पुण्यतिथि : क्यों निधन से एक महीना पहले से वीर सावरकर ने उपवास शुरू कर दिया था

वीर सावरकर (फाइल फोटो)

वीर सावरकर (फाइल फोटो)

आज यानि 26 जनवरी को वीर सावरकर की पुण्यतिथि है. ये सवाल अक्सर पूछा जाता है कि वीर सावरकर का निधन आखिर कैसे हुआ था. उनके बारे में जो जानकारी मिलती है, उससे लगता है कि उनकी मृत्यु के पीछे मुख्य वजह उपवास थी, जो उन्होंने खुद चुना था.

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  • Last Updated: February 26, 2021, 12:11 PM IST
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अक्सर ये सवाल पूछे जाते रहे हैं कि प्रबल राष्ट्रवादी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर यानि विनायक दामोदर सावरकर का निधन कैसे हुआ था. अगर आप इंटरनेट पर जाइए तो आपको इस तरह के तमाम सवाल दिखेंगे.

आमतौर पर माना जाता है कि उन्होंने खुद अपने लिए इच्छा मृत्यु जैसी स्थिति चुनी थी. उनका निधन 26 फरवरी 1966 को हुआ था. उससे एक महीने पहले से उन्होंने उपवास करना शुरू कर दिया था.
माना जाता है कि इसी उपवास के कारण उनका शरीर कमजोर होता गया और फिर 82 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया. दरअसल कालापानी की सजा ने उनके स्वास्थ्य पर बहुत गहरा असर डाला था.

इच्छा मृत्यु के थे समर्थक
सावरकर ने अपनी मृत्यु से दो साल पहले 1964 में 'आत्महत्या या आत्मसमर्पण' नाम का एक लेख लिखा था. इस लेख में उन्होंने अपनी इच्छा मृत्यु के समर्थन को स्पष्ट किया था. इसके बारे में उनका कहना था कि आत्महत्या और आत्म-त्याग के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर होता है.



सावरकर ने अपनी मृत्यु से दो साल पहले 1964 में 'आत्महत्या या आत्मसमर्पण' नाम का एक लेख लिखा था


उनका कहना था कि जीवन का मिशन पूरा हो गया
सावरकर ने तर्क दिया था कि एक निराश इंसान आत्महत्या से अपना जीवन समाप्त करता है लेकिन जब किसी के जीवन का मिशन पूरा हो चुका हो और शरीर इतना कमजोर हो चुका हो कि जीना असंभव हो तो जीवन का अंत करने को स्व बलिदान कहा जाना चाहिए.

आखिरी के दिनों में दवाइयां लेनी बंद कर दी थी
सावरकर की आत्मकथा 'मेरा आजीवन कारावास' के परिशिष्ट में उनके अंतिम दिनों में लिखे गए कई पत्र प्रकाशित हैं. इसी में एक पत्र ऐसा भी है जिसमें उन्होंने कई तर्कों और अपने जीवन में आए क्षणों के जरिए इच्छा मृत्यु की व्याख्या भी की है. अपने आखिरी दिनों में उन्होंने दवाइयां लेनी भी बंद कर दी थीं. साथ ही उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था. इसलिए लोग कहते हैं कि उन्होंने इच्छा मृत्यु चुनी.

आखिरी दिनों में उन्होंने दवाइयां लेनी भी बंद कर दी थीं. साथ ही उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था. इसलिए लोग कहते हैं कि उन्होंने इच्छा मृत्यु चुनी.


एक महीने से कर रहे थे व्रत
फरवरी, 1966 से वे पूरे तौर पर व्रत करने लगे थे. इस व्रत में वे न तो जीवनरक्षक दवाइयां खा रहे थे और न ही खाना-पानी. 26 फरवरी तक वे ऐसे ही उपवास करते रहे. इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई. उस समय उनकी उम्र 82 साल थी.
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