Air Pollution: 50 की जगह 999 हुआ दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स, आंखों में हो सकता है अल्सर!

एयर क्वालिटी इंडेक्स और कितना होता है इसका सामान्य स्तर?
एयर क्वालिटी इंडेक्स और कितना होता है इसका सामान्य स्तर?

कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के बीच बेहताशा बढ़ रहे वायु प्रदूषण (Air Pollution) ने सेहत पर बढ़ाया डबल खतरा, सांस और हार्ट के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक मौसम

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2020, 10:36 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर जहरीली हवा का चैंबर बन गया है. एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रिकॉर्ड 999 के स्तर तक पहुंच गया है, जो बेहद खतरनाक है. क्योंकि एक्यूआई का समान्य स्तर 0-50 के बीच ही होता है. डॉक्टरों का कहना है कि मुंह और नाक पर तो लोग मास्क लगाकर प्रदूषण (Air Pollution) के दुष्प्रभाव से बचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आंख (eye) से जुड़े खतरों से अनजान हैं, जबकि इतना प्रदूषण आंखों में अल्सर की समस्या पैदा कर सकता है.

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि जैसे ही प्रदूषण अपने नॉर्मल इंडेक्स (air quality index) से ऊपर जाता है, आंख के लिए खतरा बढ़ने लगता है. इस वक्त तो एक्यूआई 50 की जगह एक हजार के स्तर तक पहुंच गया है जो सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक है. इतने प्रदूषण में माइक्रो पार्टिकल्स आंख में जमा हो जाते हैं, लेकिन हमें दिखते नहीं. इससे एलर्जी, जलन, खुजली, पानी आने और लाली होने की समस्या आने लगती है. यह एलर्जी लंबे समय तक बनी रहेगी तो आंख की इम्यूनिटी कम हो जाएगी. जिससे इंफेक्शन और अल्सर होने का खतरा बढ़ जाएगा. इसलिए चश्मा लगाकर ही बाहर निकलें. बाहर से आ रहे हैं तो पीने के पानी से आंख को धुलें.

 air quality index of delhi, Delhi Air Pollution, Coronavirus, what is air quality index, what is AQI, parali, normal air quality index, एयर क्वालिटी इंडेक्स, दिल्ली में वायु प्रदूषण, क्या है एयर क्वालिटी इंडेक्स, पराली, सामान्य एयर क्वालिटी इंडेक्स कितना होता है
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का ये है हाल.




इसे भी पढ़ें: क्या होता है PM 10 और PM 2.5, आपकी सेहत को कैसे पहुंचाता है नुकसान?
जबकि, फिजिशियन डॉ. सुरेंद्र दत्ता का कहना कि एक तरफ कोरोना (Coronavirus) और दूसरी तरफ इतना प्रदूषण, एक तरह से स्वास्थ्य पर डबल अटैक है. अच्छा होगा कि लोग कम से कम बाहर निकलें. हार्ट और सांस की तकलीफ वाले वाले लोग मॉर्निंग वॉक बंद कर दें. मास्क लगाएं.



प्रदूषण के दो बड़े कारक

दरअसल, प्रदूषण में असली किरदार निभा रहे हैं PM 2.5 और PM 10 कण. ये कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए आसानी से हमारे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और सेहत (Health) के दुश्मन बन जाते हैं. यह कण कितना छोटा होता है इसे जानने के लिए ऐसे समझिए. एक आदमी का बाल लगभग 100 माइक्रोमीटर का होता है. इसकी चौड़ाई पर पीएम 2.5 के लगभग 40 कणों को रखा जा सकता है.

आंख, गले और फेफड़े को नुकसान का खतरा

सांस लेते वक्त इन कणों को रोकने का हमारे शरीर में कोई सिस्टम नहीं है. ऐसे में पीएम 2.5 हमारे फेफड़ों में काफी भीतर तक पहुंचता है. पीएम 2.5 बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. इससे आंख, गले और फेफड़े की तकलीफ बढ़ती है. खांसी और सांस लेने में भी तकलीफ होती है.

एयर क्वालिटी इंडेक्स क्या है?

प्रदूषण की समस्या मापने के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स बनाया गया है. इंडेक्स बताता है कि हवा में पीएम-10, 2.5, PM10, PM2.5, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) सहित 8 प्रदूषकों की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय किए गए मानकों के तहत है या नहीं.

Pollution: कोरोना लॉकडाउन ने शुद्ध कर दी दिल्ली-एनसीआर से लखनऊ तक की हवा

एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को 0-50 के बीच ‘बेहतर’, 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘सामान्य’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज