पुण्यतिथि: वो महर्षि जिनका दुनिया में था बड़ा योग साम्राज्य, भारत में खड़ी की चुनावी पार्टी

महर्षि महेश योगी ऋषिकेश के अपने आश्रम में बीटल्स को दीक्षित करते हुए

महर्षि महेश योगी ऋषिकेश के अपने आश्रम में बीटल्स को दीक्षित करते हुए

60 और 70 के दशक में महर्षि महेश योगी दुनियाभर में पहचान बना चुके थे. पहले उन्होंने अपना हेडक्वार्टर स्विट्जरलैंड में बनाया और फिर हालैेंड में. अब अमेरिका की वैदिक सिटी से उनकी संस्था ग्लोबल गतिविधियां संचालित करती है. उनका निधन वर्ष 2008 में हुआ. उन्हें दुनिया का सबसे धनी आध्यात्मिक गुरु भी कहा गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 1:30 PM IST
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ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन की शुरुआत करने वाले महर्षि महेश योगी की आज यानि 05 फरवरी को पुण्यतिथि है. साल 2008 में नीदरलैंड स्थित अपने आवास पर महर्षि महेश योगी का निधन हुआ था. उस वक्त वह 91 साल के थे. महर्षि महेश योगी को योग और ध्यान को दुनियाभर में फैलान का श्रेय जाता है.

महर्षि महेश योगी का जन्म 12 जनवरी 1918 को छत्तीसगढ़ के राजिम शहर के पास पांडुका गांव में हुआ था. उनका मूल नाम महेश प्रसाद वर्मा था. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक की डिग्री ली. महर्षि योगी ने 13 साल तक ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती के सान्निध्‍य में शिक्षा ग्रहण की. स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने ही उन्हें बाल ब्रह्मचारी की उपाधि देकर उन्हें महर्षि महेश योगी का नाम दे दिया.

लाखों अनुयायी दुनियाभर में बनाए

महर्षि महेश योगी ने ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन के जरिए दुनियाभर में अपने लाखों अनुयायी बनाए थे. उन्होंने योग और ध्यान से बेहतर स्वास्थ्य और आध्यात्मिक ज्ञान का वायदा किया और पूरी दुनिया से कई मशहूर लोग उनसे जुड़ गए. वह 60 के दशक में मशहूर रॉक बैंड बीटल्स के सदस्यों के आध्यात्मिक गुरु बने. बैंड के सदस्य उनके साथ वीकेंड बिताया करते थे. हालांकि बाद में बीटल्‍स उनसे अलग हो गए थे.
उड़ने वाला योगा सिखाने का दावा

महर्षि महेश योगी कहते थे कि वे अपने भक्तों को उड़ना सिखाते हैं. उनके द्वारा शुरू किए गए ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन में भक्त फुदकते हुए उड़ने की कोशिश करते थे. 'फ्लाइंग योगा' को महर्षि ने 'ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन सिद्धि प्रोग्राम' का नाम दिया था. उनका कहना था कि यह थिअरी रिसर्च के बाद विकसित की गई है. हालांकि बाद में कई लोगों ने आरोप लगाया था कि महर्षि ने उड़ने के दावे से मूर्ख बनाया.

(फाइल फोटो)




महेश योगी ने वैदिक सिटी में राम मुद्रा भी चलाई

महर्षि महेश योगी ने राम नाम की मुद्रा भी चलाई थी. उनकी संस्था 'ग्लोबल कंट्री वर्ल्ड ऑफ पीस' ने 2002 में इस मुद्रा को जारी किया था. साल 2003 में नीदरलैंड्स ने इसे कानूनी मान्यता दे दी. राम नाम की मुद्रा में 1, 5 और 10 के नोट थे. उस वक्त नीदरलैंड्स के कुछ गांवों और शहरों के 100 से भी ज्यादा दुकानों में ये नोट चलते थे. इसके अलावा अमेरिका के आइवा के महर्षि वैदिक सिटी में भी राम मुद्रा का प्रचलन था. इसके अलावा 35 अमेरिकी राज्यों में राम पर आधारित बॉन्डस शुरू किए गए थे.

42 देशों में राजनीतिक पार्टी बनाई

महर्षि महेश योगी ने 1992 में 42 देशों में अपनी राजनीतिक पार्टी खड़ी की. उसका नाम था नेचुरल लॉ पार्टी यानि एनएलपी. अमेरिका में जान हेगलिन ने इस पार्टी के बैनर पर तीन बार प्रेसीडेंट का चुनाव भी लड़ा. ब्रिटेन के चुनावों में भी इस पार्टी ने शिरकत की.

भारत में भी महेश योगी सियासत में कूदे. उन्होंने अजेय भारत पार्टी के नाम से सियासी पार्टी लांच की. धूम धड़ाके के साथ चुनावों में उम्मीदवार खड़े किए. काफी पैसा भी बहाया. मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में इस पार्टी ने एक सीट भी जीती थी लेकिन एक दशक बाद ही उन्होंने सियासत से किनारा कर लिया.

चंद्रशेखर को भी देते थे करोड़ों रुपए

चंद्रशेखर को अध्यात्मिक गुरु महर्षि महेश योगी करोड़ों रुपए चुनाव लड़ने के लिए देते थे। वह उन्हें हेलिकॉप्टर भी उपलब्ध कराते थे।


महर्षि चाहते थे कि चंद्रशेखर उनकी नई बनाई पार्टी को भारत में स्थापित कर वेदों के अनुसार, भारतीय राजनीति में एक नई शुरुआत करें.




दुनियाभर में आध्यात्म का बड़ा अंपायर खड़ा किया


कहा जाता है कि 60 के दशक से लेकर 80 के दशक तक महर्षि महेश योगी ने आध्यात्म और योग के बल पर जितना पैसा अर्जित किया और दुनियाभर में अपनी संस्था के लिए प्रापर्टी खरीदीं, वैसा आज तक भी कोई नहीं कर पाया. तब उन्हें दुनिया का सबसे धनी आध्यात्मिक गुरु कहा जाता था.




वर्ष 2008 में निधन 


1960-70 के दशक के दौरान करीब 60 लाख लोग महर्षि महेश योगी के शिष्य थे. निधन से पहले 11 जनवरी 2008 को उन्होंने ये कहकर रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी कि अब उनका काम पूरा हो गया है.
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