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Deendayal Upadhyaya Birthday: समर्थक क्यों मानते हैं पंडित जी को एक बड़ी हस्ती

पंडित दीन दयाल उपाध्याय (Pandit Deendayal Upadhyaya) की एकात्म मानववाद विचारधारा को जनसंघ और भारतीय जनतापार्टी ने भी अपनाया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

पंडित दीन दयाल उपाध्याय (Pandit Deendayal Upadhyaya) की एकात्म मानववाद विचारधारा को जनसंघ और भारतीय जनतापार्टी ने भी अपनाया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

Deendayal Upadhyay Birthday: पंडित जी अपने विशिष्ठ लेखन और विचारों से जनसंघ (Jansangh) को नई ऊंचाइयां दी जिसके साथ वे एकात्म मानवाद (Integral Humanism) की विचारधारा के साथ लोकप्रिय हुए

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    पंडित दीन दयाल उपाध्याय (Pandit Deendayal Upadhyay) भारतीय राजनेता, राष्ट्रीय स्वयं सेवक के बड़े विचारक (RSS) और संगठनकर्ता थे. पंडित जी के नाम से मशहूर दीन दलाल उपाध्याय का आज जन्मदिन है. इसी दिन उनकी याद में अन्तयोदय दिवस भी मनाया जाता है. हिंदूत्व की विचारधारा से गहराई से जुड़े होने के बाद भी दीनदयाल उपाध्याय को एक अलग विलक्षण विचारधारा से जोड़ कर देखा जाता है. उनकी एकात्म मानववाद (Integral Humanism)  की विचारधारा समूचे राष्ट्र एक ही दृष्टि से देखने पर जोर देती थी जिसके लिए उन्होंने जीवन समर्पित कर दिया था.

    पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर 1916 को उत्तर प्रदेश के मुथरा के पास नागला में हुआ था. पिता भगवती चरण उपाध्याय रेववे में सहयाक स्टेशन मास्टर थे. दीन दयाल की आठ साल की उम्र में ही उनके माता पिता का निधन हो गया और उनका लालन पालन मामा ने किया. बचपन से युवाअवस्था तक वे माता पिता के बाद नाना, मामी, भाई, नानी को एक एक कर खोते गए और उनके अंदर विरक्ति भाव पैदा हुआ. फिर उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और बीए तक पढ़ाई भी की.

    संघ से जुड़ाव
    कॉलेज के दिनों में ही उनका संघ से परिचय हुआ और उसके संस्थापक हेडगेवार से निरंतर बौद्धिक परिचर्चाएं होने लगी. 1942 तक वे स्वयं सेवक संध के लिए पूर्णकालिक कार्य करने लगे और जल्दी ही प्रचारक बनकर आदर्श स्वयंसेवक के तौर पर पहचाने जाने लगे थे. लेखन से उनका गहरा लगाव था और उन्होंने राष्ट्रीय धर्म नाम की मासिक पत्रिका का प्रकाशन लखनऊ में शुरू किया. इसके बाद उन्होंने साप्ताहिक पंचजन्य और दैनिक स्वदेशी की भी शुरुआत की.

    खुद की एक अलग विचारधारा
    उपाध्याय की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे संघ प्रचारक होने के बाद भी खुद की विचारधारा के लिए पहचाने गए.  यह उनके लेखन का ही कौशल ही था. जिसने संघ की विचारधारा को लोगों में प्रसारित प्रचारित किया. यही वजह थी कि उनका एकात्म मानववाद जनसंघ ने 1965 में एक राजनैतिक कार्यक्रम के तौर पर आधिकारिक तौर पर अपनाया.

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    पंडित दीन दयाल उपाध्याय (Pandit Deendayal Upadhyaya) की विलक्षण संगठनात्मक क्षमताओं ने जनसंघ को नई ऊंचाइयां दीं. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    क्या था एकात्म मानववाद
    उपाध्याय का मानना था कि भारत के स्वदेशी आर्थिक विकास के लिए बहुत जरूरी है कि उसके केंद्र में मानव को रखा जाए.यह विचारधारा समाजवाद और पूंजीवाद दोनों से ही हटकर थी. उनका मानना था कि जब तक कमजोर वर्ग का उत्थान नहीं होगा, देश का विकास संभव नहीं है. उनकी विचारधारा से प्रभावित होकर ही श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कहा था,  “मुझे दो दीनदयाल उपाध्याय दे दीजिए, मैं पूरी तरह से देश का चेहरा बदल दूंगा.”

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    जनसंघ का नेतृत्व
    1953 में श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मृत्यु के बाद जनसंघ की जिम्मेदारी दीनदयाल उपाध्याय के हाथों में ही आ गई. उनके नेतृत्व में पार्टी ने नई मुकाम हासिल किए, उन्होंने जनसंघ की राजनीतिक विचारधारा को जमीनी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाया, जिसे बाद में भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनाया. वे एकात्म मानववाद जैसी विचारधारा को जनता तक पहुंचाने में सफल रहे. वे भारतीय मूल्यों के आधार पर देश में एक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक ढांचे के निर्माण करना चाहते थे.

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    पंडित दीन दयाल उपाध्याय (Pandit Deendayal Upadhyaya) की मृत्यु का रहस्य आज भी अनसुलझा है. (फाइल फोटो)

    जौनपुर चुनाव में हार
    एक बेहतरीन संगठनकर्ता होने के बाद भी राजनीति की  नकारात्मक उठापटक उन्हें कभी रास नहीं आई. शायद यही वजह रही के  वे खुले मन से 1963 में हुए जौनपुर के लोकसभा उपचुनाव को नहीं लड़ सके, जिसके लिए उनकी उम्मीदवारी पूरे देश में चर्चित रही. इस चुनाव में जाति के आधार पर जोड़ गणित किया गया था.  इस चुनाव में अपनी हार पर पंडित जी ने अपनी पॉलीटिकल डायरी में लिखा, ‘जनसंघ की इस चुनाव में हार की वजह यह नहीं थी कि जनता का सपोर्ट नहीं था, बल्कि उनकी पार्टी कांग्रेस के तमाम चुनावी हथकंडों का जवाब नहीं दे सके थे.

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    और रहस्यमयी मृत्यु
    इसमें शायद ही किसी को संदेह हो कि दीन दयाल उपाध्याय देशभर में बहुत लोकप्रिय थे.
    11 फरवरी, 1968 की दोपहर उत्तरप्रदेश के मुगलसराय स्टेशन पर दीनदयाल उपाध्याय का शव संदिग्ध अवस्था में पाया गया. उनके समर्थकों का आरोप था कि उनकी हत्या की गई है. उनकी मृत्यु की सीबीआई जांच भी हुई. उनके समर्थकों का आरोप था कि उनकी हत्या की गई है. लेकिन उनकी मौत अभी तक एक रहस्य बनी हुई है.

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