400 साल बाद भी धीमे नहीं हुए सुपरनोवा के अवशेष, कहीं खतरे का संकेत तो नहीं

400 साल बाद भी धीमे नहीं हुए सुपरनोवा के अवशेष, कहीं खतरे का संकेत तो नहीं
400 साल पहले हुए इस सुपरनोवा से निकले पदार्थ आज भी उसी गति से चल रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चार सौ साल पहले हुए सुपरनोवा (Supernova) के विस्फोट (Explosion) से निकले पदार्थ (Material) आज भी उसी गति (velocity) से चल रहे हैं जो उनकी शुरुआती गति होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 21, 2020, 1:11 PM IST
  • Share this:
अंतरिक्ष में तारों (Stars) के ईंधन खत्म होने के बाद सिकुड़कर उनमें विस्फोट होकर सुपरनोवा (Supernova) में बदलना आम घटना है. लेकिन कई बार यह घटना अनोखे बर्ताव से हैरान भी कर देती है. जब साल 1604  में एक छोटा सफेद तारा (white dwarf) सुपरनोवा में बदला, उसके बर्ताव ने भी खगोलविदों को हैरान कर दिया है. चार सौ साल (400 years) बाद भी उसके निकले पदार्थों की गति कम नहीं हुई है जबकि ऐसा होता नहीं हैं.

केप्लर का सुपरनोवा
17वीं सदी में पहली बार दिखा यह तारा पृथ्वी से केवल 20 हजार प्रकाश वर्ष दूर था और उसके सुपरनोवा को सिर्फ आंखों से ही देखा जा सकता था. इस घटना को दुनिया भर के खगोलविदों ने अवलोकित किया जिसमें जर्मनी के खगोलविद जोहानेस केप्लर भी शामिल थे. इस सुपरनोवा को केप्लर सुपरनोवा कहा जाता है

गति अब भी वही
इसका अब भी विस्तार हो रहा है. एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित ताजा शोध में पाया गया है कि इसके अवशेष जितनी तेजी से शुरू में ब्रह्माण्ड में फैल रहे थे उसी तेजी से अब भी फैल रहे हैं.  उस समय इसमें से निकले पदार्थ 8700 किलोमीटर प्रति सेंकेंड की गति से दूर जा रहे थे. यह पृथ्वी पर ध्वनि की गति से 25 हजार गुना ज्यादा है.



अंतरिक्ष में कौन रोकता है इस पदार्थ की गति
आमतौर पर सोचा जाता है कि अंतरिक्ष में तो घर्षण रहित निर्वात (Vaccum) है और चीजें तो ऐसे में हमेशा ही एक ही गति से दूर जाती रहेंगी, लेकिन तारों के आसपास मौजूद घूल और अन्य अवशेष इस पदार्थ की गति को कम करने का काम करते हैं. पहले सोचा गया था कि ऐसा ही कुछ केप्लर सुपरनोवा के साथ भी हुआ होगा.



ला सुपरनोवा
केप्लर सुपरनोवा ला सुपरनोव प्रकार का सुपरनोवा कहलाता है. ये सुपरनोवा तब होते हैं जब एक छोटा सफेद तारा बाइनरी सिस्टम में अपने साथी तारे को निगलने लगता है और इतना भार जमा कर लेता है जिसके बाद वह स्थिर नहीं रह पाता और इसका नतीजा एक कॉस्मिक विस्फोट होता है.

12 अरब प्रकाश वर्ष दूर मिली हमारी ही जैसी गैलेक्सी ने खगोलविदों को किया हैरान

तारे के बाहर का माध्यम
लेकिन ऐसे में साथी तारे का सारा का सारा पदार्थ दूसरे तारे में नहीं समा पाता. इसके बजाय यह बाइनरी सिस्टम के आसपास के बादल में जमा हो जाता है. इसे तारे के बाहर का माध्यम या सर्कमस्टैलर मीडियम (Circumstellar medium) कहते हैं. जब सफेद तारा सुपरनोवा में बदलता है तब इस विस्फोट से निकला पदार्थ इसी माध्यम से होकर गुजरता है.

पिछले कई दशकों से हो रहा है इसका अवलोकन
दूरी के लिहाज से पास होने और समय के लिहाज से हाल ही में होने के कारण  केप्लर सुपरनोवा अब हमारी गैलेक्सी मिल्की वे के सबसे महत्वपूर्ण पिंडों (Objects) में से एक हो गया है. जो ला सुपरनोवा के विकास के अध्ययन के लिए अहम है. पिछले कुछ दशकों से जमा हुए आंकड़ों की मदद से यह पता लगाया जा सका है कि इस सुपरनोवा से निकला पदार्थ कितनी तेजी से गतिमान है.

किसने किया अध्ययन
मैथ्यू मिलार्ड की अगुआई में आर्लिंग्टन की टेक्सास यूनिवर्सिटि के खगोलविदों की एक टीम ने चंद्रा एक्स रे ऑबजर्वेटरी से साल 2000, 2004, 2006, 2014 और 2016 की तस्वीरों का उपयोग कर सुपरनोवा के विस्फोट से निकले सामग्री के 15 हिस्सों के पदार्थों पर नजर रखी और उनकी स्थिति का बदलाव कर उनकी त्रिआयामीय गति (Three dimensional velocity) की गणना की.

Star
इस घटना के बाद तेजी से निकले पदार्थों की गति धीमी हो जानी चाहिए थी, सभी पदार्थों के साथ ऐसा नहीं हुआ. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


सारा पदार्थ नहीं हुआ धीमा
इनमें से कुछ हिस्सों के पदार्थ की गति उम्मीद के मुताबिक ही तारे के बाहर के माध्यम से अंतरक्रिया करने से धीमी हो गई थी. लेकिन शोधकर्ता यह जानकार हैरान हो गए कि कुछ हिस्से के पदार्थ अब भी उसी गति से चल रहे हैं जिससे वे चार सौ साल पहले चल रहे थे. उनकी गति अब भी 4,600 किमी प्रति सेंकड ही पाई गई जो कि वैसी ही है जैसी दूसरी गैलेक्सी के सुपरनोवा के विस्फोट के कुछ दिन या हफ्ते के समय ही होती है.

चांद का पृथ्वी के आइने की तरह होगा उपयोग, इससे तलाशा जाएगा बाह्यग्रहों पर जीवन

इससे यह नतीजा निकला
इससे पता चलता है कि कम से कम सुपरनोवा पदार्थ का कुछ हिस्सा तारे के बाहर के माध्यम से बिना गति धीमी हुए निकल सकता है. दिलचस्प बात यह है कि ये हिस्से एक समान नहीं फैले हैं. 15 में से 8 हिस्से पृथ्वी से दूर जा रहे हैं, केवल दो ही पृथ्वी की ओर आ रहे हैं. बाकि पांच की दिशा सुनिश्चित नहीं की जा सकी. इस दिशा में भविष्य में होने वाले अवलोकन और उसके आंकड़े इस तरह के ला सुपरनोवा विस्फोट के बारे में और विस्तृत जानकारी दे सकते हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज