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Delhi Election Results 2020: बिना किसी वादे के केजरीवाल ने कैसे जीता मुस्लिम वोटर्स का दिल

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: February 12, 2020, 10:25 AM IST
Delhi Election Results 2020: बिना किसी वादे के केजरीवाल ने कैसे जीता मुस्लिम वोटर्स का दिल
मुस्लिम वोटर्स ने एक बार फिर आप पर भरोसा जताया है

आम आदमी पार्टी (Aam Aadami Party) ने मुस्लिम (Muslim) आबादी को लेकर कोई वायदा नहीं किया था. सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लेकर आम आदमी पार्टी ने अपना रुख साफ नहीं किया. चुनावों के दौरान आप ने हमेशा इन मुद्दों से दूरी बनाए रखी.

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  • Last Updated: February 12, 2020, 10:25 AM IST
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इस बार फिर दिल्ली के चुनाव (Delhi Assembly Election 2020) में मुस्लिम वोटर्स (Muslim Voters) ने आम आदमी पार्टी (Aam Aadami Party) पर भरोसा जताया. चुनाव नतीजों से साफ हो गया कि 2013 से पहले कांग्रेस को वोट करने वाली मुस्लिम आबादी अब आम आदमी पार्टी के साथ है. मुस्लिम बिरादरी ने 2015 में भी आम आदमी पार्टी का साथ दिया था, लेकिन इस बार हालात अलग होने के बावजूद मुसलमानों ने आप पर भरोसा जताया.

आम आदमी पार्टी ने मुस्लिम आबादी को लेकर कोई वायदा नहीं किया था. सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लेकर आम आदमी पार्टी ने अपना रुख साफ नहीं किया. चुनावों के दौरान आप ने हमेशा इन मुद्दों से दूरी बनाए रखी. दिल्ली के शाहीन बाग में हो रहे सीएए के खिलाफ प्रदर्शन से अरविंद केजरीवाल दूर ही रहे. सीएए पर उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि इस कानून की जरूरत नहीं थी. आम आदमी पार्टी मुस्लिमों के ज्यादा करीब जाकर हिंदू वोटर्स को नाराज नहीं करना चाहती थी. आप ने सीएए, एनपीआर और एनआरसी को राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा बताकर उसे चुनावी मुद्दा बनने ही नहीं दिया, लेकिन इसके बावजूद मुस्लिम वोटर्स ने उन्हें वोट किया.

कांग्रेस के वायदे पर मुस्लिमों ने नहीं जताया भरोसा
केजरीवाल ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में हनुमान चालीसा का पाठ करके खुद की हिंदू आस्तिकता साबित की. वो चुनावों के दौरान हनुमान मंदिर गए. लेकिन इन सबका असर उनके मुस्लिम वोटर्स पर नहीं पड़ा.

जबकि कांग्रेस सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लेकर मुखर थी. कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि अगर दिल्ली में उनकी सरकार बनती है तो सीएए के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाकर केंद्र सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग करेगी.

कांग्रेस ने ये भी वादा किया था कि अगर वो सत्ता में आती है तो दिल्ली में एनआरसी नहीं लागू होने देगी और एनपीआर को भी उसके मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा. मुस्लिमों को लुभाने वाले ऐसे वायदों के बावजूद मुस्लिम वोटर्स ने कांग्रेस पर भरोसा नहीं किया.

delhi results 2020 how arvind kejriwal aap won the heart of muslim voters without any election promise
मुस्लिम वोटर्स ने 2015 में भी आम आदमी पार्टी को वोट किया था
दिल्ली के मुस्लिम वोटर्स का ध्रुवीकरण हुआ?
दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी के 5 मुस्लिम विधायक चुने गए हैं. कांग्रेस को मुस्लिम वोटर्स ने पूरी तरह से खारिज कर दिया. ओखला से आप के अमानतुल्लाह खान ने अपने विरोधी को 71 हजार से भी ज्यादा वोटों के बड़े अंतर से हराया. इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार परवेज हाशमी अपनी जमानत तक नहीं बचा सके.

सीलमपुर से आप के अब्दुल रहमान ने बीजेपी के संजय जैन को शिकस्त दी. यहां से 5 बार के कांग्रेसी विधायक रहे मतीन अहमद तीसरे नंबर पर रहे. बल्लीमारान सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार इमरान हुसैन ने बीजेपी के लता सोढ़ी को हराया. यहां से 5 बार विधायक रहे दिग्गज कांग्रेसी नेता हारून युसूफ तीसरे नंबर पर रहे.

इसी तरह से मटियामहल सीट से आप उम्मीदवार शोएब इकबाल ने बीजेपी के रविन्दर गुप्ता और कांग्रेस के मिर्जा जावेद अली को शिकस्त दी. मुस्तफाबाद सीट से आप के हाजी युनूस ने बीजेपी के जगदीश प्रधान को हराया. यहां से कांग्रेस उम्मीदवार अली मेहंदी की बुरी हालत हुई.

चुनाव नतीजों को देखने से लगता है कि मुस्लिमों ने आप को समर्थन देने का पक्का मन बना लिया था. उन्हें पता था कि कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने से कोई फायदा नहीं क्योंकि किसी भी हालत में दिल्ली में वो सरकार नहीं बनाने जा रहे हैं. चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा भी कि मुस्लिम वोटर्स को इस बात पर भरोसा नहीं था कि हम दिल्ली में बीजेपी को हरा पाएंगे. इसलिए उनका आम आदमी पार्टी की तरफ जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ.

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2013 के बाद दिल्ली के मुस्लिम वोटर्स ने आप का समर्थन किया है


5 साल के कार्यकाल में आप ने मुसलमानों से नजदीकी बनाए रखी
आप ने अपने काम के आधार पर वोट मांगा. हालांकि उन्होंने अपने 5 साल के कार्यकाल में मुस्लिम समुदाय के वोटर्स को ध्यान में रखकर कुछ काम भी किए. पिछले साल केजरीवाल सरकार ने इमामों की सैलरी 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार प्रति महीने कर दी.

मस्जिद की देखरेख करने वाले कर्मचारियों का मासिक वेतन 9 हजार से बढ़ाकर 16 हजार कर दिया. इमाम और मस्जिद की देखरेख करने वाले कर्मचारियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड तनख्वाह देती है. यहां तक कि केजरीवाल ने एक कदम आगे बढ़ते हुए, जो मस्जिद दिल्ली वक्फ बोर्ड के अंतर्गत नहीं आते हैं, उनके इमाम और कर्मचारियों की सैलरी भी बढ़ा दी. ऐसे प्रयासों की वजह से आम आदमी पार्टी ने मुस्लिम आबादी से नजदीकी बनाए रखी.

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First published: February 12, 2020, 10:09 AM IST
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