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Coronavirus: इक्वाडोर के इस शहर में सड़कों पर ही छोड़ दी जा रही हैं लाशें

News18Hindi
Updated: April 4, 2020, 2:03 PM IST
Coronavirus: इक्वाडोर के इस शहर में सड़कों पर ही छोड़ दी जा रही हैं लाशें
परिजन और खुद अस्पताल ही शवों को सड़क किनारे रख रहे हैं

इक्वाडोर (Ecuador) का सबसे बड़ा शहर ग्वायाकिल (Guayaquil) इन दिनों कोरोना (coronavirus) से बुरी तरह से प्रभावित है. यहां तक कि शहर की सड़कों पर लाशें पड़ी-पड़ी सड़ रही हैं.

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इक्वाडोर में लगभग 30 लाश की आबादी वाले शहर ग्वायाकिल में खतरनाक ढंग से फैलता जा रहा कोरोना वायरस (coronavirus) अब तक लगभग साढ़े 3 हजार लोगों को अपने शिकंजे में ले चुका है. हालात इतने खराब हैं कि अस्पताल नए मरीजों को नहीं ले रहे, वहीं बिना इलाज दम तोड़े मरीजों के अंतिम संस्कार को भी जगह नहीं है. परिजन और खुद अस्पताल ही शवों को सड़क किनारे रख रहे हैं.

समुद्र किनारे बसे इस शहर से लोग लगातार ऐसी तस्वीरें और वीडियो डाल रहे हैं, जिनमें शव शीट में या कॉफिन के भीतर सड़क किनारे पड़े हैं. खुद यहां की मेयर Cynthia Viteri ने कोविड-19 पॉजिटिव आने के बाद शहर के हालात पर ट्वीट करते हुए बताया कि यहां सड़क किनारे, पेवमेंट पर और घरों के भीतर कोई न कोई लाश है.

इक्वाडोर में बढ़ते संक्रमण की वजहें 
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंटरनेशनल पोर्ट होने की वजह से यहां पर दुनियाभर के लोग आए और ऐसे में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन उतनी अच्छी तरह से नहीं हो सका. एक और वजह इक्वाडोर और स्पेन के बीच high levels of air traffic को भी बताया जा रहा है. बता दें कि स्पेन में इक्वाडोर के लाखों लोग काम के लिए जाते हैं और स्पेन में कोरोना से हुई मौतों की दर दुनिया में दूसरे नंबर पर है. ऐसे में स्पेन से घर लौटे लोग अपने साथ वायरस भी ला रहे हैं. इस देश में कोरोना का सबसे पहला मरीज 70 साल की एक महिला थी जो स्पेन के मैड्रिड से लौटी थी. 29 फरवरी को ये केस आया और एक महीने के भीतर ही यहां पर देश की सबसे ज्यादा आबादी कोरोना से संक्रमित पाई गई.



इक्वाडोर में अबतक कोरोना के 3,368 मामले आ चुके हैं




नहीं है शवदाह गृह में व्यवस्था
National Service of Risk and Emergency Management Department के अनुसार इक्वाडोर में अबतक कोरोनाा के 3,368 मामले आ चुके हैं, वहीं खुद सरकार का मानना है कि अगले 1 महीने के भीतर अकेले ग्वायाकिल शहर में 2500 से 3500 मौतें कोरोना की वजह से हो सकती हैं. वैसे भी आ चुके कुल मामलों में से 3,163 मामले इसी शहर से हैं. शहर में एक शवदाह गृह के संचालक Fernando Jiménez कहते हैं कि उन्होंने कुछ वक्त के लिए अपना काम बंद कर दिया है क्योंकि लगातार रोज आते शवों के बाद भी बहुत से फोन आते थे. ऐसे में पहले से परेशान परिजनों को क्यू में रखना ठीक नहीं था. वे कहते हैं- यहां इतनी इमरजेंसी है कि हमसे व्यवस्था नहीं हो सकी. इसके अलावा मृतकों के लिए बॉडी बैग या शवदाह करने वालों के पास बॉडी सूट का बंदोबस्त न होने के कारण भी शवदाह गृह शवों के अंतिम संस्कार से बच रहे हैं ताकि कोरोना का संक्रमण न फैल जाए.

