जानिए उपकरण के बारे में जो पकड़ेगा पृथ्वी के बाहर जीवन

पृथ्वी (Earth) के बाहर जीवन (Life) तलाशने के लिए यह उपकरण (Instruement) ग्रह की मिट्टी का पूरा विश्लेषण कर उसमें जीवन के संकेत ढूंढ सकेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
पृथ्वी (Earth) के बाहर जीवन (Life) तलाशने के लिए यह उपकरण (Instruement) ग्रह की मिट्टी का पूरा विश्लेषण कर उसमें जीवन के संकेत ढूंढ सकेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पृथ्वी (Earth) के बाहर जीवन के संकेतों (Life signatures) की तलाश के लिए शोधकर्ताओं ने खास माइक्रोचिप (Microchip) विकसित की है जो दूसरे ग्रहो की मिट्टी में बायोसिग्नेचर्स (Biosignatures) ढूंढ सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 20, 2020, 9:30 PM IST
  • Share this:
vजब भी हम पृथ्वी (Earth) के बाहर जीवन (Life) की बात करते हैं तो हम कई स्तरों पर बात करते हैं. पहले तो हमें उन हालातों (Conditions) की तलाश होती है जिसमें जीवन पनप सके जैसे पानी, हवा और अन्य स्थितियां जो जीवन के समर्थन के लिए आवश्यक हैं. इसके बाद विभिन्न स्तरों की जीवन की अनुकूलता की बात से मामला आगे बढ़ता है. हाल ही में इसके लिए शोधकर्ताओं ने एक पूरी तरह से ऑटोमेटेड माइक्रोचिप इलेक्ट्रोफोरेसिस एनालाइजर (microchip electrophoresis analyser) विकसित किया है जो जीवन के संकेतों (Biosignatures) की पहचान कर सकता है.

क्या खासियत है इस चिप की
इस माइक्रोचिप की खासियत यह है कि यदि इसे किसी ग्रह पर विचरण कर रहे रोवर में लगा दिया जाए तो वह पृथ्वी का बाहर की उस जमीन पर बायोसिग्नेचर्स (biosignatures) यानि जीवन के संकेतों का पता लगा सकता है. अगर पृथ्वी की बात की जाए तो सौरमंडल में वह खास जगह पर स्थित है जिससे वह जीवन के विभिन्न रूपों का समर्थन कर सकती है.

आसान काम नहीं
अगर ऐसे ही हालात दूसरे ग्रहों पर हों तो वहां भी जीवन का अस्तित्व हो सकता है. लेकिन वर्तमान में जीवन है या फिर पहले कभी जीवन रहा होगा इस तरह के संकेतों को पकड़ना एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है. इस दिशा में एक संवेदनशील प्रमाण जैविक अणुओं की उपस्थिति है.



दो तकनीकों का उपयोग
इससे पहले मंगल पर गए अभीयानों में इस तरह के  प्रयास किए गए. ये अभियान मास स्पेक्ट्रोमैट्री के साथ गैस क्रोमैटोग्राफी (GC-MS) का उपयोग करते थे. जिसमें वे यौगिकों को अलग अलग कर उनकी पहचान करने की कोशिश करते थे.

Earth, , Habitability, Life
पृथ्वी (Earth)पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियों (Habitability) का कहीं और होना बहुत ही मुश्किल है.


क्या समस्या थी इनके साथ
नासा द्वारा अनुदानित अध्ययन के मुताबिक इस तकनीक की कई सीमाएं थीं. इसमें कुछ अणुओं का विशेषण सीमित ही था. जैसे अगर नमूनों में पानी, खनिज या लवणों की मौजूदगी हो तो ऑर्गेनिक एसिड्स का विश्लेषण मुश्किल हो जाता था.

क्यों नहीं मिल पा रहे हैं मंगल पर जीवन रहे होने के संकेत, खुल गया रहस्य

एक ही उपकरण में दोनों सुविधाएं
यह शोध अमेरिकन केमिकल सोसाइटी के एनालिटिकल कैमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इस उपकरण में माइक्रोपिच इलेक्टआफोरेसिस (Microchip electrophoresis, ME) के आधार पर पहले यौगिकों को अलग अलग किया जाता है जिसके बाद लेजर इंड्यूस्ड फ्लोरेसेंस (laser-induced fluorescence, LIF) डिटेक्शन तकनीक का प्रयोग किया जाता है.

पूर्णतः स्वचलित
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक आदर्श है, लेकिन  अभी जितने भी उपकरण उपयोग में लाए जा रहे हैं वे अर्द्ध स्वचलित हैं  पूर्ण रूप से स्वचलित नहीं हैं. इसलिए वे उपकरण अतरग्रहीय अभियानों के लिए उपयोगी नहीं हैं.

ये खासियतों की जरूरत थी उपकरण में
पीटर विलिस और उनके साथी  एक पोर्टेबल, बैटरी से चलने वाला उपकरण बनाना चाहते थे जो नमूने ले सके, उन पर लेबल लगा सके, उन्हें छांट सके और फिर उसके बाद उनके जैविक अणुओं की पहचान कर सके और यह सारे काम एक के बाद एक स्वचलित यानि ऑटोमेटेड अंदाज में कर सके.

Mars , perseverance Rover, Soil Samples
इस उपकरण (Instrument) की खास बात यह है कि यह दूसरे ग्रहों (Planets) पर भेजे गए रोवर्स (Rovers) के साथ काम कर सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: @NASA)


दो माइक्रोचिप लगाई गईं
शोधकर्ताओं ने इसमें दो माइक्रोचिप लगाईं एक का काम तरल नमूने की प्रोसेसिंग और लेबलिंग था जबकी दूसरी का काम यौगिकों को अलग अलग करना था. इसके परीक्षण के लिए चिली के रेगिस्तान में मंगल ग्रह के जैसे वातावरण में इस उपकरण को एक रोवर सिस्टम के साथ लगाया गया.

शनि के चंद्रमा के बारे में क्या कहती हैं कैसिनी के आंकड़ों से बनी नई तस्वीरें

रोवर ने मिट्टी खोद कर नमूने लिए और एक्सट्रैक्टर ने नमूने जमा किए जिसमें पानी डाल कर उन्हें गर्म किया गया जिसके बाद विश्लेषण  के लिए यौगिकों को निकाला गया. उपकरण ने अमीनों एसिड्स की पहचान कर उनका सफल विशेषण किया. यह पूरी की पूरी प्रक्रिया स्वचलित थी. अभी इस उपकरण पर दूसरे ग्रहों के हालात के मुताबिक ढालने के लिए काम होना बाकी है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज