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वो मुल्क जिसने रेप के शक में बच्चे को दी मौत की सजा, बाद में माना बेगुनाह

वो मुल्क जिसने रेप के शक में बच्चे को दी मौत की सजा, बाद में माना बेगुनाह

जब जॉर्ज जूनियस स्टिनी को मौत की सजा दी गई तब वो महज 14 साल का था

जब जॉर्ज जूनियस स्टिनी को मौत की सजा दी गई तब वो महज 14 साल का था

दुनिया के सबसे विकसित मुल्क ने 14 साल के बच्चे को सिर्फ शक के आधार पर मौत की सजा (capital punishment) दे दी.

    दुनियाभर में मौत की सजा पर बहस हो रही है. ज्यादातर देशों में बड़े से बड़े अपराध के लिए भी नाबालिगों को न्यूनतम सजा देने का प्रावधान है. वहीं विकसित देशों की श्रेणी में आने वाले देश अमेरिका में एक वक्त पर दुनिया के सबसे कम उम्र के आरोपी को सजा-ए-मौत दी गई थी. जब सजा दी गई तो आरोपी सिर्फ 14 साल का दुबला-पतला और छोटे कद का लड़का था. इस अश्वेत बच्चे को शक की बिना पर मौत दी गई. हालांकि काफी सालों बाद अमेरिका के कानून ने अपने इस अपराध के लिए माफी भी मांगी.

    बीते कई दशकों से Amnesty International दावा कर रहा है कि ईरान में छोटे-छोटे बच्चों को नियम तोड़ने पर मौत की सजा सुनाई जा रही है. एमनेस्टी की मानें तो ईरान में मौत की सजा के लिए लड़कों की उम्र 15 साल तो लड़कियों के लिए 9 साल का होना ही काफी है. खुद UN का मानना है कि ऐसे कम से कम 160 मामले हैं, जिनमें छोटे बच्चों को सजा-ए-मौत सुनाई गई है. कमउम्र अपराधी या आरोपी मौत की सजा पाने से पहले कई साल तक जेल की सलाखों के पीछे रहते हैं और अपनी बारी का इंतजार करते हैं. जेल में अपराधियों के बीच रहना और परिवार से दूरी उनकी सजा को और भी मुश्किल बना देते हैं. ईरान में बच्चों पर इस क्रूरता का वैश्विक स्तर पर विरोध हो रहा है. यहां तक कि साल 2014 में खुद ईरान की सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो बच्चे मौत का सजा का इंतजार कर रहे हैं, वे रीट्रायल के लिए अप्लाई कर सकते हैं. हालांकि अभी तक किसी बदलाव की जानकारी नहीं मिल सकी है.

    एक ओर ईरान में बच्चों को मौत की सजा की प्रैक्टिस जारी है तो दूसरी ओर अमेरिका इससे भी आगे है. इसी देश में दुनिया के सबसे कमउम्र आरोपी को मौत की सजा न सिर्फ सुनाई गई, बल्कि 14 साल की उम्र में सजा मुकम्मल भी हुई. घटना साल 1944 की है, जब अमेरिका में एक अश्वेत लड़के को संदेह की बिना पर मौत की सजा सुनाई गई. हालांकि साल 2014 में केस दोबारा खोला गया और तब बच्चे को बेगुनाह माना गया.

    मन को दहला देने वाली ये घटना उस दौर की है, जब अमेरिका में रंगभेद काफी था. अश्वेत लोगों से हर चीज में भेदभाव हुआ करता था. तभी ये वाकया घटा. मार्च 1944 में जॉर्ज स्टिनी (George Stinney) अपनी बहन के साथ घर के सामने खेल रहा था, उसी वक्त दो श्वेत बच्चियां फूल ढूंढती हुई वहां पहुंची और जॉर्ज से भी इस बारे में बात की. मदद के लिए 14 साल का जॉर्ज उनके साथ गया जिसके बाद लड़कियां गायब हो गईं.

    खोजबीन पर लड़कियों की लाश रेलवे ट्रैक के पास पड़ी मिली. दोनों का सिर बुरी तरह से कुचला हुआ था. जांच में सामने आया कि वे लड़कियां आखिरी बार जॉर्ज के साथ देखी गई थीं. शक के आधार पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया और उससे पूछताछ शुरू की.इसके बाद मीडिया में आया कि बच्चे ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है कि उसी ने दोनों लड़कियों (उम्र 11 और 8 साल) को मारा है. पुलिस ने प्रेस में बताया कि लड़का 11 साल की लड़की के साथ संबंध रखना चाहता था लेकिन लड़की इसके लिए तैयार नहीं हुई. इसी गुस्से में उसने दोनों ही लड़कियों का बेरहमी से कत्ल कर दिया.

    पुलिस के बयानों के आधार पर ही जॉर्ज को कोलंबियन जेल में कई महीने रखा गया. इस दौरान उसकी न परिवार और न ही मीडिया से मुलाकात कराई गई. बाद में सामने आया कि जॉर्ज के बयान की कॉपी पर उसके साइन तक नहीं थे. सुनवाई शुरू हुई तो पीड़ित परिवार के वकील से लेकर जॉर्ज तक का वकील और यहां तक कि जज भी श्वेत था. यहां तक कि कोर्टरूम में भी किसी अश्वेत को भीतर जाने की इजाजत नहीं दी गई. भीतर ही भीतर मामले की सुनवाई हुई और फैसला हो गया. अदालत ने जॉर्ज को वयस्कों की तरह ट्रीट किया और बिना किसी गवाह, जांच और दलील के उसे दोषी मानते हुए मौत की सजा सुना दी गई.

    40 के दशक में अमेरिका में मौत की सजा के कई तरीके थे, जिनमें से एक था बिजली के झटके देना. जॉर्ज को इलेक्ट्रिक चेयर पर बैठाया गया. उसकी लंबाई-चौड़ाई दोनों ही कुर्सी के हिसाब से कम थी. तब उसे किताबों के मोटे ढेर पर बैठाया गया और फिर बिजली का झटका लगाया गया. करंट इतना हाई वोल्ट था कि कुछ ही झटकों में बच्चे की मौत हो गई.

    साल 2014 में कुछ वकीलों ने बच्चे को फांसी की सजा के इस केस को दोबारा खुलवाया. कहीं कोई गवाह नहीं था, कहीं भी जॉर्ज के दस्तखत नहीं थे. तमाम कागजों के आधार पर माना गया कि के साथ नाइंसाफी हुई क्योंकि वो अश्वेत था. आज भी उसे अमेरिकी कोर्ट के इतिहास में मौत की सजा पाने वाला सबसे कमउम्र शख्स माना जाता है.स्टिनी के अलावा एक और अमेरिकन अश्वेत को 14 साल की उम्र में मौत की सजा मिली. Joe Persons नाम के इस अपराधी ने 8 साल की बच्ची से बलात्कार किया था. बच्ची के साथ हुआ अपराध इतने जघन्य तरीके से किया गया था कि खुद अपराधी के पिता ने अपने बेटे के लिए मौत की सजा मांगी. अपराध के वक्त Joe 13 साल का था. अगले ही साल 14 का होते ही उसे जॉर्जिया में मौत की सजा दी गई.
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    Tags: America, Central Jail, Crime report, Police, Supreme court of india

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