह्माण्ड का विस्तार (Expansion of Universe). बताया जा रहा है कि इसी से संबंधित एक प्रक्रिया है ब्रह्माण्डीय त्वरण या कॉस्मिक एक्सीलरेशन (Cosmic Acceleration) जिसके लिए डार्क एनर्जी जिम्मेदार है.

ब्रह्माण्ड का विस्तार और गति
ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है. बहुत कम लोग जानते हैं इसके विस्तार की दर तक तेजी से बढ़ रही है. वैज्ञानिक इस तेजी को ही ब्रह्माण्डीय त्वरण कह रहे हैं. यह वृद्धि ब्रह्माण्ड के दो बिंदुओं के बीच की दूरी को लगातार खिंचती हुई एक रबर की चादर की तरह बढ़ा रही है. इतना ही नहीं ब्रह्माण्ड में ब्रह्माण्डीय त्वरण के दो अलग अलग दौर देखे गए हैं.

दो अलग–अलग दौर
ब्रह्माण्डीय त्वरण का पहला दौर बिगबैंग की घटना के फौरन बाद हुआ था. इसे इनफ्लेशन कहा जाता है. वहीं दूसरे दौर की शुरुआत बिगबैंग के 9 अरब साल बाद हुआ था और यह अब तक जारी है. वैज्ञानिकों ने तेजी से बढ़ते फैलाव की खोज 1998 में सुदूर फूटते तारों यानि सुपरनोवा के जरिए की थी. ब्रह्माण्डीय त्वरण की यह खोज करने वाले वैज्ञानिकों को साल 2011 में नोबेल पुरस्कार भी मिला था.



ब्रह्माण्डीय त्वरण से ही निकली डार्क एनर्जी की अवधारणा
डार्क एनर्जी या डार्क ऊर्जा एक अज्ञात ऊर्जा है जो ब्रह्माण्ड को बड़े पैमाने पर प्रभावित करती है. पहली बार इस ऊर्जा की अवधारणा ब्रह्माण्डीय त्वरण की खोज के बाद ही आई. जिससे पता चला कि ब्रह्माण्ड का विस्तार एक स्थिर दर से नहीं हो हो रहा है. इससे पहले समान्य पदार्थ, एंटीमैटर, डार्क मैटर और विकिरण की अवधारणा आ चुकी थी.

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डार्क ऊर्जा (Dark Energy) के बारे में कहा जाता है कि उसका प्रभाव गुरुत्व (Gravity) से कहीं ज्यादा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


पैदा हुए ये सवाल
इस खोज ने एक नया सवाल पैदा कर दिया जिसका जवाब आज भी वैज्ञानिकगण खोज रहे है. वह डार्क एनर्जी क्या है जो गुरुत्व के प्रभाव पर भी हावी हो जाती है और जो हमारे ब्रह्माण्ड को अलग करती हुई खींच रही है. क्या वाकई डार्क एनर्जी जैसी की ऊर्जा ब्रह्माण्ड का अंग है या यह की नए अज्ञात कणों या बल से संबंधित कोई चीज है. इससे यह भी इशारा मिलता है कि आइंस्टीन का सापेक्षता का सामान्य सिद्धांत गुरुत्व की पूरी तरह से व्याख्या नहीं करता है.

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कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टेंट से संबंध?
वैज्ञानिक यह पता करने में लगे हैं कि क्या डार्क ऊर्जा का कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टेंट से कोई संगति या संबंध है. कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टेंट अल्बर्ट आइंस्टीन का दिया शब्द जो उनके समीकरणों में गुरुत्व को संतुलित करता है. वहीं डार्क ऊर्जा शायद स्थिरांक ना हो, बल्कि ऐसी चीज हो जो ब्रह्माण्ड के इतिहास में बदलती रही हो.

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ब्रह्माण्ड (Universe) की संरचना में 70 प्रतिशत योगदान डार्क ऊर्जा (Dark Energy) का माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


कितनी डार्क ऊर्जा है ब्रह्माण्ड में
ब्रह्माण्ड की कई तरह से व्याख्या की गई है. इनमे से एक मॉडल लैम्ब्डा सीएमडी है जिसके मुताबिक ब्रह्माण्ड की 70 प्रतिशत भार-ऊर्जा डार्क ऊर्जा है और डार्क मैटर केवल 25 प्रतिशत है तो सामान्य पदार्थ केवल 5 प्रतिशत है. इतना ही नहीं डार्क ऊर्जा पर कई और मॉडल भी बने हैं जो उसकी व्याख्या करने का प्रयास करते हैं. इनमें से कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टेंट भी है.

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डार्क ऊर्जा के अध्ययन के लिए डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी उन शोधकर्ताओं का सहयोग करता है जो जो ब्रह्माण्डीय त्वरण और डार्क ऊर्जा पर शोध करते हैं. इसके अलावा वैज्ञानिक विशाल टेलिस्कोप की भी मदद ले रहे हैं. इनमें नासा का WFIRST स्पेस टेलीस्कोप और चिली का इंटरनेशनल डार्क एनर्जी सर्वे के टेलीस्कोप डार्क ऊर्जा के लिए ही काम कर रहे
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