यूरोप के एक बेहद खूबसूरत शहर का खौफनाक सच, बसा हुआ है 60 लाख लाशों के ढेर पर

यूरोप के एक बेहद खूबसूरत शहर का खौफनाक सच, बसा हुआ है 60 लाख लाशों के ढेर पर
पेरिस में एक ऐसी जगह हैं, जहां 60 लाख से भी ज्यादा लोगों की खोपड़ियां और हड्डियां रखी हुई हैं

फ्रांस के पेरिस (Paris) में कब्रों का तहखाना (tunnel of dead bodies) है, जहां आए-दिन खौफनाक वाकये होते रहते हैं. 

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दुनिया में कितनी ही ऐसी जगहें हैं, जो इतनी रहस्यमयी हैं कि इंसानों का आना-जाना तो दूर, सोचना भी मना है. ऐसी ही एक जगह पेरिस में भी हैं. जी हां, फैशन की नगरी पेरिस में एक ऐसी जगह हैं, जहां 60 लाख से भी ज्यादा लोगों की खोपड़ियां और हड्डियां रखी हुई हैं. इस बेहद डरावनी जगह को कैटकॉम्ब्स ऑफ पेरिस (Catacombs of Paris) के नाम से जाना जाता है. यहां जमीन से 20 मीटर की गहराई में एक तहखाना है, जिसमें लाखों मुर्दों की खोपड़ियां जमा हैं.

17वीं सदी में पेरिस में आबादी तेजी से बढ़ने लगी, साथ में मौतें भी बढ़ीं. कब्रिस्तानों की कमी की वजह से बहुत सी लाशें सड़ने लगीं. खराब होती लाशों से बीमारियां फैलने का डर था. तब उस दौर में शहर के सबसे बड़े कब्रिस्तान Saint Innocents-cemetery में भी कब्रों की संख्या ओवरफ्लो कर गई थी. ये देखते हुए परेशान अफसर कब्रिस्तानों को खाली करने का कोई तरीका सोचने लगे ताकि नई मौतों में अंतिम संस्कार किया जा सके. इस बीच Saint Innocents-cemetery की एक बड़ी दीवार गिर गई. इसपर आनन-फानन में फ्रेंच अफसरों ने एक तरीका सोचा. शहर के एक हिस्से पर जमीन की गहरी और लंबी-चौड़ी खुदाई कर कब्रगाह बनाई गई. इसके बाद पुराने क्रबिस्तानों से सारी लाशें निकाली गईं. उन्हें ढोकर उस जगह पहुंचाया गया, जहां तहखाना तैयार हो चुका था, और फिर उन अधगली लाशों को तहखाने में एक साथ दफना दिया गया. ये एक तरह की सुरंग के रूप में था.

लाशों को ढोने और निश्चित जगह तक पहुंचाने की मुहिम साल 1780 से 1814 तक चली




लाशों को ढोने और निश्चित जगह तक पहुंचाने की मुहिम साल 1780 से 1814 तक चली. एक तरफ लाखों लाश तहखाने में डाल दी गईं, वहीं बहुत सी लाशों को मेहराबदार कब्रों समेत तहखाने में रख दिया गया. माना जाता है कि ये सुरंगनुमा तहखाना लगभग 320 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है. इसके काफी बड़े हिस्से में क्या है, ये किसी को नहीं पता.
रहस्यों की दुनिया में जाने की चाह में पेरिस के कई स्थानीय तैराक अपने पूल से तैरते हुए सुरंग तक जाने की भी कोशिश करते रहते हैं. कब्रों का यह तहखाना भले ही डरावना हो, लेकिन इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. पहली बार इस तहखाने को साल 1874 में लोगों के लिए खोला गया था. तब से लेकर अब तक करोड़ों लोग यहां आ चुके हैं. हालांकि यहां जाने से पहले लोगों को हिदायत दी जाती है कि अगर वे किसी खास गंध, संकरी जगह या हड्डियों को देखने से डरते हैं तो यहां न जाएं. कई बार ऐसे भी वाकये हुए हैं कि कुछ एडवेंचर पसंद करने वाले युवा भीतर प्रवेश निषेध वाले हिस्से में चले जाते हैं और फिर वापस नहीं लौट पाते.

सुरंगनुमा तहखाने में लगातार अजीबोगरीब वाकये होते रहते हैं


सुरंगनुमा तहखाने में अजीबोगरीब वाकये होते रहते हैं. साल 2004 में पुलिस सुरंग के खाली हिस्से में किसी ट्रेनिंग के लिए पहुंची. सैकड़ों किलोमीटरों के दायरे में आगे बढ़ने पर पुलिसवालों को अंदर ही एक सिनेमाहॉल, एक रेस्त्रां और बार मिला. यहां फोन और पावर लाइन्स भी थीं. एक सीक्रेट कैमरा पुलिसवालों को देख रहा था. जब आसपास के हिस्से की पड़ताल की कोशिश की गई तो उन्हें एक नोट मिला- हमें खोजने की कोशिश मत करना. पुलिसवालों को तुरंत वहां से बाहर निकलना पड़ा.

पेरिस में बीते दिनों एक नया ट्रेंड देखा गया. खोज में दिलचस्पी रखने वाले कुछ लोग कैटकॉम्ब्स ऑफ पेरिस में भीतर जाते हैं. वहां वक्त बिताते हैं और बाहर आ जाते हैं. ये लाशों के ढेर से दूर रहते हैं और जाने से पहले मैप तैयार करते हैं ताकि मुर्दों के बीच खो न जाएं. पेरिस में हालांकि ऐसे बहुत ही कम लोग हैं, जिनके पास नीचे पहुंचने और वहां से लौटने की जानकारी है. ये लोग cataphiles कहलाते हैं और बहुत छोटे से समुदाय में रहते हैं. बाहरी लोगों को ये अपने समूह में और एडवेंचर में शामिल नहीं करते हैं.

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