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Delhi Election Result 2020 (दिल्ली इलेक्शन रिजल्ट २०२०): क्या हैं नियम, कैसे होगी दिल्ली विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती

News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 6:21 AM IST
Delhi Election Result 2020 (दिल्ली इलेक्शन रिजल्ट २०२०): क्या हैं नियम, कैसे होगी दिल्ली विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती
इस तरह होती है चुनावों के बाद वोट काउंटिंग की प्रक्रिया

दिल्ली इलेक्शन रिजल्ट २०२० (Delhi Assembly Election Result 2020): दिल्ली विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती आज यानि 11 फरवरी को होगी. ये गिनती कैसे होती है और चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के कितने एजेंट मौजूद रह सकते हैं. पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होती है या EVM के वोटों की. इन सभी सवालों के जवाब यहां हैं.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 6:21 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली में विधानसभा के लिए हुई वोटिंग के बाद ईवीएम (EVM) फिलहाल स्ट्रांग रूम में बंद हैं. इसी में दिल्ली विधानसभा चुनावों के प्रत्याशियों की किस्मत भी बंद है. मंगलवार यानि 11 फरवरी को ईवीएम वोटों की काउंटिंग के लिए बाहर निकलेंगी. जानते हैं कि वोटों की गिनती की पूरी प्रक्रिया किस तरह होती है और इसके लिए चुनाव आयोग के किन नियमों का पालन करना जरूरी होता है.

वोटों की गिनती का समय और स्थान कैसे तय होता है?
चुनाव आयोग के नियम 51 के अनुसार, वोटों की मतगणना का समय और स्थान निर्वाचन अधिकारी तय करता है. ये निर्णय वोटिंग वाले दिन से कम से कम एक हफ्ते पहले सभी उम्मीदवारों और उनके एजेंट्स को लिखित में देना होता है.

उम्मीदवार वोटिंग हॉल में कितने प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है?

भारतीय चुनाव आयोग के नियम 52 के अनुसार, एक उम्मीदवार वोटिंग हॉल में अपने नीचे एजेंट्स की नियुक्ति कर सकता है. एक स्थान पर 16 एजेंट्स नियुक्त किए जा सकते हैं.

वोटिंग हॉल में कौन-कौन मौजूद रह सकता है?
नियम 53 के अनुसार, जहां वोटों की गिनती होती है, वहां निर्वाचन अधिकारी, गिनती करने वाला स्टाफ, उम्मीदवार, उसके एजेंट और चुनाव आयोग द्वारा प्रमाणित सरकारी कर्मचारी ही उपस्थित रह सकते हैं.वोटों की गिनती से पहले क्या EVM की जांच होती है?
हां, गिनती करने वाले स्टाफ और एजेंटों के लिए यह अनिवार्य है कि वोटों की गिनती शुरू करने से पहले जांच लें कि किसी भी EVM मशीन में कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई है. यदि किसी भी किस्म का हस्तक्षेप पाया जाता है तो तुरंत चुनाव आयोग को सूचित करना आवश्यक होता है.



कैसा होता है वो हॉल जहां वोटों की गिनती होती है?
वोटों की गिनती के लिए अधिकतर किसी स्कूल, कम्युनिटी सेंटर या जिला कार्यालय का ऑफिस चुना जाता है. ये वो जगहें होती हैं जहां टेबल कुर्सियों की व्यवस्था आसानी की करवाई जा सकती है. एक हॉल में अधिकतम 14 टेबल लगवाए जाते हैं. 2009 के लोकसभा चुनावों में 25 टेबलों की अनुमति भी चुनाव आयोग ने इस शर्त पर दी थी कि हॉल बहुत बड़े थे. इन 14 टेबलों के अलावा 1 टेबल निर्वाचन अधिकारी के लिए और 1 समीक्षक के लिए होती है.

उम्मीदवारों के एजेंट उस हॉल में इसलिए मौजूद होते हैं ताकि इस बात पर नजर रख सकें कि उनके उम्मीदवार के वोट गिनने में कोई कोताही तो नहीं बरती जा रही है. ये एजेंट निर्वाचन अधिकारी के साथ बैठते हैं.

यह ध्यान रखा जाता है कि हर गिनती टेबल को लकड़ी के फट्टों से अच्छी तरह ढककर रखा जाए ताकि हर एजेंट को गिनती करना कर्मचारी तो दिखता रहे, लेकिन EVM या बैलेट बॉक्स के भीतर किसी की नजर ना पड़ सके.

हर टेबल पर क्या-क्या उपलब्ध होता है?
गिनती किये जाने वाले हर टेबल पर 1 नीली इंक वाला बॉल पॉइंट पेन, एक चाकू जिससे सील काटी जा सके, फॉर्म 17C का पार्ट 2 होना अनिवार्य है. इसके साथ ही अतिरिक्त गिनती स्टाफ/ माइक्रो पर्यवेक्षक और NOTA द्वारा सुरक्षित वोटों की रिकॉर्डिंग के लिए प्रोफार्मा भी हर टेबल पर पहले से ही रखा जाता है.

हर टेबल पर एक-एक लाउडस्पीकर होता है जिस पर स्थानीय वोटों के रुझान की घोषणा होती रहती है. इसके अलावा हर टेबल को एक अतिरिक्त स्टाफ भी दिया जाता है जो EVM को सील और दूसरे दस्तावेजों को लिफाफों में रख सके.

क्या वोटों की गिनती के दौरान कैमरे का प्रयोग किया जा सकता है?
जहां वोटों की गिनती हो रही हो, वहां सिर्फ आधिकारिक व्यक्ति द्वारा पूरे हॉल की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है. इसके अलावा वहां कोई भी व्यक्ति ना तो फोटो खींच सकता है ना ही वीडियो बना सकता है. मीडियाकर्मियों को भी वहां जाने की अनुमति नहीं होती. कई बार कुछ मीडिया वालों को पास के जरिए वहां जाने की अनुमति मिल जाती है लेकिन एक निर्धारित रेखा से आगे जाने की इजाजत उन्हें भी नहीं होती. किसी भी कीमत पर EVM को कैमरे में कैद नहीं किया जा सकता.

मतगणना से एक हफ्ता पहले ही निर्वाचन अधिकारी प्रत्याशियों को वोट काउंटिंग सेंटर के बारे में सूचित कर देता है


पोस्टल बैलेट की गिनती पहले होती है या ईवीएम के वोटों की?
नियम 54A के मुताबिक, जब भी पोस्टल बैलेट और EVM दोनों के जरिए वोटिंग होती है, हमेशा पोस्टल बैलेट पहले गिने जाते हैं. किसी भी कीमत पर पोस्टल बैलेट पहले ही राउंड में गिने जाते हैं.

EVM के वोटों की गिनती पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू होने के 30 मिनट बाद शुरू होती है. भले ही 30 मिनट में पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी नहीं हुई हो, लेकिन इससे अधिक रुकने की अनुमति नहीं होती.

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First published: February 11, 2020, 6:15 AM IST
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