पुण्यतिथि : कैसे थे जनसंघ नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आखिरी दिन

पुण्यतिथि : कैसे थे जनसंघ नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आखिरी दिन
जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी (फाइल फोटो)

23 जून 1953 को जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी (death anniversary of Shyama Prasad Mukherjee) का निधन हो गया था. ये निधन जम्मू-कश्मीर के एक अस्पताल में हुआ. लेकिन पिछले कुछ सालों से लगातार उनके निधन की जांच की मांग उठती रही है. जानते हैं उनके आखिरी दिनों के बारे में

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 23, 2020, 11:31 AM IST
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जनसंघ के स्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी (death anniversary of Shyama Prasad Mukherjee) आजादी के बाद देश की पहली नेहरू सरकार में केंद्रीय मंत्री थे. बाद में अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को स्वायत्ता देने को लेकर उनके प्रधानमंत्री नेहरू से मतभेद हुए. वो सरकार से अलग हो गए. इसी मुद्दे पर श्रीनगर में धरने पर बैठने गए थे लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. फिर 23 जून 1953 को उनकी जेल में मृत्यु हो गई. उनके निधन पर हमेशा सवाल उठाए जाते रहे. एक साल पहले सत्ताधारी दल बीजेपी में इस मामले की जांच कराने की मांग भी उठी थी.

जम्मू कश्मीर से जुड़ी नीतियों का श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने संसद के भीतर व बाहर विरोध किया था. 1951 में जनसंघ बनाने के बाद भी मुखर्जी लगातार इसके खिलाफ मुखर थे.

1953 में जब उनका निधन हुआ तो उनकी मां जोगमाया देवी ने भी मौत की जांच किए जाने की मांग की.  2004 में पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने कहा कि कश्मीर में मुखर्जी को गिरफ्तार किया जाना साज़िश थी. श्यामाप्रसाद मुखर्जी पर केंद्रित किताब के लेखक एससी दास ने दावा किया कि उनकी हत्या की गई. जानते हैं मुखर्जी की मौत का पूरा घटनाक्रम.



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आज़ादी के बाद की तस्वीर. नेहरू कैबिनेट और देश के तत्कालीन दिग्गज नेताओं के साथ मुखर्जी (कुर्सी पर सबसे दाएं कोने में). (इनसेट में) 1977 में मुखर्जी की याद में जारी किया गया डाक टिकट

जम्मू-कश्मीर में घुसते ही गिरफ्तार कर लिये गए
नेहरू की नीतियों के विरोध के दौरान मुखर्जी कश्मीर जाकर अपनी बात कहना चाहते थे, लेकिन 11 मई 1953 को श्रीनगर में घुसते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. तब, वहां शेख अब्दुल्ला की सरकार थी. दो सहयोगियों समेत गिरफ्तार किए गए मुखर्जी को पहले श्रीनगर सेंट्रल जेल भेजा गया.  फिर वहां से शहर के बाहर एक कॉटेज में ट्रांसफर ​कर दिया गया.

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सेहत बिगड़ने लगी थी 
एक महीने से ज़्यादा कैद रखे गए मुखर्जी की सेहत बिगड़ने लगी थी. बुखार और पीठ में दर्द की शिकायत होने लगी थी. 19 व 20 जून की रात पता लगा कि उन्हें प्लूराइटिस हो गया है. ये उनकी पुरानी बीमारी थी, जिससे वो 1937 और 1944 में भी ग्रस्त हो चुके थे.

डॉक्टर अली मोहम्मद ने उन्हें स्ट्रेप्टोमाइसिन का इंजेक्शन दिया था. मुखर्जी ने डॉ. अली को बताया था कि उनके फैमिली डॉक्टर का कहना था कि ये दवा उन्हें सूट नहीं करती.

22 जून को हार्ट अटैक हुआ
22 जून को मुखर्जी को हृदय में दर्द की शिकायत हुई. सांस लेने में तकलीफ होने लगी. मुखर्जी को अस्पताल में शिफ्ट किया गया. पता लगा कि उन्हें हार्ट अटैक हो गया है. इसके बाद 23 जून की सुबह 3:40 बजे दिल के दौरे से उनका निधन

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एक सभा के दौरान श्यामाप्रसाद मुखर्जी.


निधन पर कई सवाल खड़े हुए
मुखर्जी के निधन पर कई सवाल खड़े हुए. मुखर्जी को जेल से ट्रांसफर क्यों किया गया? उन्हें एक कॉटेज में क्यों रखा गया? डॉ. अली ने यह जानने के बावजूद कि मुखर्जी को स्ट्रेप्टोमाइसिन सूट नहीं करती फिर भी ये इंजेक्शन क्यों दिया? क्या उनका इलाज सही तरीके से चल रहा था? जब 22 जून को उनका हार्ट अटैक हुआ था तो रात में उनकी देखभाल में केवल एक ही नर्स क्यों थी?

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सरकार ने कहा-सारे तथ्य कहते हैं कि मौत कुदरती थी
हिरासत में मुखर्जी की मौत की खबर ने पूरे देश में खलबली पैदा कर दी थी. मुखर्जी की मौत की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई. मुखर्जी की मां जोगमाया देवी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को इस संबंध में चिट्ठी लिखी. इसके जवाब में नेहरू ने कहा कि उन्होंने मुखर्जी की देखभाल में रहे कई लोगों से तथ्य जुटाए हैं, जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि उनकी मौत कुदरती थी.
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