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3 हफ्ते में दिल्ली की दो महिला मुख्यमंत्रियों का निधन, जानें कितना कुछ कॉमन था दोनों के बीच

3 हफ्ते के भीतर दिल्ली ने दो पूर्व महिला मुख्यमंत्रियों को खो दिया

3 हफ्ते के भीतर दिल्ली ने दो पूर्व महिला मुख्यमंत्रियों को खो दिया

3 हफ्ते के भीतर दिल्ली ने अपनी दो महिला मुख्यमंत्रियों को खो दिया. सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित राजनीतिक तौर पर एकदूसरे के प्रतिद्वंद्वी थे लेकिन दोनों के बीच बहुत कुछ कॉमन भी था...

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    तीन हफ्तों के भीतर दिल्ली की दो पूर्व महिला मुख्यमंत्रियों का निधन हो गया. शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी थीं. सुषमा स्वराज दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के तौर पर जानी गईं तो शीला दीक्षित को तीन बार दिल्ली की सीएम रहने का मौका मिला. सुषमा स्वराज को बीजेपी की पहली महिला मुख्यमंत्री होने की उपलब्धि हासिल है. इन दो महिला मुख्यमंत्रियों के बीच बहुत कुछ कॉमन था तो कुछ मामलों में वो एकदूसरे से अलग भी थीं.

    शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज दोनों का निधन हार्ट अटैक से हुआ. 20 जुलाई 2019 को हार्ट अटैक से दिल्ली की तीन बार की मुख्यमंत्री और कांग्रेस की सीनियर लीडर शीला दीक्षित का निधन हुआ. इसके तीन हफ्ते के भीतर मंगलवार 6 अगस्त 2019 को हार्ट अटैक की वजह से दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं, पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज नहीं रहीं. सुषमा स्वराज को हार्ट अटैक के बाद एम्स में भर्ती करवाया गया था, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली.

    सुषमा स्वराज के खाते में कई राजनीतिक उपलब्धियां रहीं. वो हरियाणा सरकार में सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनीं. दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के तौर पर पद संभाला. किसी राष्ट्रीय पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता के तौर पर काम किया. ये सारी उपलब्धियां उन्होंने अपने राजनीतिक कौशल और समझबूझ से हासिल की.

    सुषमा स्वराज बनीं दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री

    दिल्ली के सीएम के तौर पर सुषमा स्वराज का कार्यकाल बहुत छोटा रहा. वो 13 अक्टूबर 1998 से लेकर 3 दिसंबर 1998 तक दिल्ली की सीएम रहीं. 3 दिसंबर 1998 को विधानसभा से इस्तीफा देकर वो एक बार फिर से राष्ट्रीय राजनीति में आ गईं. इसके बाद शीला दीक्षित ने दिल्ली के सीएम का पद संभाला. दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों की सबसे काबिल महिला नेताओं में से एक थीं.

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    दिल्ली के सीएम के तौर पर सुषमा स्वराज का कार्यकाल छोटा रहा


    हालांकि शीला दीक्षित के राजनीतिक खाते में लगातार 15 वर्षों तक दिल्ली के सीएम रहने की उपलब्धि शामिल रही. शीला दीक्षित 1998 से लेकर 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. 2013 में उन्हें आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के हाथों हार मिली. 2013 के विधानसभा चुनाव में शीला दीक्षित 25,864 वोटों से हार गईं. लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष का पद भी संभाला.

    शीला दीक्षित ने दिल्ली का विकास किया और सुषमा स्वराज देश के विकास में भागीदार बनीं

    शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते ही दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन हुआ. उनके कार्यकाल में दिल्ली में फ्लाईओवर का जाल बिछा. दिल्ली को मेट्रो ट्रेन के तौर पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का सबसे बड़ा तोहफा हासिल हुआ. शीला दीक्षित सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाली महिला थीं. उन्होंने दिल्ली को एक आधुनिक और वर्ल्ड क्लास शहर बनाने में जो योगदान दिया था, उसे उनके विरोधी भी स्वीकार करते हैं.

    सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित राजनीतिक रूप से एकदूसरे की प्रतिद्वंद्वी रहीं लेकिन दोनों के बीच निजी जिंदगी में सामान्य रिश्ते थे. शीला दीक्षित के निधन पर सुषमा स्वराज ने कहा था 'हमलोग राजनीतिक जीवन में एकदूसरे के खिलाफ रहे लेकिन निजी जिंदगी में एकदूसरे के दोस्त. वो बेहतरीन इंसान थीं.'

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    शीला दीक्षित लगातार 15 वर्षों तक दिल्ली की सीएम रहीं


    शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज दोनों ने सार्वजनिक जीवन में कामयाबी पाईं. शीला दीक्षित ने जहां दिल्ली को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और राजधानी के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वहीं सुषमा स्वराज ज्यादातर वक्त तक राष्ट्रीय राजनीति में ही रहीं. उन्होंने सूचना प्रसारण मंत्रालय से लेकर विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली.

    विदेश मंत्री के तौर पर काफी लोकप्रिय रहीं सुषमा स्वराज

    शीला दीक्षित दिल्ली के सीएम के तौर पर मशहूर रहीं तो सुषमा स्वराज देश के विदेश मंत्री के तौर पर. विदेश मंत्री रहते हुए जिस तरह से उन्होंने भारतीय नागरिकों की विदेशों में मदद की, उसने सबका दिल जीत लिया. ट्विटर पर सक्रियता की वजह से उनतक पहुंचना किसी के लिए आसान था. लोगों ने प्यार से उन्हें सुपर मॉम कहा.

    दोनों ही नेता महिलाओं की रोल मॉडल रहीं. दोनों ने राजनीति में अपना दामन किसी भी तरह के दाग से बचाए रखा. सुषमा स्वराज की पहचान जहां चौड़ी बिंदी, साड़ी और उनकी प्यारी मुस्कान रही तो शीला दीक्षित भी सार्वजनिक जीवन में करीने से साड़ी पहने और चेहरे पर हमेशा मुस्कान ओढ़े नजर आईं. राजनीतिक तौर पर एकदूसरे के विरोधी रहीं दोनों महिला नेता सार्वजनिक जीवन में अपने व्यवहार की वजह से एकदूसरे के करीब दिखाई पड़ीं.

    दिल्ली के लिए ये बड़े सदमे की बात है. पिछले एक साल के दौरान दिल्ली के तीन मुख्यमंत्रियों का निधन हो चुका है. दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके मदन लाल खुराना का निधन पिछले साल अक्टूबर में हो गया था. वो 1993 से लेकर 1996 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे थे.

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    जब सुषमा के लिए उज़्बेकी महिला ने गाया था 'इचक दाना बीचक दाना...' देखें Video

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