लाशों को किया जा रहा इकट्ठा
इंटरनेशनल पोर्ट होने के कारण शहर में लगातार शिप कंटेनर लाए जा रहे हैं ताकि लाशों को वहां इकट्ठा किया जा सके और महामारी खत्म होने के बाद उन्हें दफनाया जा सके. सरकारी टास्क फोर्स के प्रमुख Jorge Wated के अनुसार मिलिटरी और पुलिस रोज लगभग 30 से 150 लाशें जमा करने का काम कर रही है. सड़क पर पड़ी लाशओं को मिलटरी उठाकर ले जाने के बाद सैनिटेशन वर्कर सड़क के उस हिस्से पर साबुन और पानी फेंककर उसे सैनिटाइज करने की कोशिश करते हैं. शहर के हालात इतने खराब हैं कि अस्पतालों में शिपिंग कंटेनर भेजे गए हैं ताकि लाशों को एक जगह जमा किया जा सके और बाद में अंतिम संस्कार हो सके.

लोग इमरजेंसी रूम के सामने अपनी पारी का इंतजार करते हुए दम तोड़ रहे हैं


अस्पतालों में ज्यादा मरीजों को भर्ती कर सकने की सुविधा नहीं है. ऐसे में लोग इमरजेंसी रूम के सामने अपनी पारी का इंतजार करते हुए दम तोड़ रहे हैं. हाल ही में ऐसा ही एक मामला आया, जिसमें एक महिला मरीज ने क्यू में ही दम तोड़ दिया. कई घंटे तक उसकी लाश वहीं पड़ी रही. बाद में मिलिटरी ने शव को उठाकर शिप कंटेनर में जमा कर दिया.

घरों में भी सड़ रहे शव
चूंकि इस जगह का तापमान लगभग 40 डिग्री के आसपास है और सड़क पर पड़े-पड़े लाश खराब हो सकती है. इस वजह से बहुत से लोग अपने परिजनों के शवों को घर पर ही रखे हुए हैं. वे शव से संक्रमण फैलने को रोकने का कोई खास उपाय नहीं आजमा रहे, सिवाय इसके कि शव पॉलिथिन में लिपटा होता है या कहीं-कहीं कॉफिन में रखा होता है. इसके ऊपर पंखा चला दिया जाता है ताकि लाश न सड़े.

यूरोपीय मुल्क भी खस्ताहाल
इस लैटिन अमेरिकी देश के अलावा आर्थिक तौर पर समृद्ध कई यूरोपियन देशों के भी लगभग यही हाल हैं. कोरोना से मौत के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ चुके देश इटली की हालत बदतर है. यहां मौत का आंकड़ा साढ़े 14 हजार हो चुका है और लगभग 1 लाख 20 हजार लोग कोरोना पॉजिटिव हैं. मौत के आंकड़ों के बारे में अनिश्चितता है क्योंकि खुद Bergamo शहर के मेयर का कहना है कि बहुत से लोगों की मौत घर पर या फिर किसी निजी नर्सिंग होम में हो रही है.

यहां पर लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन उतनी अच्छी तरह से नहीं हो सका


अस्पतालों में ही रही मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ही मृतकों को दफना रहा है और परिवारों को सूचित कर दिया जाता है. शहर के शवदाहगृह चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं.शवों को जलाने के लिए वेटिंग लिस्ट तैयार हो चुकी है. अस्पतालों के मुर्दाघरों में मृतकों के शव बॉडी बैग में अपनी बारी का इंतजार करते पड़े हैं. यहां तक कि शवों को उन शहरों में ले जाकर दफनाया जा रहा है, जहां के हालात कुछ कम खराब हैं.

इसी तरह से ईरान में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की दर्ज संख्या 53,183 हो चुकी है. बीमारी से हुई मौतें भी लगातार बढ़ रही हैं. इस वजह से अंतिम संस्कार करने के लिए स्टाफ कम पड़ रहा है और लगातार नए लोगों की नियुक्ति की जा रही है. तेहरान के कब्रिस्तान Behesht-e Zahra के मैनेजर का कहना है कि उनका स्टाफ दिन-रात काम कर रहा है, तब भी लाशें जमा हैं. लाशें लाई जा रही हैं और बिना किसी अंत्येष्टि कर्म के दफनाई जा रही हैं. स्पेन की हालत भी मिलती-जुलती है, जहां 11,198 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है.

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First published: April 4, 2020, 2:02 PM IST
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