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दिल्ली: अनाज मंडी की भीषण आग देखकर ताजा हुई उपहार सिनेमा की काली यादें...

News18Hindi
Updated: December 8, 2019, 1:40 PM IST
दिल्ली: अनाज मंडी की भीषण आग देखकर ताजा हुई उपहार सिनेमा की काली यादें...
उपहार सिनेमा कांड में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारवालों ने न्याय की लंबी लड़ाई लड़ी.

दिल्ली (Delhi) की अनाज मंडी में लगी भीषण आग ने 22 साल पुराने उपहार सिनेमा कांड (Uphaar Cinema Tragedy) की काली यादें लोगों के जेहन में ताजा कर दी हैं.

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  • Last Updated: December 8, 2019, 1:40 PM IST
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देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में लोगों की नींद सुबह एक बुरी खबर के साथ खुली. रानी झांसी रोड (Rani Jhansi Road)  स्थित अनाज मंडी में भीषण आग से हुई 43 मौतों की खबर ने हरतरफ मातमी सन्नाटा पसार दिया. इस घटना ने दिल्ली में 22 साल पहले हुए उपहार सिनेमा कांड की काली यादें लोगों के जेहन में ताजा कर दीं. उस अग्निकांड में 59 लोगों की मौत भगदड़, दम घुटने और जलने की वजह से हो गई थी. उपहार सिनेमा कांड को देश के सबसे भीषण अग्निकांडों में गिना जाता है.

13 जून 1997 का वो काला दिन
13 जून 1997 की सुबह में उपहार सिनेमा के ग्राउंड फ्लोर पर दो ट्रांसफॉर्मर लगाए गए थे. इन ट्रांसफॉर्मर के इंस्टालेशन पूरा होने के कुछ ही देर बाद सिक्योरिटी गार्ड ने ट्रांसफॉर्मर के पास एक हल्के धमाके जैसी आवाज सुनी. उसने ट्रांसफॉर्मर के पास धुआं देखा. इसके बाद सिनेमा स्टाफ की तरफ से इसकी जानकारी फायर ब्रिगेड और दिल्ली विद्युत बोर्ड को दी. निरीक्षण के बाद पाया गया कि ट्रांसफॉर्मर के भीतर कुछ इलेक्ट्रिक वायर चिपक जाने के कारण ऐसा हुआ और ट्रांसफॉर्मर का कुछ हिस्सा जल गया है. दिल्ली विद्युत बोर्ड की तरफ से रिपेरिंग का काम करीब साढ़े दस से 11 बजे के बीच पूरा कर दिया गया. और थोड़ी देर बाद से ट्रांसफॉर्मर के जरिए इलेक्ट्रिक सप्लाई का काम शुरू कर दिया गया.

आरोप लगाया जाता है कि ट्रांसफॉर्मर की रिपेयरिंग का काम ठीक तरीके से नहीं हो पाया था. ट्रांसफॉर्मर के एक हिस्से में हुई रिपेयरिंग के बाद दूसरे हिस्से में दिक्कतें होना शुरू हो गईं. दूसरे हिस्से के भीतर स्पार्क हुआ और इसने अंदर ही अंदर इस हिस्से को जलाना शुरू कर दिया. काफी देर तक जलने के बाद इसमें एक छेद हो गया और इसके जरिए तेल रिसने लगा. इस रिसते तेल की वजह से ट्रांसफॉर्मर के भीतर की आग बाहर फैलने लगी और धीरे पार्किंग एरिया तक पहुंच गई. ये शाम करीब 5 बजे की बात है. नतीजा ये हुआ कि ग्राउंड फ्लोर की पार्किंग पर खड़ी कारों में आग लग गई. धीरे-धीरे ये आग पूरे कंपांउंड में फैलने लगी.



सिनेमा हाल बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर था. शाम 3 से 6 के मैटिनी शो में लोग बॉर्डर फिल्म देख रहे थे. फर्स्ट फ्लोर पर लगी आग से उठते धुआं एयर कंडीशन के जरिए हॉल के भीतर मौजूद लोगों का दम घोंटने लगा. भगदड़ मच गई. जहरीली कार्बन मोनो ऑक्साइड ने लोगों की जिंदगियां खत्म करनी शुरू कर दी थी. आनन-फानन में लोगों को नजदीकी एम्स और सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया गया. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी. इस घटना में 59 लोगों की मौत हुई और भगदड़-आपाधापी की वजह से 103 घायल हुए.

जांच और मुआवजाइस घटना के मजिस्ट्रेट जांच लगाई गई जिसने करीब 20 दिन बाद 3 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंपी. इस रिपोर्ट में सिनेमा हाल के मैनेजमेंट, दिल्ली विद्युत बोर्ड, सिटी फायर सर्विस और दिल्ली पुलिस की लाइसेंस ब्रांच को भी जिम्मेदार ठहराया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक कमीशनखोरी ने इस दुर्घटना में बड़ा योगदान दिया था. इस रिपोर्ट में सिनेमा मैनेजमेंट को सबसे बड़ा जिम्मेदार बताया गया था. इसके मुताबिक मैनेजमेंट ने फायर सर्विस को जानकारी देने में देर लगाई. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ट्रांसफॉर्मर और कार पार्किंग के बीच पर्याप्त दूरी नहीं रखी गई थी जिसकी वजह से आग इतनी तेजी से फैली. इसके बाद कोर्ट ने सिनेमा मालिक सुशील अंसल, उनके भाई गोपाल, दिल्ली विद्युत बोर्ड के इंस्पेक्टर और फायर सर्विस के दो अधिकारियों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था. 27 जुलाई को सुशील अंसल और उसके बेटे प्रणव अंसल को गिरफ्तार कर लिया गया.

सीबीआई जांच
जब इस कांड में न्याय को लेकर मांग तेज हुई तो मामले में सीबीआई जांच करवाई गई. सीबीआई ने चार्जशीट 15 नवंबर 1997 को सौंप दी जिसमें 16 लोगों को आरोपी बनाया गया था. इसमें सिनेमा मालिक सुशील अंसल और गोपाल अंसल के नाम थे. साल 2000 तक मामले में सारी गवाही कर ली गई थी और फिर पूरे मामले की सुनवाई करीब एक दशक तक चली.



कोर्ट का फैसला
2007 में इस मामले में फैसला आया. इस फैसले में अंसल बंधुओं सहित 12 लोगों को दोषी पाया गया. अंसल बंधुओं को दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई. इसके अलावा सात दूसरे आरोपियों, जिनमें तीन उपहार सिनेमा के मैनेजर थे, को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई. मामला बाद में अपर कोर्ट में गया और 19 अगस्त 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं को तीस करोड़ रुपए हर्जाना देने की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने अंसल बंधुओं की सजा बरकरार रखी थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पहले ही दोनों सजा पूरी कर चुके थे.
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First published: December 8, 2019, 12:52 PM IST
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