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US Election: क्या होगा अगर जीत के बाद राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की मौत हो जाए?

इस बार 3 नबंवर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने जा रहे हैं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
इस बार 3 नबंवर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने जा रहे हैं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

चुनाव के दौरान या जीत के बाद अगर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की मौत (what happens if a presidential candidate or president-elect dies in America) हो जाए तो क्या अमेरिकी संविधान (Constitution of the United States) कोई रास्ता सुझाता है? जानिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 3, 2020, 12:22 PM IST
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में कोरोना संक्रमित हो गए हैं. पूरी दुनिया में 1 मिलियन से भी ज्यादा जानें ले चुके वायरस से संक्रमित होने के बाद से ट्रंप आइसोलेशन में हैं. लगभग 74 साल के राष्ट्रपति में फिलहाल कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं लेकिन ऐन चुनाव के पहले ट्रंप की सेहत ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. क्या हो अगर राष्ट्रपति या राष्ट्रपति पद का प्रबल दावेदार गंभीर रूप से बीमार हो जाए या फिर उसकी मौत हो जाए. जानिए, क्या अमेरिका का संविधान इसपर कोई बात कहता है.

क्यों उठ रहा है विवाद?
इस बार 3 नबंवर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने जा रहे हैं. कायदे के मुताबिक अमेरिकी संसद कांग्रेस को चुनाव की तारीख चुनने का हक देती है. हर 4 साल में नवंबर के पहले सोमवार के अगले दिन चुनाव होता है. यानी देखा जाए तो ट्रंप चुनाव के लिए तय तारीख से ठीक महीनेभर पहले बीमार हुए हैं. 70 साल के ऊपर के होने के कारण उन्हें कई तरह के डर भी हैं. हालांकि फिलहाल उनमें संक्रमण के हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं लेकिन तब भी एकाएक ये सवाल उठने लगा है कि अगर राष्ट्रपति या राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार शारीरिक या मानसिक तौर पर काम करने के लायक न रहे, तब क्या हो सकता है.

तारीख तय हो चुकी है और डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य चुनाव आगे बढ़ाने के लिए शायद ही राजी हों- सांकेतिक फोटो (CNBC)

क्या इससे चुनाव टल जाएगा?


हां, ऐसा हो सकता है लेकिन इसकी संभावना काफी कम है. फिलहाल तारीख तय हो चुकी है और डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य चुनाव आगे बढ़ाने के लिए शायद ही राजी हों. इसकी एक वजह ये भी है कि कोरोना का ही हवाला देते हुए ट्रंप कई बार इलेक्शन आगे बढ़ाने की बात कर चुके हैं और हर बार डेमोक्रेट ने इसका विरोध किया. वैसे अब तक अमेरिका के इतिहास में ऐसा कभी हुआ भी नहीं कि राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की तारीख आगे-पीछे हो.

उम्मीदवार की चुनाव से ठीक पहले मौत तो जाए तो क्या होगा?
इसका भी संविधान में तोड़ है. अगर ऐसा होता है तो डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के सदस्य आपस में मिलकर नए उम्मीदवार को वोट के जरिए चुनेंगे. हालांकि फिलहाल के हालात देखें तो इसके लिए काफी देर हो चुकी है. कोरोना के कारण इस बार डाक के जरिए वोट होने जा रहे हैं. दो दर्जन राज्यों में बैलेट भेजे जा चुके हैं. अब अगर राष्ट्रपति की दावेदारी जता रहे दो उम्मीदवारों में से किसी की मौत भी हो जाए तो भी वोटर्स को उन्हीं दोनों में से चुनना होगा.

अगर कैंडिडेट की इलेक्टोरल कॉलेज वोट से पहले मौत हो जाए?
ये एक और पहलू है. असल में यूएस में राष्ट्रपति जनता के वोट से नहीं बनता, बल्कि इसके लिए इलेक्टोरल कॉलेज काम करता है. इलेक्टोरल कॉलेज असल में एक बॉडी है, जो जनता के वोट से बनती है. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि जनता के वोट से हर अमेरिकी राज्य से अधिकारियों का एक समूह बनता है, जो इलेक्टोरल कॉलेज कहलाता है. ये लोग मिलकर राष्ट्रपति चुनते हैं. जीतने वाले को कुल 538 वोटों में से कम से कम 270 वोट मिलने चाहिए.

यूएस में राष्ट्रपति जनता के वोट से नहीं बनता, बल्कि इसके लिए इलेक्टोरल कॉलेज काम करता है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


राज्यों के कानून अलग-अलग
इस बार ये लोग चुनाव के बाद 14 दिसंबर को राष्ट्रपति चुनने वाले हैं. लेकिन कई राज्यों का कानून ये बताता ही नहीं कि अगर उम्मीदवार की मौत हो जाए तो क्या करना चाहिए. जैसे मिशिगन का कानून इलेक्टोरल सदस्यों को उसी शख्स को वोट देने को कहता है, जिसके नाम पर जीत मिली, यानी जो बैलेट पर है. दूसरी तरफ इंडियाना का कानून कहता है कि अगर दावेदार न रहे, तो सदस्य उसकी जगह नए व्यक्ति के लिए वोट कर सकते हैं.

अगर इलेक्टोरल कॉलेज की वोटिंग के बाद उम्मीदवार की मौत हो?
इलेक्टोरल कॉलेज में ज्यादा वोट पाने के बाद भी कोई तुरंत अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं बन जाता. इसके लिए पूरी प्रक्रिया होती है. वोटिंग के बाद कांग्रेस की बैठक होती है, जो इस साल 6 जनवरी को होगी. इस दौरान रिजल्ट पर मुहर लगाई जाती है. इसके बाद ही व्यक्ति अमेरिका का प्रेसिडेंट कहलाता है. अब अगर इलेक्टोरल वोट जीतने के बाद कैंडिडेट की मौत हो जाए तो क्या होगा, इसपर संविधान में कोई रास्ता नहीं.

इतिहास में अब तक ऐसी कोई घटना नहीं दिखी है कि चुनाव के बाद किसी कैंडिडेट की मौत हो जाए- सांकेतिक फोटो (ndla)


खारिज भी कर सकती है कांग्रेस
वैसे संविधान का 20वां संशोधन कहता है कि राष्ट्रपति के शपथ लेने के पहले मौत हो जाने पर उप-राष्ट्रपति उसकी जगह ले सकता है. लेकिन ये पक्का नहीं है. अगर कांग्रेस चुने हुए सदस्य के नाम पर मिले वोटों को उसकी मौत के आधार पर खारिज कर दे तो पार्टी के पास कोई रास्ता नहीं रहता.

अमेरिका के इतिहास में ऐसा कोई मामला नहीं
अब तक ऐसी कोई घटना नहीं दिखी है कि चुनाव के बाद किसी कैंडिडेट की मौत हो जाए. हां, साल 1872 में मिलता-जुलता एक वाकया जरूर है, जिसमें कैंडिडेट Horace Greeley की चुनाव हारने के कुछ समय बाद मौत हो गई थी. तब उनके हिस्से के वोटों का भी बंटवारा हो गया था.

अगर कांग्रेस के मुहर लगाने के बाद राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार न रहे?
अमेरिकी संविधान में इस बारे में स्पष्टता है. कांग्रेस के इलेक्टोरल कॉलेज वोट पर मुहर के बाद राष्ट्रपति 20 जनवरी को शपथ लेता है. अगर चुना हुआ उम्मीदवार इससे पहले न रहे या किसी गंभीर बीमारी का शिकार हो जाए तो उप-राष्ट्रपति उसकी जगह उसी रोज शपथ लेता है.
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