पुण्यतिथि : दुनिया का वो सबसे धनी भारतीय, जो अकूत हीरे-सोने में खेला पर ये लत थी गंदी

हैदराबाद के सातवें निजाम मीर उस्मान अली की जब ताजपोशी हुई तो वो महज 25 साल के थे.

हैदराबाद के सातवें निजाम मीर उस्मान अली की जब ताजपोशी हुई तो वो महज 25 साल के थे.

हैदराबाद के आखिरी निजाम मीर उस्मान अली खान की आज पुण्यतिथि है. 80 साल की उम्र में 1967 में हैदराबाद में उनका निधन हुआ. जब उनका जनाजा निकला तो हैदराबाद की सड़कें लोगों से पट गईं. वो दुनिया के सबसे दौलतमंद शख्स भी माने गए. आज भी उनके वैभव के किस्से कहे जाते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 1:07 PM IST
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हैदराबाद के आखिरी निजाम मीर उस्मान अली खान दुनिया के सबसे धनी शख्स बने थे. तब टाइम मैगजीन ने कवर पर उनकी फोटो छापी. माना जाता है कि उस समय उनके पास जो बेहिसाब संपत्ति थी, वो आज भी दुनिया के किसी धनी के पास नहीं है. लंबी बीमारी के बाद निजाम का निधन 24 फरवरी 1967 को हैदराबाद के उस किंग कोठी पैलेस में हुआ, जहां वो जिंदगी भर रहे.

उस्मान अली कई मामलों में बहुत अनोखे थे. अपने पिता की तरह उन्हें भी नए कपड़े पहनने या लग्जरी लाइफ जीने का कोई शौक नहीं था. वो कविताएं लिखते थे. उर्दू गजलें लिखते थे. उन्हें दुनिया का सबसे दौलतमंद शख्स होने के बावजूद बहुत कंजूस कहा जाता था.

वो रोज महल में अपनी मां से मिलने जाते थे, जब मां का इंतकाल हो गया तो वो रोज नियम से उनकी कब्र पर जाकर फूल चढ़ाते थे. निजाम के पास नौकर-चाकरों की फौज थी. निजाम की कुछ आदतें बहुत अजीबोगरीब थी. इसमें एक लत थी पोर्नोग्राफी का आनंद लेने की. कहा जाता है कि उनके पास पोर्न पिक्चर्स का शायद दुनिया का सबसे बड़ा संकलन भी रहा होगा.

मेहमानों के कमरे में छिपे कैमरे लगा देते थे
भारत में राजे रजवाड़ों के पास अकूत संपत्ति रही है. नवाबों की बेहिसाब दौलत की कहानियां अब भी सुनी जाती हैं.वो ऐश्वर्यभरी जिंदगी जीते थे. विदेशों में घूमते थे. कई बेगमें रखते थे. इसमें सबसे ज्यादा ठाट-बाट और धनदौलत हैदराबाद के निजाम के पास थी. दीवान जरमनी दास ने अपनी किताब "महाराजा" में लिखा, "निजाम उस्मान अली दुनिया का सबसे धनी शख्स भी रहे उन्हें मेहमानों के कमरे में कैमरे छिपाकर उनकी सेक्स लाइफ देखने का भी अजीब शौक था."

भारत में किसी हालत में विलय नहीं चाहते थे

निजाम आखिरी समय तक कोशिश की कि उसकी लंबी-चौड़ी रियासत का विलय किसी भी हालत में भारत में ना हो. पाकिस्तान से उन्होंने खासतौर पर पींगे बढ़ाईं. भारत की आजादी के बाद कई देशों में अपने दूतावास खोल लिए. उनका इरादा बड़े पैमाने पर हथियारों को मंगाने का भी था.



भारी हीरे को पेपरवेट बनाकर रखा था

निजाम अपनी दौलत का भरपूर प्रदर्शन करते थे. उन्होंने 04 अरब के एक नायाब हीरे को अपनी टेबल पर पेपरवेट बनाकर रखा हुआ था. मिलने वालों पर जब हीरे को पेपरवेट के रूप में देखते तो हैरान रह जाते थे. ये 185 कैरेट का नीले रंग का हीरा था.

