दंगों के दोषियों पर क्‍या कहता है देश का कानून, दोषियों को कितने साल तक की हो सकती है सजा?

दंगों के दोषियों पर क्‍या कहता है देश का कानून, दोषियों को कितने साल तक की हो सकती है सजा?
पिछले सप्‍ताह उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में अचानक हिंसा भड़क उठी थी. इस मामले में पुलिस ने 150 से ज्‍यादा एफआईआर दर्ज कर 600 से ज्‍यादा लोगों को गिरफ्तार किया है.

दिल्‍ली में हुए उपद्रव (Delhi Violence) में दोषी पाए जाने वाले लोगों को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) तक की कैद हो सकती है. इस मामले में सजा इस बात से तय होती है कि किसी आरोपी पर किन-किन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

  • Share this:
नई दिल्‍ली. देश की राजधानी दिल्‍ली में नागरिकता संशोधन कानून 2019 (CAA 2019) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू से ही हिंसक (Delhi Violence) हो गए थे. सबसे पहले जामिया मिलिया इस्‍लामिया (Jamia Millia Islamia) में विरोध प्रदर्शन ने हिंसा का रूप ले लिया. इसके बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं और शरजील इमाम (Sharjeel Imam) जैसे छात्र नेताओं ने बयानबाजी कर लोगों को भड़काने का काम किया. इसके बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के नेता वारिस पठान (Waris Pathan) ने लोगों को उकसाने वाला बयान दिया. आखिर में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) ने रही-बची कसर पूरी कर दी. इसी दिन शाम को दिल्‍ली में सीएए के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़क गई.

दिल्‍ली की हिंसा में अब तक 46 लोगों की मौत (Killed) हो चुकी है, जबकि 200 से ज्‍यादा घायल या गंभीर रूप से जख्‍मी हुए हैं. दिल्‍ली में जब उपद्रव थमा तो हर तबके से दोषियों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की मांग उठने लगी.  पुलिस ने दिल्‍ली में हुए उपद्रव के सिलसिले में 150 से ज्‍यादा मुकदमे दर्ज किए हैं. वहीं, अब तक 600 से ज्‍यादा लोगों को गिरफ्तार (Arrested) कर लिया गया है. कानून के जानकारों का कहना है कि दंगों के दोषियों को 6 महीने से आजीवन कारावास (Life Imprisonment) तक की सजा हो सकती है.

हत्‍या या हत्‍या के प्रयास का भी चलेगा केस
दंगों (Riots) में शामिल लोगों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा-147, 148 (दंगा-फसाद), 149 (आज्ञा के विरूद्ध इकट्ठे होना) लगाई जाती है. इसमें दोषी पाए जाने पर 2 साल की कैद और जुर्माना लगता है. इसके अलावा आईपीसी की धारा- 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 323 (जानबूझकर घायल करना) भी लगाई जाती है. आईपीसी की धारा-147 के तहत दर्ज मामलों में पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर सकती है. दंगों में लोगों की मौत होने या गंभीर रूप से जख्‍मी होने पर हत्‍या (धारा-302) और हत्‍या के प्रयास (धारा-307) की धाराएं जोड़ी जाती हैं. इसके तहत दोषी पाए जाने वाले आरोपी को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है.



दंगों में हत्‍या के लिए दोषी पाए जाने वाले आरोपी को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है.




साजिश में शामिल तो अपराधी के बराबर सजा
किसी अपराध में आरोपियों की संख्‍या एक से ज्‍यादा होने पर पुलिस आपराधिक साजिश की धारा-120ए और 120बी भी जोड़ती है. दंगों के ज्‍यादातर मामलों में अन्‍य धाराओं के साथ ही इन धाराओं को जोड़ा ही जाता है. यह जरूरी नहीं है कि आरोपी खुद अपराध को अंजाम दे. किसी साजिश में शामिल होना भी कानून की निगाह में गुनाह है. ऐसे में अगर किसी अपराध में शामिल आरोपी को उम्रकैद, दो वर्ष या उससे अधिक के कठिन कारावास की सजा होती है तो साजिश में शामिल आरोपी को भी धारा-120बी के तहत अपराध करने वाले के बराबर सजा मिलेगी.

भड़काऊ भाषण पर 1 साल तक की सजा
आम लोगों को हिंसा के लिए उकसाने वाले भाषण (Hate Speech) देने वाले व्‍यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा-153ए, 505ए, 505(1), 505(2) के तहत मामला दर्ज किया जाता है. धारा-153 के अनुसार, अगर कोई शख्स भाषण के दौरान समाज में घृणा फैलाने या लोगों को उकसाने वाले ऐसे बयान देता है, जिससे हिंसा भड़क जाती है तो दोषी को 1 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है. साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. आपत्तिजनक भाषण या बयान से उपद्रव नहीं होता है तो भी दोषी को 6 माह तक कैद की सजा दी जा सकती है. हालांकि, यह जमानती और संज्ञेय अपराध है.

caa, nrc, jaffrabad, maujpur, delhi, amit shah, अमित शाह, मौजपुर, गोकुलपुरी, नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर, दिल्ली, जाफराबाद, जाफराबाद मेट्रो स्टेशन, मौजपुर-बाबरपुर मेट्रो स्टेशन
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के दोषी को 5 साल तक कारावास की सजा के साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.


घृणा फैलाने में दोषी तो 3 साल तक की कैद
आईपीसी की धारा-505 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी समुदाय को किसी दूसरे संप्रदाय के खिलाफ अपराध के लिए उकसाए या ऐसे बयानों को प्रकाशित कराए तो दोषी पाए जाने पर उस शख्स को 3 साल तक की कैद हो सकती है. विभिन्न वर्गों में दुश्मनी या नफरत पैदा करना, वैमनस्य पैदा करना, आपत्तिनक भाषण या बयान देना, जिससे विभिन्न धार्मिक, भाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य की भावनाएं पैदा हो तो आरोपी के खिलाफ धारा 505 की उपधारा 1 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है. इसमें भी दोषी को 3 साल तक की कैद हो सकती है.

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान में 10 साल तक जेल
हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान को लेकर अलग कानून है. इसके लिए 1984 में लोक संपत्ति नुकसान निवारक अधिनियम बनाया गया. इसके तहत 7 धाराएं हैं. कानून के तहत सार्वजनिक संपत्ति (Public Property) को नुकसान पहुंचाने के दोषी व्‍यक्ति को 5 साल तक के कारावास के साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है. इसके अलावा आगजनी कर या विस्‍फोटक का इस्‍तेमाल कर अगर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है तो दोषी को 10 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा हो सकती है. इसमें अदालत जुर्माना भी लगा सकती है. कानून के मुताबिक सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति का नुकसान पहुंचाने के दोषी को तब तक जमानत नहीं मिल सकती, जब तक कि वह नुकसान की 100 फीसदी भरपाई नहीं कर देता है.

ये भी पढ़ें:

एक रामायण जो 'ऊं' से नहीं 'बिस्मिल्‍लाह' से होती है शुरू, जानें कहां है और किसने लिखा सोने से जड़ा ये महाकाव्‍य

होली के रंगों पर भारी है कोरोना वायरस का डर, सोशल मीडिया पर ये मैसेज वायरल
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading