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पुण्यतिथि निर्मलजीत सिंह सेखों : वो बहादुर सैनिक जिसने अकेले उड़ाए पाकिस्तान के तीन लड़ाकू जेट

निर्मलजीत सिंह सेखों की बहादुरी .को सलाम करते हुए  भारत सरकार ने उन पर एक डाक टिकट भी निकाला

निर्मलजीत सिंह सेखों की बहादुरी .को सलाम करते हुए भारत सरकार ने उन पर एक डाक टिकट भी निकाला

वर्ष 1971 में फ्लाइंग अफसर निर्मलजीत सिंह सेखों (Nirmaljit Singh Sekhon ) की बहादुरी के किस्से आज भी विख्यात हैं. आज उनकी पुण्यतिथि है. आज ही के दिन उन्होंने अकेले पाकिस्तान (Pakistan) के कई लड़ाकू विमानों ( combat jets) से मोर्चा लिया और उसके तीन लड़ाकू विमानों को गिरा दिया. हालांकि इसी भिड़ंत में वो खुद शहीद हो गए.

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    आज 14 दिसंबर को देश के वीर सैनिक की पुण्यतिथि है, जिसकी बहादुरी के किस्से आज भी फेमस हैं. 1971 की लड़ाई में वो अकेले अपने फाइटर प्लेन के साथ पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमानों से भिड़ गए. खुद शहीद तो हो गए लेकिन दुश्मन का बहुत नुकसान किया. ना केवल पाकिस्तान के 03 सोंबर फाइटर जेट मार गिराए बल्कि श्रीनगर पर पाकिस्तान के एक बड़े हमले को भी टाल दिया.

    फ़्लाइंग अफसर निर्मलजीत सिंह सेखों परमवीर चक्र से सम्मानित वायु सैनिक थे. उन्हें ये सम्मान सन 1971 में मरणोपरांत मिला था. सेखों ने 1971 में पाकिस्तान के विरुद्ध लड़ते हुए उस युद्ध में वीरगति पाई, जिसमें भारत विजयी हुआ. इसी लड़ाई के बाद पाकिस्तान से टूट कर उसका एक पूर्वी हिस्सा, बांग्लादेश के नाम से आजाद देश बन गया.

    06 पाकिस्तान सैबर जेट विमानों ने हमला किया
    तब निर्मलजीत सिंह श्रीनगर वायु सेना के हवाई अड्डे पर मुस्तैदी से तैनात थे. वो फाइटर जेट पर अपने करिश्मे के लिए उस्ताद माने जाते थे. 14 दिसम्बर 1971 को श्रीनगर एयरफील्ड पर पाकिस्तान के छह सैबर जेट विमानों ने हमला किया. सुरक्षा टुकड़ी की कमान संभालते हुए फ़्लाइंग ऑफ़िसर निर्मलजीत सिंह वहां 18 नेट स्क्वाड्रन के साथ तैनात थे.

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    एयरफील्ड पर धुंध छाई हुई थी
    दुश्मन F-86 सेबर जेट विमानों के साथ आया. उस समय निर्मलजीत के साथ फ्लाइंग लेफ्टिनेंट घुम्मन भी कमर कस कर मौजूद थे. एयरफील्ड पर सबेरे काफ़ी धुंध थी. सुबह 8 बजकर 2 मिनट पर चेतावनी मिली कि दुश्मन आक्रमण पर है. निर्मलसिंह तथा घुम्मन ने तुरंत उड़ जाने का संकेत दिया.

    02 मिनट में वो अपने विमान के साथ आसमान में थे
    ठीक 8 बजकर 4 मिनट पर दोनों वायु सेना अधिकारी दुश्मन का सामना करने के लिए आसमान में थे. उस समय दुश्मन का पहला F-86 सेबर जेट एयर फील्ड पर गोता लगाने की तैयारी कर रहा था. एयर फील्ड से पहले घुम्मन के जहाज ने रन वे छोड़ा था. उसके बाद जैसे ही निर्मलजीत सिंह का नेट उड़ा. रन वे पर उनके ठीक पीछे एक बम आकर गिरा.

    एयरफील्ड धुएं और धुएं से भरा हुआ था
    घुम्मन उस समय खुद एक सेबर जेट का पीछा कर रहे थे. सेखों ने हवा में आकार दो सेबर जेट विमानों का सामना किया, इनमें से एक जहाज वही था, जिसने एयरफिल्ट पर बम गिराया था. बम गिरने के बाद एयर फील्ड से कॉम्बैट एयर पेट्रोल का संपर्क सेखों तथा घुम्मन से टूट गया था. सारी एयरफील्ड धुएं और धूल से भर गई, जो उस बम विस्फोट का परिणाम थी.दूर तक देख पाना कठिन था.

    श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन पर बाद में फ्लाइंग अफसर निर्मलजीत सिंह सेखों की प्रतिमा लगाई गई.


    दुश्मन का  पहला सैबर जेट आग में जलता हुआ गिरा
    तभी फ्लाइट कमाण्डर स्क्वाड्रन लीडर पठानिया को नजर आया कि कोई दो हवाई जहाज मुठभेड़ की तैयारी में हैं. तभी रेडियो संचार व्यवस्था से निर्मलजीत सिंह की आवाज़ सुनाई पड़ी-
    'मैं दो सेबर जेट जहाजों के पीछे हूँ...मैं उन्हें जाने नहीं दूँगा...'
    उसके कुछ ही क्षण बाद नेट से आक्रमण की आवाज़ आसमान में गूंजी. एक सैबर जेट आग में जलता हुआ गिरता नजर आया. तभी निर्मलजीत सिंह सेखों ने अपना संदेश प्रसारित किया:
    'मैं मुकाबले पर हूं. मुझे मजा आ रहा है. मेरे इर्द-गिर्द दुश्मन के दो सेबर जेट हैं. मैं एक का ही पीछा कर रहा हूँ, दूसरा मेरे साथ-साथ चल रहा है.'

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    फिर उन्होंने दुश्मन के दो और विमान मार गिराए
    इसके जवाब में स्क्वेड्रन लीडर पठानिया ने सेखों को कुछ सुरक्षा संबंधी हिदायत दी, जिसे उन्होंने पहले ही पूरा कर लिया. नेट से एक और धमाका हुआ, जिसके साथ दुश्मन के सेबर जेट के ध्वस्त होने की आवाज़ आई. अभी निर्मलजीत सिंह को कुछ और भी करना बाकी था. उनका निशाना फिर लगा. एक बड़े धमाके के साथ तीसरा सेबर जेट भी ढेर हो गया. कुछ देर की शांति के बाद फ्लाइंग ऑफिसर सेखों का संदेश फिर सुना गया.

    'शायद मेरा नेट भी निशाने पर आ गया है... घुम्मन, अब तुम मोर्चा संभालो.'

    कुछ दिनों पहले ही हुई थी शादी
    ये निर्मलजीत सिंह का अंतिम संदेश था. अपना काम पूरा करके वह वीरगति को प्राप्त हो गए. फ़्लाइंग ऑफ़िसर निर्मलजीत सिंह सेखों का जन्म 17 जुलाई 1947 को पंजाब के लुधियाना जिले के रूरका गांव में हुआ था. कुछ ही महीने पहले उनका विवाह हुआ था.

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