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Delhi Results 2020: इन रणनीतियों की वजह से केजरीवाल ने जीती दिल्ली

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 2:38 PM IST
Delhi Results 2020: इन रणनीतियों की वजह से केजरीवाल ने जीती दिल्ली
अरविंद केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली के सीएम बनने जा रहे हैं

अरविंद केजरीवाल सरकार (Arvind Kejiwal) ने चुनाव के शुरुआत से ही अपनी सरकार के काम के आधार पर वोट मांगा. बीजेपी (BJP) की कोशिश थी कि चुनाव में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे को प्रमुखता मिले. लेकिन केजरीवाल बड़ी सफाई और चतुराई से चुनाव में इन मुद्दों से दूरी बनाए रखी...

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  • Last Updated: February 11, 2020, 2:38 PM IST
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अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) बड़ी आसानी से दिल्ली (Delhi) में सरकार (Government) बनाते दिख रहे हैं. वो तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री (CM) बनने जा रहे हैं. आम आदमी पार्टी को 2015 जैसी सफलता तो नहीं मिली है लेकिन इसके बावजूद आप की जीत को कम नहीं आंका जा सकता. दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. खुद प्रधानमंत्री मोदी ने रैलियां की. गृहमंत्री अमित शाह ने रोड शो किया. बीजेपी शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली में आकर पार्टी का प्रचार किया. मोदी सरकार के धाकड़ कैबिनेट मंत्रियों ने पूरा जोर लगा दिया. लेकिन इसके बावजूद आम आदमी पार्टी आसानी से जीत निकाल ले गई. इसलिए ये जीत काफी महत्वपूर्ण हो जाती है.

सवाल है कि चुनाव में वो कौन सी वजहें रहीं जो आप की जीत में प्रभावी साबित हुईं, केजरीवाल की किस रणनीति ने पार्टी के पक्ष में काम किया, केजरीवाल की जीत में किस चीज ने सबसे अहम भूमिका निभाई?

दिल्ली की जनता ने केजरीवाल के काम पर विश्वास जताया
अरविंद केजरीवाल ने चुनाव के शुरुआत से ही अपनी सरकार के काम के आधार पर वोट मांगा. बीजेपी की कोशिश थी कि चुनाव में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे को प्रमुखता मिले. लेकिन केजरीवाल बड़ी सफाई और चतुराई से चुनाव में इन मुद्दों से दूरी भी बनाए रखी और इन पर सधी हुई प्रतिक्रिया भी दी.

केजरीवाल सरकार ने काम भी किया और पिछले एक साल के दौरान अपने काम का खूब प्रचार भी किया. ऐसा नहीं है कि 2015 में उन्होंने जो चुनावी वादे किए थे, वो सब पूरे कर ही दिए. लेकिन उनके पास बताने के लिए बहुत कुछ था. खासकर पिछले 5 वर्षों के दौरान केजरीवाल की सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर जो काम किए थे, वो जनता के सामने थे. बिजली और पानी के मुद्दे पर भी केजरीवाल सरकार ने बाजी मारी. दिल्ली की जनता ने केजरीवाल सरकार के काम पर जीत की मुहर लगाई है.

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दिल्ली में एक बार फिर केजरीवाल की सरकार बन रही है


हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को नहीं बनने दिया चुनावी मुद्दाकेजरीवाल ने हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को चुनावी मुद्दा नहीं बनने दिया. जब भी उनसे सीएए और एनआरसी जैसे विषयों पर सवाल पूछा गया, उन्होंने साफ कहा कि वो अपने काम के आधार पर वोट मांग रहे हैं. इन मुद्दों का राज्य की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. सीएए पर उन्होंने सधी हुई प्रतिक्रिया दी.

सीएए पर हो रहे बवाल के शुरुआती दिनों में एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उन्हें कानून से कोई दिक्क्त नहीं है. सवाल है कि इस कानून की जरूरत क्या थी? क्या हम अपने लोगों को रोटी और रोजगार दे पा रहे हैं कि हम दूसरे देशों के लोगों के बारे में सोचने लग गए हैं?

चुनावों में ध्रुवीकरण होने से बचा ले गए केजरीवाल
शाहीन बाग के प्रदर्शन को लेकर अरविंद केजरीवाल को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश हुई. लेकिन वो चतुराई से बच निकले. बिना सीएए के खिलाफ गए केजरीवाल ने कहा कि किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का हक हासिल है. केजरीवाल इस मुद्दे पर फंसने की बजाए किनारे से बच निकलने में भलाई समझी. जबकि बीजेपी की तरफ से रामप्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर जैसे नेताओं ने शाहीन बाग को लेकर भड़काऊ बयान दिए गए. लेकिन अरविंद केजरीवाल इनपर प्रतिक्रिया देने से बचते रहे.

एक साल पहले से बनाने लगे थे रणनीति
केजरीवाल इस चुनाव की तैयारी काफी पहले से कर रहे थे. प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बयानबाजी से बचना उनकी पहली रणनीतियों में से एक रहा. उन्होंने बीजेपी के खिलाफ अपनी रणनीति बदलते हुए सबसे पहले पीएम मोदी के खिलाफ बयानबाजी बंद कर दी. उन्होंने समझ लिया था कि ऐसी बयानबाजी का उलटा असर हो रहा है. इसके बाद उन्होंने अपने काम के प्रचार पर ध्यान दिया. पिछले एक साल के दौरान दिल्ली सरकार ने विज्ञापन पर अच्छा खासा खर्च किया है.

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दिल्ली में चल गया केजरीवाल का जादू


हिंदू वोटर्स को तुष्ट करने के लिए हनुमानजी की शरण ली
अरविंद केजरीवाल जानते थे कि धार्मिक मुद्दों पर उनकी छोटी सी चूक भी भारी पड़ सकती थी. वो जानते थे कि हिंदू वोटर्स की नाराजगी का जोखिम लेना ठीक नहीं है. इसलिए उन्होंने चुनावों के दौरान हिंदू वोटर्स के तुष्टिकरण के प्रयास तक किए. एक टीवी इंटरव्यू में हनुमान चालीसा का पाठ कर अपनी आस्तिकता साबित की. अपने चुनाव प्रचार के दौरान वो हनुमान के मंदिर भी गए.

उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी बीजेपी वालों को नकली हिंदू कहा. केजरीवाल ने अपने विरोधियों को सलाह दी कि वो हनुमान चालीसा का जाप करें इससे उनका दिमाग शांत होगा. इसे बीजेपी के हिंदुत्व पॉलिटिक्स की काट की तरह देखा गया.

केजरीवाल ने विवादों से बनाए रखी दूरी
पूरे चुनाव में अरविंद केजरीवाल विवादों से दूर रहे. चुनाव के दौरान पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा पर आरोप लगा कि उन्होंने केजरीवाल को आतंकवादी कहा. चुनाव आयोग ने प्रवेश वर्मा की इस टिप्पणी पर सख्ती भी दिखाई और उन्होंने बीजेपी के स्टार कैंपेनर्स की लिस्ट से बाहर कर दिया. वर्मा के भड़काने वाले बयान पर आप ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी.

आप नेता संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अरविंद केजरीवाल को दिल्ली का बेटा बताया. केजरीवाल ने भी ट्वीट कर कहा कि- दिल्लीवालों आपका बेटा आतंकवादी नहीं है. आठ फरवरी को जवाब देना भाजपा वालों को. ये अरविंद केजरीवाल की रणनीति के साथ उनकी संयमित प्रतिक्रिया की जीत भी है.

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First published: February 11, 2020, 2:38 PM IST
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