हैदराबाद निजाम की बेहिसाब संपत्ति

हैदराबाद के निजाम के पास बेहिसाब संपत्ति हुआ करती थी. रियासत के खत्म होने के बाद अब भी उनके वंशजों के पास अकूत धन दौलत और प्रॉपर्टी है. हैदराबाद के निजाम मीर साहब को एक जमाने में "टाइम मैगजीन" ने दुनिया के सबसे दौलतमंद लोगों की सूची में पहला स्थान दिया था. इस वर्ल्ड मैगजीन के कवर पर उनकी तस्वीर आई थी. 80 और 90 के दशक तक निजाम दुनिया के 10 सबसे दौलतमंद लोगों में शुमार होते थे.

22 फरवरी 1937 में टाइम मैगजीन के कवर पर निजाम की तस्वीर आई और अंदर कवर स्टोरी. तब उन्हें दुनिया का सबसे दौलतमंद शख्स माना गया था.


30 के दशक में बेहिसाब संपत्ति

आजादी से पहले 1930 से लेकर 1940 तक उनके पास सबसे ज्यादा संपत्ति थी. 130 अरब की दौलत के साथ वो दुनिया के सबसे अमीर शख्स थे. उनका कद 05 फुट 03 इंच था चैन स्मोकर थे. उन्हें सर मीर उस्मान अली खान कहा जाता था. वो वाकई विलक्षण शख्सियत वाले व्यक्ति थे.

उन्हें हमेशा ये डर लगा रहता था

हालांकि नवाब को हमेशा ये डर लगा रहता था कि उनकी रियासत में क्रांति हो जाएगी. तख्तापलट के जरिए उन्हें हटा दिया जाएगा. उन्होंने हैदराबाद एक से बढ़कर एक पैलेस बनवाए. वो महल में खासतौर पर अलग अलग जगहों पर खजाने को संभालकर रखते थे.

क्या क्या अमूल्य चीजें थीं खजाने में  

उनके खजाने में बेशकीमती हीरे, जवाहरात, सोने की ईंट बहुमूल्य पत्थर, अशर्फियां और मूल्यवान सामान थे. कहा जाता है कि अगर उनके महल के तहखानों और गुप्त स्थानों से सभी बेशकीमती सामानों और सोना-चांदी-हीरा और जवाहरातों को ट्रक पर लादा जाता तो ये कई ट्रकों में लद पाता.

ये है वो नायाब हीरा, जिसे निजाम पेपरवेट की तरह इस्तेमाल करता था


3000 अफ्रीकी बॉडीगार्ड्स करते थे प्राइवेट सुरक्षा

इस नवाब ने 3000 उत्तरी अफ्रीकी बॉडीगार्ड्स की अपनी प्राइवेट सुरक्षा की पलटन बना रखी थी. निजाम के अपने महल में 38 लोगों का स्टाफ केवल इसलिए रखा गया था कि वो झाड़-फानूस की सफाई करे. 28 लोगों का स्टाफ ऐसा था, जो केवल पानी पिलाने के लिए था. कई लोग केवल नवाब के पसंदीदा अखरोट को तोड़ने का काम करते थे.

अपनी डिस्टलरी में बनी व्हिस्की पीते थे

हैदराबाद रियासत का क्षेत्रफल इटली के बराबर था. निजाम के पास रो्ल्स रॉयस कारों का बीड़ा था. वो केवल अपनी डिस्टिलरी की ही व्हिस्की पिता था. एक जॉज बैंड केवल इसलिए रखा गया था कि वो उसको उसकी पसंद का गाना सुनाता रहे.

04 अरब का तो केवल सोना-चांदी

कहा जाता है कि एक जमाने में उसके पास 100 मिलियन पाउंड की संपत्ति तो केवल सोना और चांदी में थी. 400 मिलियन पाउंड के जवाहरात थे. जिसकी कीमत आज के लिहाज से 50 बिलियन पाउंड (04 अरब से ज्यादा) बैठेगी.

भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ निजाम उस्मान अली


जिन्ना से गुप्त पैक्ट भी किया था निजाम ने

निजाम ने हैदराबाद पर 1911 से लेकर 1948 में तब तक राज किया, जब तक कि भारतीय सेनाओं के आपरेशन के बाद इस रियासत का विलय भारत में नहीं हो गया. निजाम ने तब जो संपत्ति पाकिस्तान को देने के लिए लंदन के नेटवेस्ट बैंक में ट्रांसफर की थी. उसका मुकदमा अब तक लंदन में चला था. जिसमें बाद में भारत सरकार और निजाम के वंशजों की जीत हुई.

निजाम अपने राज्य को आजाद रखना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने जिन्ना से कोई गुप्त पैक्ट भी किया था. जिन्ना ने उन्हें भरोसा दिया था कि अगर कभी भारतीय फौजों ने हैदराबाद पर आक्रमण किया तो वो उनकी मदद करेंगे. हालांकि ऐसा हो नहीं पाया.

टिन के प्लेट में खाना खाते थे, उधार की सिगरेट पीते थे

हालांकि इतनी अकूत दौलत के बाद भी निजाम बहुत कंजूसी के साथ जिंदगी गुजारते थे. वो टिन की प्लेट में खाना खाते थे. कागज के रोल करके खुद अपनी सिगरेट बनाते थे. उनका बिस्तर भी सादगी भरा था. अगर कभी निजाम के यहां कोई पार्टी होती थी, वो उस पार्टी में आने के लिए वो लोगों से पैसा लेता था और पार्टी में आए हुए लोगों से सिगरेट मांगकर पीता था.

पोर्नो तस्वीरें देखने का शौकीन 

निजाम के बारे में कहा जाता है कि उसे पोर्नोग्राफिक तस्वीरें देखने का बहुत शौक था, उसने अपने महल और मेहमानों के कमरों में छिपे हुए कैमरे लगा रखा था, जिससे वो सेक्स को देखने का काम करता था. निजाम के पास पोर्नो पिक्चर्स का बहुत बड़ा कलेक्शन था. नवाब ने कई शादियां कीं. उसकी 86 रखैंलें थीं, जिससे उन्हें 100 से ज्यादा बेटे हुए.

भारत की आजादी की गाथा लिखने वाले डोमिनीक लापिएर और लैरी कॉलिन्स अपनी किताब "फ्रीडम ऐट मिडनाइट" में लिखते हैं, "हैदराबाद के निज़ाम को फ़ोटोग्राफ़ी का और अश्लील चित्रों का बहुत शौक था. अपने ये दोनों शौक़ एक में मिलाकर उन्होंने हिन्दुस्तान में अश्लील चित्रों का सबसे बड़ा संग्रह जमा कर लिया था."

किताब में लेखक लिखते हैं, "इन तस्‍वीरों को जमा करने के लिए बूढ़े नवाब ने अपने मेहमानखाने की दीवारों और छतों में खुफिया कैमरे लगवा रखे थे जो उन कमरों में होने वाली एक-एक हरकत की तस्वीरें खींचते रहते थे.

पाखाने में भी बड़ी बड़ी हस्तियों की फोटो खींचने के लिए कैमरे

महल के मेहमानखाने के बाथरूम के आइने के पीछे भी उन्होंने एक कैमरा लगवा रखा था. यह कैमरा हिन्दुस्तान की बड़ी-से-बड़ी हस्तियों की तस्वीरें निजाम के पाखाने में निवृत्त होने की मुद्रा में लेता रहता था.

डेली मेल के अनुसार निजाम जब 1934 में ब्रिटेन गया, तो अपने जहाज से गया, जिसमें उसके हरम की सीनियर बेगमें भी थीं और साथ में ऊंची सामाजिक हैसियत वाली 300 औरतें.
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