पुण्यतिथि : टैगोर जिन्होंने भारत ही नहीं बल्कि दो और देशों को भी राष्ट्रगान दिए

पुण्यतिथि : टैगोर जिन्होंने भारत ही नहीं बल्कि दो और देशों को भी राष्ट्रगान दिए
गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर (फाइल फोटो)

गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ( Gurudev Rabindra Nath Tagore) की आज यानि 07 अगस्त को पुण्यतिथि है. भारत (India) और बांग्लादेश (Bangladesh) का राष्ट्रगान तो उन्हीं की कविता पर आधारित है, वहीं श्रीलंका (Sri Lanka) का एंथेम भी उनकी कविताओं और रविंद्र संगीत से प्रभावित. जानिए कैसे

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 7, 2020, 10:20 AM IST
  • Share this:
रवींद्रनाथ टैगोर की आज पुण्यतिथि है. 07 अगस्त 1941 को कोलकाता में उनका निधन हो गया. हमारे देश का राष्ट्रगान तो उनका लिखा है ही साथ ही बांग्लादेश का एंथेम भी उन्हीं का लिखा है. साथ ही श्रीलंका के राष्ट्रगान के सुरों में उनका असर है. वो शायद पहले ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने ये खास उपलब्धि हासिल की हुई है.

टैगोर के राष्ट्रवाद संबंधी विचारों की तो आज भी धाक है. कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, निबंधकार, नाटककार और चित्रकार सभी रहे रवींद्रनाथ टैगोर वाकई अपनी प्रतिभा में बेजोड़ थे. उनका व्यक्तित्व ऐसा भव्य और आकर्षक कि किसी को भी आकर्षित कर ले.

लंदन से कानूनी पढ़ाई की लेकिन डिग्री नहीं ली
रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म कलकत्ता के जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी में हुआ था. उनके पिता देवेंद्रनाथ टैगोर एक जाने-माने समाज-सुधारक थे. टैगोर की पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल से हुई थी. लंदन में उन्होंने कानून की पढ़ाई की पर बिना डिग्री लिए ही वापस चले आये.
एक छोटे तारे से निकलीं superflares, जानिए खगोलविद क्यों कह रहे हैं इन्हें खास



बचपन से ही लिखने लगे थे कविताएं
रवींद्रनाथ टैगोर को 'गुरुदेव' भी कहा जाता है. बचपन में ही उनका रुझान कविता और कहानी लिखने की ओर हो चुका था. उन्होंने अपनी पहली कविता 8 साल की उम्र में लिखी थी. 1877 में वह 16 साल के थे जब उनकी पहली लघुकथा प्रकाशित हुई थी. गुरुदेव को उनकी सबसे लोकप्रिय रचना गीतांजलि के लिए 1913 में नोबेल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.



टैगोर को 'नाइटहुड' की उपाधि भी मिली हुई थी. जिसे टैगोर ने जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) के बाद अपनी लौटा दिया था. 1921 में उन्होंने 'शांति निकेतन' की नींव रखी थी. जिसे 'विश्व भारती' यूनिवर्सिटी के नाम से भी जाना जाता है. टैगोर को बाद में गीतांजलि काव्य संकलन के लिए नोबल पुरस्कार हासिल हुआ.

यह भी पढ़ें: जिन्ना-नेहरू नहीं एक व्यापारी की वजह से हुआ था भारत-पाकिस्तान विभाजन!

तीन देशों के राष्ट्रगान से जुड़ता है नाम
टैगोर की रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बनीं. भारत का 'जन गण मन' और बांग्लादेश का 'आमार सोनार बांग्ला' उन्हीं की रचनाएं हैं. वहीं श्रीलंका का राष्ट्रगीत 'श्रीलंका मथा' भी टैगोर की कविताओं की प्रेरणा से बना है. इसे लिखने वाले आनंद समरकून शांतिनिकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर के पास रहे थे और उन्होंने कहा था कि वे टैगोर स्कूल ऑफ पोएट्री से बेहद प्रभावित थे.

दुखद यह है कि कुछ साल पहले टैगोर की रचनाओं को बांग्लादेश की स्कूली किताबों से हटाने की बात सामने आई थी. दो साल पहले वहां की सरकार ने स्कूल सिलेबस में बदलाव किया था. कक्षा 6 की किताब से टैगोर की कविता ‘बांग्लादेशर हृदोय’ को हटा दिया गया था जिसमें टैगोर ने अपनी मातृभूमि की खूबसूरती का जिक्र किया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज